संयु्क्त राष्ट्र:
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान स्थित हक्कानी उग्रवादी नेटवर्क पर और गुट के आत्मघाती अभियान प्रमुख जाकिर कारी पर वैश्विक प्रतिबंध लगा दिया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता बदलती रहती है। बृहस्पतिवार से इस माह के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष भारत है।
परिषद की अफगानिस्तान..तालिबान प्रतिबंध समिति ने उस सूची में हक्कानी समूह और कारी जाकिर को शामिल कर दिया, जिस सूची के संगठनों या व्यक्तियों की संपत्ति जब्त कर दी जाती है, यात्राओं पर तथा हथियारों की खरीदी बिक्री पर रोक लगा दी जाती है।
हक्कानी नेटवर्क पर जिस दिन प्रतिबंध लगाया गया, उसी दिन अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने जाकिर को ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित कर उस पर वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए।
संयुक्त राष्ट्र की समिति ने कहा है कि हक्कानी नेटवर्क ने काबुल में कई अपहरण तथा आत्मघाती हमले किए और लक्षित हत्याओं को अंजाम दिया है। समिति के अनुसार, हक्कानी नेटवर्क का अलकायदा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से संबंध है।
जाकिर के बारे में समिति ने कहा कि वह हक्कानी नेटवर्क के लिए अफगानिस्तान के काबुल, तखार, कुंदुज और बगलान प्रांतों में चलाए जाने वाले सभी आत्मघाती अभियानों का प्रमुख है। वह आत्मघाती हमलावरों का प्रशिक्षण देखता है और आईईडी बनाने के गुर सिखाता है।
पाकिस्तान अभी सुरक्षा परिषद का सदस्य है। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में फिलहाल 131 व्यक्ति और तीन गुट हैं। इस कदम का स्वागत करते हुए, विश्व निकाय में अमेरिका की स्थायी प्रतिनिधि सुजैन राइस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जो किया उससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का, अफगानिस्तान में हिंसक हमले करने की क्षमता पर अंकुश लगाने का संकल्प जाहिर होता है।
राइस ने कहा, इस कदम से, अफगानिस्तान में शांति के लिए खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की सुरक्षा परिषद की प्रतिबद्धता भी जाहिर होती है। उन्होंने कहा कि ‘विश्वव्यापी प्रतिबंध’ के बाद अब संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के लिए हक्कानी नेटवर्क और जाकिर की संपत्ति जब्त करना, यात्रा और हथियारों की खरीदी बिक्री पर प्रतिबंध लगाना जरूरी हो जाएगा।
हक्कानी नेटवर्क के आत्मघाती अभियान का प्रमुख जाकिर इस गुट के प्रशिक्षण कार्यक्रम का जिम्मा संभालता है, जिसमें हल्के और भारी हथियार तथा आईईडी निर्माण शामिल है।
जाकिर के प्रशिक्षण कार्यक्रम से चुने गए उग्रवादियों ने 2010 में चैपमेन तथा सलेरनो में गठबंधन बलों के ठिकानों पर और जून 2011 में काबुल के इंटरकॉन्टिनेंटल होटल पर हमला किया था, जिसमें 11 नागरिक और दो अफगान पुलिसकर्मी मारे गए थे। इन उग्रवादियों ने सितंबर 2011 में काबुल स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला किया था, जिसमें छह बच्चों सहित 16 अफगान नागरिक मारे गए थे।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता बदलती रहती है। बृहस्पतिवार से इस माह के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष भारत है।
परिषद की अफगानिस्तान..तालिबान प्रतिबंध समिति ने उस सूची में हक्कानी समूह और कारी जाकिर को शामिल कर दिया, जिस सूची के संगठनों या व्यक्तियों की संपत्ति जब्त कर दी जाती है, यात्राओं पर तथा हथियारों की खरीदी बिक्री पर रोक लगा दी जाती है।
हक्कानी नेटवर्क पर जिस दिन प्रतिबंध लगाया गया, उसी दिन अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने जाकिर को ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित कर उस पर वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए।
संयुक्त राष्ट्र की समिति ने कहा है कि हक्कानी नेटवर्क ने काबुल में कई अपहरण तथा आत्मघाती हमले किए और लक्षित हत्याओं को अंजाम दिया है। समिति के अनुसार, हक्कानी नेटवर्क का अलकायदा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से संबंध है।
जाकिर के बारे में समिति ने कहा कि वह हक्कानी नेटवर्क के लिए अफगानिस्तान के काबुल, तखार, कुंदुज और बगलान प्रांतों में चलाए जाने वाले सभी आत्मघाती अभियानों का प्रमुख है। वह आत्मघाती हमलावरों का प्रशिक्षण देखता है और आईईडी बनाने के गुर सिखाता है।
पाकिस्तान अभी सुरक्षा परिषद का सदस्य है। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में फिलहाल 131 व्यक्ति और तीन गुट हैं। इस कदम का स्वागत करते हुए, विश्व निकाय में अमेरिका की स्थायी प्रतिनिधि सुजैन राइस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जो किया उससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का, अफगानिस्तान में हिंसक हमले करने की क्षमता पर अंकुश लगाने का संकल्प जाहिर होता है।
राइस ने कहा, इस कदम से, अफगानिस्तान में शांति के लिए खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की सुरक्षा परिषद की प्रतिबद्धता भी जाहिर होती है। उन्होंने कहा कि ‘विश्वव्यापी प्रतिबंध’ के बाद अब संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के लिए हक्कानी नेटवर्क और जाकिर की संपत्ति जब्त करना, यात्रा और हथियारों की खरीदी बिक्री पर प्रतिबंध लगाना जरूरी हो जाएगा।
हक्कानी नेटवर्क के आत्मघाती अभियान का प्रमुख जाकिर इस गुट के प्रशिक्षण कार्यक्रम का जिम्मा संभालता है, जिसमें हल्के और भारी हथियार तथा आईईडी निर्माण शामिल है।
जाकिर के प्रशिक्षण कार्यक्रम से चुने गए उग्रवादियों ने 2010 में चैपमेन तथा सलेरनो में गठबंधन बलों के ठिकानों पर और जून 2011 में काबुल के इंटरकॉन्टिनेंटल होटल पर हमला किया था, जिसमें 11 नागरिक और दो अफगान पुलिसकर्मी मारे गए थे। इन उग्रवादियों ने सितंबर 2011 में काबुल स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला किया था, जिसमें छह बच्चों सहित 16 अफगान नागरिक मारे गए थे।
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