- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान को कमजोर किए बिना युद्ध खत्म नहीं होगा
- वेंस ने ईरान के अधिकांश सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर ऑपरेशन जल्द खत्म होने का दावा भी किया है
- पाकिस्तान ईरान-अमेरिका विवाद में मध्यस्थता कर सकता है, वेंस के पाकिस्तान दौरे की संभावना जताई जा रही है
ईरान युद्ध कब खत्म होगा... इस सवाल का जवाब शायद अमेरिका के पास भी नहीं है. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक पॉडकास्ट में कहा कि जब तक ईरान को कमजोर नहीं किया जाएगा, तब तक युद्ध चलेगा. जेडी वेंस के इस बयान से लगा कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग अभी लंबी चल सकती है. लेकिन इसके बाद जेडी वेंस ने 'ईरान में ज्यादातर सैन्य लक्ष्य पूरे, जल्द खत्म होगा ऑपरेशन' का दावा कर कनफ्यूजन खड़ी कर दी है. इससे पहले जेडी वेंस इजरायल पर इस युद्ध में अमेरिका को शामिल करने को लेकर फटकार भी लगा चुके हैं. इस बीच खबर आ रही है किउपराष्ट्रपति वेंस ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को खत्म करने के मकसद से बातचीत के लिए पाकिस्तान जा सकते हैं. आखिर, ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका चाह क्या रहा है?
"हमें यहां फिर हमला करने नहीं आना"
अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने पॉडकास्ट में कहा कि जब तक ईरान को कमजोर नहीं किया जाएगा, तब तक युद्ध चलेगा. पॉडकास्ट बेनी शो में वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इसे कुछ दिन और लंबा खींच सकते हैं. जब हम ईरान छोड़े तो सुनिश्चित करके निकले कि हमें यहां फिर हमला करने नहीं आना है. अमेरिका ईरान में रहने की इच्छा नहीं रखता है. ऐसे में हम इस युद्ध को बीच में छोड़कर नहीं जा सकते हैं. उपराष्ट्रपति वेंस के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान के साथ अमेरिका की जंग अभी लंबी चल सकती है.

Photo Credit: x.com/WhiteHouse
ईरान से सुलह की कोशिश, पाकिस्तान जा सकते हैं अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस
ईरान और अमेरिका-इजरायल जंग की आंच अब दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंच चुकी है. अमेरिका अपनी शर्तों पर युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन ईरान अपनी जिद पर डटा है. इस बीच पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच सुलह कराने की बात कही. इस बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान दौरे की खबरें सामने आ रही हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को खत्म करने के मकसद से बातचीत के लिए पाकिस्तान जा सकते हैं. अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने दो वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान के खुद को एक अहम मीडिएटर के तौर पर पेश करने के बाद इस हफ्ते इस्लामाबाद में एक मीटिंग अरेंज करने की तैयारी चल रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शायद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के दूसरे सीनियर अधिकारियों के साथ जेडी वेंस पाकिस्तान जा सकते हैं. इससे पहले द फाइनेंशियल टाइम्स ने कहा था कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने रविवार को ट्रंप से बात की थी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की.
ईरान में टारगेट हासिल करने के करीब अमेरिका!
व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान निर्धारित समय से आगे चल रहे हैं और अपने मुख्य उद्देश्यों के करीब पहुंच रहे हैं. वहीं वॉशिंगटन तेहरान के साथ "सार्थक" बातचीत जारी रखे हुए है, जिसका उद्देश्य इस संघर्ष को समाप्त करना है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया से कहा कि अमेरिका "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के मुख्य लक्ष्यों को हासिल करने के करीब है. उन्होंने कहा, "सिर्फ तीन हफ्तों से थोड़ा अधिक समय में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी एक बड़ी सैन्य जीत साबित हुआ है." उन्होंने बताया कि अब तक 9,000 से अधिक दुश्मन ठिकानों पर हमला किया जा चुका है.

इसे भी पढ़ें:- इजरायल में मिसाइल-ड्रोन से मचाई तबाही, ईरान जंग में हूती विद्रोहियों का शामिल होना कितना खतरनाक? समझिए
टारगेट के करीब, तो फिर अमेरिका क्यों भेज रहा हजारों सैनिक?
अमेरिका के ईरान में अगर ज्यादातर लक्ष्य हासिल हो गए हैं, तो फिर अमेरिका, मिडिल ईस्ट में हजारों सैनिक क्यों भेज रहा है? ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, करीब 3,500 मरीन और नाविकों का एक दल मध्य पूर्व पहुंच चुका है. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने गुरुवार को पहले रिपोर्ट दी थी कि पेंटागन मध्य पूर्व में 10,000 तक अतिरिक्त जमीन सैनिकों को तैनात करने पर विचार कर रहा है, ताकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास कूटनीति के अलावा सैन्य विकल्प भी रहें. इन नए सैनिकों में पैदल सेना और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल हो सकती हैं. इन्हें उन करीब 5,000 मरीन और हजारों पैराट्रूपर्स के साथ शामिल किया जाएगा, जिन्हें पहले ही इस इलाके में भेजने का आदेश दिया जा चुका है. अगर अमेरिका जमीनी युद्ध में उतरता है, तो ईरान से जंग लंबी चल सकती है.

इसे भी पढ़ें:- जंग के बीच ईरान सरकार में पड़ी फूट! राष्ट्रपति और IRGC चीफ किस बात पर भिड़ गए?
ईरान युद्ध पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले कुछ दिन इस जंग के लिए काफी अहम रहने वाले हैं. अमेरिका जल्द अपने इरादे साफ कर सकता है. वहीं, ईरान ने भी जमीनी हमलों के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. हालांकि, अमेरिका अगर ईरान में जमीनी हमले करता है, तो जंग खतरनाक मोड पर पहुंच सकती है. ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं