- अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान को आर्थिक रूप से बड़ा झटका देने के लिए नए प्रतिबंधों की घोषणा की
- जो देश ईरान के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखेंगे उन्हें अमेरिकी डॉलर वित्तीय प्रणाली से बाहर किया जाएगा- अमेरिका
- ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों का जवाब सैन्य कार्रवाई और तेल निर्यात में कटौती की धमकी देकर दिया है
अमेरिका ने पूरी दुनिया को खुली चुनौती दे दी है. अमेरिका के वित्त मंत्री (ट्रेजरी सेक्रेटरी) स्कॉट बेसेंट ने ईरान को आर्थिक रूप से सबसे बड़ा झटका देने की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि सोमवार का दिन ईरान के लिए इकनॉमिक डी डे साबित होगा. फिर उन्होंने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जो देश ईरान को पैसे की अवैध तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग करने की अनुमति देते रहेंगे, उन्हें अमेरिकी डॉलर वाली वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर दिया जाएगा. उन्होंने साफ साफ संकेत दिया कि वह चीन के खिलाफ भी एक्शन लेने से हिचकेंगे नहीं. वहीं ईरान ने अमेरिका के बढ़े हुए आर्थिक प्रतिबंधों का जवाब देने का वादा किया है.
अब प्रतिबंध वाले बमों से जंग जीतने की कोशिश
सोमवार को बेसेंट ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों के बारे में बात की. इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान की कमाई के सभी रास्तों को बंद करना है. उन्होंने कहा कि जो देश ईरान के साथ अपने आर्थिक संबंध खत्म नहीं करेंगे, उन पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है. बेसेंट ने उन देशों के नाम नहीं बताए जिन पर अमेरिका आगे चलकर अलग से प्रतिबंध लगा सकता है. लेकिन ट्रेजरी विभाग ने 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के दौरान अब बीच का रास्ता अपनाना या अस्पष्ट स्थिति में रहना स्वीकार नहीं किया जाएगा.
बेसेंट ने चेतावनी देते हुए कहा, “जो लोग तेहरान की मदद कर रहे हैं, उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि अमेरिका के इरादे और ताकत को परखने की कोई कीमत नहीं होगी. कोई भी देश ऐसी व्यवस्था से फायदा मिलने की उम्मीद न करे, जबकि वह उन लोगों की मदद कर रहा हो जो इस व्यवस्था को खत्म करना चाहते हैं. अब दुनिया के नेताओं को फैसला करना होगा कि उन्हें समृद्धि या अलग-थलग पड़ना, शांति या आतंक और अमेरिका या ईरान में से किसे चुनना है.”
प्रतिबंधों से जुड़े सवालों के जवाब में बेसेंट ने कहा कि ईरान के लिए लेन-देन की सुविधा देने वाली या ईरान को उसके तेल से कमाई करने में मदद करने वाली किसी भी संस्था को निशाना बनाया जाएगा. अमेरिका का कहना है कि इन नए प्रतिबंधों का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था पर और दबाव डालना है. ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही पुराने अमेरिकी प्रतिबंधों और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण बुरी तरह प्रभावित है.
चीन पर भी प्रतिबंध की तैयारी?
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को संकेत दिया कि ईरान के साथ आर्थिक संबंधों के कारण US द्वारा लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों से चीन को छूट नहीं मिलेगी. प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बेसेंट ने कहा, "कोई भी US प्रतिबंधों की पहुंच से बाहर नहीं है. बेसेंट उन सवालों का जवाब दे रहे थे कि क्या अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाने की धमकी चीन तक भी बढ़ेगी, जो ईरान का मुख्य व्यापारिक साझेदार है। उन्होंने सीधे तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं की कि चीनी बैंकों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे या नहीं.
ट्रंप का दावा- ‘ईरान पूरी तरह ढह रहा है'
इस बीच, दिन की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया कि ईरान पूरी तरह ढह रहा है. एक दूसरी पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ रिपब्लिकन जीत रहे हैं. उन्होंने ईरान को ऐसा देश बताया जो “आर्थिक और सैन्य रूप से मौत की ओर बढ़ रहा है.”
ईरान ने कहा पलटवार करेंगे
इस घोषणा से पहले, ईरान ने अमेरिका के किसी भी आर्थिक कदम के जवाब में सैन्य कार्रवाई करने और खाड़ी से तेल के निर्यात में और कटौती करने की धमकी दी थी. इसके बाद, ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदानिजादेह ने कहा कि हम अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि न तो चीन और न ही रूस ने अमेरिका के इन कदमों को माना है, और अनुमान लगाया कि दूसरे देश भी इनका विरोध करेंगे. प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने कसम खाई कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे को खतरा हुआ, तो वे अमेरिका के अहम हितों और ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण रास्तों (एनर्जी चोकपॉइंट्स) पर जबरदस्त हमला करेंगे.
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