राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक संकट के बीच, पाकिस्तान में प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ की सिफारिश पर बुधवार देर रात संसद भंग कर दी गई. जिससे पाकिस्तान में अब आम चुनाव का मंच तैयार हो गया. हालांकि पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान इन चुनाव में भाग लेने में असमर्थ होंगे. अप्रैल 2022 में इमरान खान को पद से हटाए जाने के बाद से उनके खिलाफ दायर कई मामलों में से एक में भ्रष्टाचार का दोषी ठहराए जाने पर उन्हें जेल में डाल दिया गया.
पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने निवर्तमान सरकार को नया अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त करने के लिए तीन दिन और आम चुनाव कराने के लिए 90 दिन का समय दिया है. हालांकि, निवर्तमान सरकार ने चेतावनी दी है कि चुनाव में अगले साल तक की देरी हो सकती है.
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पाकिस्तान और इमरान खान अब किस राह पर?
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सरकार चुनाव स्थगित करने पर विचार कर रही है, क्योंकि वह सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियों को रोकने के लिए संघर्ष कर रही है, जबकि पहले से ही नकदी संकट से जूझ रहे देश में अस्थिरता का खतरा पैदा होने का डर सता रहा है. पाकिस्तान में अस्थिरता ने अमेरिका को भी अलर्ट कर दिया है.
समाचार एजेंसी एएफपी के हवाले से जॉन किर्बी ने कहा, "हम स्पष्ट रूप से किसी भी कार्रवाई के बारे में चिंतित हैं - विशेष रूप से हिंसक कार्रवाई - जो पाकिस्तान या, स्पष्ट रूप से, किसी भी अन्य देश में अस्थिरता में योगदान दे सकती है, जिसके साथ हम आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए साझा हितों का एक सेट साझा करते हैं."
इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने 2018 में देश में हुए पिछले आम चुनावों में सबसे अधिक सीटें जीतीं थी. पूर्व क्रिकेट स्टार ने तीन दिन बाद प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली. आम चुनावों के फिर से नजदीक आने के साथ, पाकिस्तान की सेना, जिसने 1947 के बाद से कम से कम तीन सफल तख्तापलट किए हैं, एक बार फिर संघर्षग्रस्त देश पर अपनी छाया डाल रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इमरान खान की लोकप्रियता और उनका निष्कासन, दोनों काफी हद तक सेना से प्रभावित थे, जिनके साथ उनका नियमित रूप से टकराव होता रहता था. पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान ने सेना के खिलाफ असहमति का अभियान चलाया और आरोप लगाया कि सेना ने राजनीति में हस्तक्षेप किया है. उन्होंने एक ख़ुफ़िया अधिकारी पर नवंबर में उन पर हत्या के प्रयास का "मास्टरमाइंड" होने का भी आरोप लगाया, जिसके दौरान उनके पैर में गोली लगी थी.
पाकिस्तान में जल्द चुनाव के लिए विरोध प्रदर्शन करने और अपने पीटीआई सांसदों को संसद से बाहर निकालने के बावजूद, सेना के खिलाफ इमरान खान का अभियान अंततः विफल हो गया क्योंकि उन पर 200 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे.
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