- ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से जारी युद्ध में हजारों मौतें, भारी आर्थिक नुकसान और विस्थापन हुआ है.
- अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के खार्ग और अन्य द्वीपों पर सैन्य हमले के विकल्प पर विचार कर रहे हैं.
- खार्ग द्वीप ईरान के कच्चे तेल के लगभग 90 प्रतिशत निर्यात का प्रबंधन करता है और इसका रणनीतिक महत्व अत्यंत है.
Iran Israel US War: ईरान का इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहा युद्ध समाप्त होता नजर नहीं आ रहा है. 28 फरवरी से शुरू हुआ यह जंग दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है. हजारों लोगों की मौत, लाखों लोग बेघर, अरबों रुपए के इंफ्रास्क्ट्रचर के नुकसान के बाद भी कोई पीछे हटने को तैयार नहीं है. शुरुआत में इस जंग का मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन था, लेकिन अब अमेरिका की नजरें ईरान के कई द्वीपों पर हैं. फारस की खाड़ी में मौजूद ईरान के इन द्वीपों पर हमले की कोशिश इस जंग को और आगे बढ़ाएगी.
खार्ग द्वीप सहित ईरान के अन्य द्वीपों पर सैन्य विकल्पों का विचार कर रहे ट्रंप
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ऐसे सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें ईरान के कब्जे वाले इन द्वीपों में से कुछ पर आक्रमण करना भी शामिल हो सकता है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप है. जो लगभग 20 वर्ग किलोमीटर में फैला है. यहां से ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का अनुमानित 90 प्रतिशत हिस्सा संभाला जाता है.
ईरान के इन 6 द्वीपों पर अमेरिका की नजर
- खार्ग द्वीप
- केश्म द्वीप
- लारक द्वीप
- अबू मूसा द्वीप
- ग्रेटर टुंब द्वीप
- लेसर टुंब द्वीप

खार्ग द्वीपः ईरान के 90 फीसदी तेल निर्यात के प्रबंधन
खार्ग ईरान के लिए बेहद अहम है. अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के कच्चे तेल के लगभग 90 प्रतिशत निर्यात का प्रबंधन यहीं से होता है. खाड़ी के उत्तरी हिस्से में स्थित खार्ग द्वीप, ईरानी तट से करीब 30 किलोमीटर दूर है और होर्मुज जलडमरूमध्य से 500 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है. यहां ईरान का सबसे बड़ा तेल टर्मिनल, पाइपलाइन नेटवर्क, स्टोरेज टैंक और अन्य अहम ढांचागत सुविधाएं मौजूद हैं.
खार्ग द्वीप के अलावा होर्मुज़ स्ट्रेट के आसपास केश्म, लारक, अबू मूसा, और ग्रेटर तथा लेसर तुंब नामक द्वीप भी अमेरिका की नजर है. ये सभी उस प्रमुख समुद्री मार्ग पर स्थित हैं, जिनसे दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है.
अबू मूसा
क्षेत्रफलः 12.8 वर्ग किलोमीटर
1971 में UAE से लिया कब्जा
ग्रेटर टुनब
क्षेत्रफलः 10.65 वर्ग किलोमीटर
1971 में UAE से लिया कब्जा
लेसर टुनब
क्षेत्रफलः 2 वर्ग किलोमीटर
1971 में UAE से लिया कब्जा

अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब के छोटे द्वीप 39 किलोमीटर चौड़े जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास स्थित हैं, जो उन्हें अत्यधिक रणनीतिक महत्व देते हैं. हालांकि इन द्वीपों का प्रशासन ईरान के अधीन है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात लंबे समय से इन पर अपना दावा करता रहा है.

ईरान के इन द्वीपों पर हमले की कोशिश कितनी खतरनाक
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ये द्वीप बंदरगाहों, हवाई पट्टियों और किलेबंद सैन्य सुविधाओं से भरे हुए हैं, जो इस बात को रेखांकित करता है कि इनका महत्व इनके छोटे से भूभाग से कहीं अधिक है.
ईरान के इन द्वीपों पर सेना की भारी तैनाती है, किलेबंदी भी है. यहां तेल भंडारण के विशाल टैंक, सुपर टैंकरों के लिए घाट, और सुरक्षा की कई परतें मौजूद हैं. खार्ग पर कब्जा करने के किसी भी प्रयास के लिए अमेरिकी युद्धपोतों को होर्मुज से गुज़रना होगा, और इस दौरान उन्हें ईरान के नियंत्रण वाले उन द्वीपों के बेहद करीब से गुजरना पड़ेगा जो प्राकृतिक 'चोकपॉइंट' का काम करते हैं.
इन द्वीपों में से तीन—अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब—को ईरान ने 1971 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ब्रिटेन से आज़ाद होने से कुछ ही दिन पहले, UAE से छीन लिया था.
यह भी पढ़ें - ईरान के खार्ग द्वीप को धमकी देकर ट्रंप क्या हासिल करना चाहते हैं? जानें ईरान के लिए इस आइलैंड के क्या मायने
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं