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ईस्ट चाइना सी में चीन की हजारों नावें क्यों जमा हो गईं

जापानी सरकारी सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची 19 मार्च को वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से नेताओं के शिखर सम्मेलन में मुलाकात के दौरान नई योजना की घोषणा करेंगी.

ईस्ट चाइना सी में चीन की हजारों नावें क्यों जमा हो गईं
चीन कुछ इस तरह समुद्र में सैन्य तैयारी कर रहा है.
  • ईस्ट चाइना सी में हजारों चीनी मछली पकड़ने वाली नावें ज्योमेट्रिक फॉर्मेशन बनाकर लगभग 30 घंटे तक एकत्रित रहीं
  • विशेषज्ञों का मानना है कि ये नावें मछली पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि सैन्य तैयारी या युद्धाभ्यास के लिए था
  • जापान ने ताइवान पर हमले की स्थिति में समर्थन का संकेत दिया है और अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रहा है
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चीन समुद्र में नया खेल खेल रहा है. ईस्ट चाइना सी (East China Sea) में मछली पकड़ने वाली हजारों चीनी नावें एक साथ देखी गई हैं. ये ज्योमेट्रिक फॉर्मेशन बना रही हैं. एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि यह चीन की युद्ध तैयारियों का हिस्सा है. क्रिसमस के दिन जहाज ट्रैकिंग डेटा की निगरानी करते हुए, ingeniSPACE के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जेसन वांग ने महसूस किया कि ईस्ट चाइना सी में कुछ असामान्य हो रहा है, क्योंकि मछली पकड़ने वाली नावें लगभग 400 किलोमीटर (लगभग 250 मील) लंबे दो समानांतर उल्टे L के आकार में जमा हो गईं थीं. एक-दूसरे से लगभग 500 मीटर (1,640 फीट) की दूरी पर स्थित ये नावें तूफानी हवाओं के बीच लगभग 30 घंटे तक अपनी जगह पर डटी रहीं और फिर अचानक तितर-बितर हो गईं.

ingeniSPACE सैटेलाइट इमेज और जहाजों के संकेतों के डेटा का विश्लेषण करती है. वांग ने व्यस्त जलमार्ग पर चलने वाले हजारों जहाजों के बीच मछली पकड़ने वाली लगभग 2,000 नौकाओं को उनके स्वचालित पहचान तंत्र (एआईएस) के जरिए देखा. यह एक जीपीएस जैसा संकेत है, जिसका उपयोग वाणिज्यिक जहाज टक्करों से बचने के लिए करते हैं. 

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समुद्री और सैन्य एक्सपर्ट वांग ने एएफपी को बताया कि 25 दिसंबर को ताइवान के उत्तर-पूर्व में लगभग 300 किलोमीटर दूर मछली पकड़ने वाली चीनी नावों का यह जमावड़ा इतना बड़ा था, जितना उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था. जनवरी की शुरुआत में एक और घटना सामने आई, जिसमें ईस्ट चाइना सी के उसी क्षेत्र में लगभग 400 किलोमीटर लंबे एक आयताकार एरिया में मछली पकड़ने वाले लगभग 1,000 चीनी जहाज एक दिन से अधिक समय तक एकत्रित रहे. वांग ने ताइपे में एएफपी को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि 25 दिसंबर की घटना में भी इनमें से सैकड़ों जहाज देखे गए थे. चीन का विशाल मछली पकड़ने वाला बेड़ा येलो सी, ईस्ट चाइना सी और साउथ चाइना सी में सक्रिय है. इन तीनों जगह चीन का मुकाबला जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, वियतनाम और फिलीपींस से है.

खुले समुद्र में इतनी बड़ी संख्या में चीनी मछली पकड़ने वाले जहाज ज्योमेट्रिक फॉर्मेशन में क्यों इकट्ठा हुए, इस पर बहस जारी है, लेकिन एक्सपर्ट इस बात पर आम राय हैं कि ये नाव मछली पकड़ने के लिए तो वहां नहीं आईं थीं.

एक्सपर्ट्स की राय...

  1. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इसका एकमात्र संभावित स्पष्टीकरण यह है कि चीन बड़ी संख्या में मछली पकड़ने वाले जहाजों को संगठित करने की अपनी क्षमता का परीक्षण कर रहा था, जिन्हें संभावित रूप से किसी सैन्य अभियान में तैनात किया जा सकता है, जैसे कि ताइवान की नाकाबंदी या आक्रमण, या जापान के साथ संकट की स्थिति में.
  2. वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) में एशिया मैरीटाइम ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव के निदेशक ग्रेगरी पोलिंग ने 25 दिसंबर की घटना के बारे में कहा, "मैंने बंदरगाह के बाहर कहीं भी इतनी बड़ी संख्या में चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाओं का जमावड़ा कभी नहीं देखा."
  3. ऑस्ट्रेलियाई नौसेना युद्ध अधिकारी जेनिफर पार्कर ने कहा कि ये युद्धाभ्यास सैन्य दृष्टिकोण से किया गया प्रदर्शन था, ताकि देखने वालों को यह दिखाया जा सके कि नौकाओं में अपने संचालन को समन्वित करने की क्षमता है.
  4. ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा कॉलेज में विशेषज्ञ सहयोगी के रूप में कार्यरत पार्कर ने कहा, "मैंने पूरी दुनिया का चक्कर लगाया है और मैंने मछुआरों को एक-दूसरे के इतने करीब, इतनी एकाग्रता के साथ काम करते हुए नहीं देखा है."
  5. समुद्री निगरानी में विशेषज्ञता रखने वाली फ्रांसीसी कंपनी अनसीनलैब्स ने एएफपी के लिए 25 दिसंबर के डेटा की पुष्टि की और जहाजों के इस जमावड़े को आश्चर्यजनक और असामान्य बताया. विशेषज्ञों को पूरा भरोसा था कि अधिकांश जहाज वास्तविक थे और नकली नहीं थे. नकली पोत वे होते हैं, जिनमें एआईएस डेटा में हेरफेर करके पोत के स्थान या पहचान के बारे में भ्रामक जानकारी दी जाती है.
  6. अमेरिकी नौसेना के पूर्व पनडुब्बी युद्ध अधिकारी और अब सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी में रक्षा कार्यक्रम के सहायक वरिष्ठ फेलो थॉमस शुगार्ट ने कहा कि शामिल जहाजों की संख्या एक सरकारी ऑपरेशन का संकेत देती है.
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 क्या 'समुद्री मिलिशिया' बना ली

  1. वैश्विक सैन्य शक्ति सूची में युद्धपोतों और पनडुब्बियों की संख्या के मामले में चीन की नौसेना विश्व में पहले स्थान पर है. विशेषज्ञों का कहना है कि बीजिंग ताइवान सहित किसी भी क्षेत्रीय संकट या संघर्ष की तैयारी के तहत मछली पकड़ने वाली नौकाओं, नौकाओं और मालवाहक जहाजों सहित अपने विशाल नागरिक बेड़े का भी उपयोग कर रहा है. चीन ने ताइवान पर कब्जा करने के लिए बल प्रयोग करने की धमकी दी है, और अमेरिका का मानना है कि साल 2027 तक चीन ताइवान पर हमला कर सकता है.
  2. अमेरिकी रक्षा विभाग ने चीन की सैन्य शक्ति पर कांग्रेस को सौंपी गई अपनी 2025 की रिपोर्ट में कहा: "पीएलए (चीन की सेना) अपने 2027 के लक्ष्यों की ओर लगातार प्रगति कर रहा है" और "चीन को उम्मीद है कि वह उस वर्ष के अंत तक ताइवान से युद्ध लड़ने और जीतने में सक्षम होगा."
  3. बीजिंग ने हाल के वर्षों में ताइवान पर सैन्य दबाव बढ़ा दिया है और वो लगभग हर रोज द्वीप के चारों ओर लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की तैनाती कर रहा है. चीन ने ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर अभ्यास भी किए हैं, जिनमें वो अक्सर क्षेत्र की नाकाबंदी और उस पर कब्जा करने का अभ्यास करता है.
  4. शुगार्ट ने कहा कि ताइवान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान की योजना में नागरिक पोत केंद्रीय भूमिका निभाएंगे. चीन की नौसेना के पास ताइवान पर आक्रमण को संभव बनाने के लिए आवश्यक सैनिकों और उपकरणों को उतारने के लिए पर्याप्त पोत नहीं हैं. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि दिसंबर और जनवरी में हुए सैन्य जमावड़े में शामिल, मछली पकड़ने वाली कई नावें संभवतः चीन के समुद्री मिलिशिया का हिस्सा थीं. समुद्री मिलिशिया में प्रशिक्षित मछली पकड़ने वाली नौकाएं शामिल हैं जो सेना की सहायता करती हैं.
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जापान खुलकर ताइवान के साथ

ट्रंप शासन के दौरान अमेरिका जहां ताइवान पर ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है, वहीं जापान ने साफ कर दिया है कि ताइवान पर हमला होने पर वो चुप नहीं बैठेगा. इसके साथ ही हथियारों से दूर रहने वाले जापान ने फिर से अपनी सेना को मजबूत करना शुरू कर दिया है. दो सूत्रों के मुताबिक, जापान अगले हफ्ते अमेरिका को सूचित करेगा कि वह "गोल्डन डोम" मिसाइल रक्षा पहल में शामिल होने का इरादा रखता है और उसे उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट वार और अन्य संघर्षों के चलते वाशिंगटन मिसाइल उत्पादन में उसकी मदद मांग सकता है.

जापानी सरकारी सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची 19 मार्च को वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से नेताओं के शिखर सम्मेलन में मुलाकात के दौरान इस नई योजना की घोषणा करेंगी. उधर, चीन ने ताइवान के प्रधानमंत्री चो जुंग-ताई की सप्ताहांत में टोक्यो यात्रा की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने एक बेसबॉल मैच देखा, जबकि जापान ने सोमवार को कहा कि उनका सरकारी अधिकारियों से कोई संपर्क नहीं था.

जापान के विदेश मंत्रालय ने एएफपी को बताया कि 2004 में तूफान के कारण ताइवान के प्रधानमंत्री यू श्यी-कुन द्वारा जापान में किए गए ठहराव को छोड़कर, चो की यह यात्रा 1972 के बाद किसी मौजूदा ताइवानी प्रधानमंत्री की पहली जापान यात्रा है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चो की "बुरी मंशा है और वह गुप्त रूप से और चोरी-छिपे जापान जाकर अलगाववादी उकसावे वाली छोटी-मोटी हरकतें कर रहे हैं." गुओ जियाकुन ने सोमवार को एक नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, "इस तरह के गुप्त सौदे और चालें निंदनीय हैं." जाहिर है चीन दबाब बढ़ा रहा है.

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