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ट्रंप के कारनामों से कैसे पिछड़ रहा है अमेरिका? एक्सपर्ट्स ने खोल दी पोल

भारत अब इनोवेशन का नया केंद्र बन चुका है जहां वैज्ञानिकों ने जटिल शोध एक साल में पूरा किया, जबकि अमेरिका में टैलेंट की कमी बढ़ रही है.

ट्रंप के कारनामों से कैसे पिछड़ रहा है अमेरिका? एक्सपर्ट्स ने खोल दी पोल

US Immigration Policy: अमेरिका कभी दुनिया भर की बेहतरीन प्रतिभाओं के लिए 'सपनों का देश' माना जाता था, अब अपनी ही सख्त इमिग्रेशन नीतियों के कारण पिछड़ता नजर आ रहा है. सिलिकॉन वैली के मशहूर इमिग्रेशन एक्सपर्ट विवेक वाधवा ने आगाह किया है कि डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान शुरू हुई सख्त नीतियों और वीजा पाबंदियों की वजह से अमेरिका से टैलेंट और इनोवेशन बाहर निकल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि जो अमेरिका कभी नवाचार में दुनिया का नेतृत्व करता था, वह अब खुद को पीछे धकेल रहा है.

विवेक वाधवा ने कहा कि अमेरिका अपने यहां से सबसे होनहार और चतुर लोगों को देश से खदेड़ रहा है. इन 'पिछड़ी' नीतियों की वजह से देश को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. वाधवा का दावा है कि सिलिकॉन वैली की चमक फीकी पड़ने लगी है क्योंकि जिन प्रवासियों ने इसे खड़ा किया था. अब उनके लिए यहां रास्ते बंद होते जा रहे हैं.

स्टार्टअप्स की दुनिया में घटता दबदबा

वाधवा के अनुसार, सिलिकॉन वैली में प्रवासियों द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप्स की संख्या में भारी गिरावट आई है. एक समय था जब यहां के आधे स्टार्टअप्स बाहरी लोगों की तरफ से स्थापित किए गए थे, लेकिन पिछले एक दशक में यह आंकड़ा घटकर 40-44 प्रतिशत पर आ गया है.

विशेषज्ञों को डर है कि अब यह आंकड़ा गिरकर 30 प्रतिशत या उससे भी कम रह गया होगा. यह गिरावट सीधे तौर पर अमेरिका की भविष्य की आर्थिक तरक्की और तकनीकी बढ़त पर सवालिया निशान लगाती है.

इस स्थिति को खुद विवेक वाधवा ने अपने निजी अनुभव से महसूस किया. उन्होंने जब सिलिकॉन वैली में एक मेडिकल डायग्नोस्टिक्स कंपनी शुरू करने की कोशिश की, तो उन्हें न तो पर्याप्त टैलेंट मिला और न ही निवेश मिल सका. निवेशक उन प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाने से कतरा रहे थे जिनकी रिसर्च अमेरिका से बाहर हो रही थी. आखिरकार, उन्हें अपना पूरा काम भारत शिफ्ट करना पड़ा, जो अब अमेरिका की नीतियों की वजह से एक बड़े लाभार्थी के रूप में उभर रहा है.

भारत बना 'इनोवेशन' का नया केंद्र

जब वाधवा ने अपनी कंपनी का कामकाज भारत में आईआईटी मद्रास और एम्स (AIIMS) जैसे संस्थानों के साथ मिलकर शुरू किया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे. वाधवा के मुताबिक, जिस काम को अमेरिका में करना नामुमकिन लग रहा था, भारतीय विशेषज्ञों ने उसे एक साल के भीतर ही कर दिखाया. उनका कहना है कि भारत के पास आज भी ऐसे वैज्ञानिक और इंजीनियर हैं जो थर्मोडायनामिक्स, प्लाज्मा फिजिक्स और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग जैसे जटिल विषयों की गहरी समझ रखते हैं, जबकि अमेरिका के स्टार्टअप ईकोसिस्टम में अब ऐसे टैलेंट की भारी कमी हो गई है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि आज अमेरिका में टैलेंट को बुलाना किसी बुरे सपने जैसा है. H-1B वीजा का बैकलॉग और प्रशासनिक रुकावटें इतनी बढ़ गई हैं कि किसी भी विदेशी एक्सपर्ट को बुलाना अब मुमकिन नहीं रह गया है. यही कारण है कि अब इनोवेशन ग्लोबल हो चुका है और अमेरिका की 'बंद दरवाजों' की नीति उसे दुनिया से अलग-थलग कर रही है.

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चंदन सिंह राजपूत
Senior Sub Editor
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