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ठप पड़ जाएगा ईरान का ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर, तेहरान के पास बचे हैं लगभग 3 दिन: ट्रंप

ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान का ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर ठप पड़ा तो उसे दोबारा से शुरू करने में काफी वक्त लगेगा. अगर ईरान उसे फिर से शुरू भी कर लेता है तो उसकी क्षमता आज की तुलना में 50 फीसदी हो होगी.

ठप पड़ जाएगा ईरान का ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर, तेहरान के पास बचे हैं लगभग 3 दिन: ट्रंप
ईरान को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान
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  • ट्रंप ने कहा है कि ईरान का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर तीन दिन में ठप पड़ सकता है जिससे उसकी क्षमता आधी रह जाएगी
  • ट्रंप ने बताया कि तेल पाइपलाइन के बंद होने से उसकी मरम्मत में लंबा वक्त लगेगा
  • अमेरिका ने बातचीत के प्रयासों में ठहराव दिखाया है और राजदूतों के दौरे रद्द कर दिए हैं

ईरान से जारी सीजफायर के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर तेहरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने फॉक्स चैनल से की अपनी खास बातचीत में कहा है कि ईरान के पास अब लगभग तीन दिन का समय बचा है. अगर ऐसे ही चलता रहा तो उसका ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर ठप पड़ जाएगा. जिसे ठीक करने में लंबा वक्त लगेगा. डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा है कि आप जिस बात का ज़िक्र कर रहे हैं, वह यह है कि जब आपके सिस्टम से भारी मात्रा में तेल की लाइनें गुज़र रही होती हैं.

ऐसे में अगर किसी भी वजह से वह लाइन बंद हो जाए क्योंकि आप उसे कंटेनरों या जहाज़ों में डालना जारी नहीं रख सकते (जैसा कि ईरान के साथ हुआ है; नाकाबंदी की वजह से उनके पास कोई जहाज़ नहीं हैं) तो होता यह है कि वह लाइन अंदर से फट जाती है और बंद पड़ जाती है. उसके अंदर कुछ ऐसा होता है कि वह बस फट जाती है. जितना मुझे पता है ऐसा होने में अब बस तीन दिन ही बचे हैं. अगर ऐसा हुआ तो ईरान उसे कभी भी आज की क्षमता के साथ फिर से शुरू नहीं कर पाएगा.

मैं आपको अगर दूसरे शब्दों में कहूं तो, अगर आप उसे फिर से बनाते भी हैं (हालांकि उसे पूरी तरह से फिर से बनाना बहुत मुश्किल है), तो भी वह पहले जैसा नहीं होगा. वह अपनी कुल क्षमता से सिर्फ़ 50% ही काम कर पाएगा. तो यह एक बहुत ही ज़बरदस्त घटना है, जिसका कहीं न कहीं प्रकृति से भी लेना-देना है. लेकिन जब वह लाइन आखिर में जाम हो जाती है और जब आपको उसे बंद करना पड़ता है तो इसका नुकसान काफी बड़ा होता है. जिससे निपटने में ईरान को लंबा समय लग सकता है.

ट्रंप के इस बयान से कुछ घंटे पहले ही ईरान ने भी अमेरिका से बातचीत को लेकर एक बयान दिया था. ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन ने पाकिस्तान के बहाने अमेरिका से साफ कह दिया था कि नाकेबंदी और डर के साए में बातचीच नहीं हो सकती. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत के लिए साफ ना कह दिया है. प्रेस टीवी के अनुसार, शनिवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ फोन पर हुई एक महत्वपूर्ण बातचीत में, पेजेशकियन ने जोर देकर कहा कि ईरान को दबाव या धमकियों के जरिए किसी समझौते के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. अमेरिका ने भी बातचीत का कोई मतलब न निकलता देख अपने राजदूतों का दौरा भी रद्द कर दिया है. 

ईरानी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस बात पर जोर दिया कि शांति की राह में असली बाधा बातचीत की कमी नहीं, बल्कि अमेरिका की ओर से  की जा रही शत्रुतापूर्ण कार्रवाई है. बातचीत के दौरान, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान दबाव, धमकी या घेराबंदी के साये में बातचीत नहीं करेगा.जब तक अमेरिका की शत्रुतापूर्ण हरकतें और दबाव बंद नहीं होते, तब तक विश्वास बहाल करना और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल होगा."

ईरान की अमेरिका को ये सलाह 

उन्होंने अमेरिका से अपील की कि वह हालिया तनाव के दौरान खड़ी की गई सैन्य और आर्थिक बाधाओं को हटाकर अपनी गंभीरता दिखाए. उन्होंने आगे कहा, "अमेरिका को हमारी सलाह है कि बातचीत फिर से शुरू करने और मुद्दों को सुलझाने के लिए एक मंच तैयार करने के लिए वह सबसे पहले समुद्री घेराबंदी सहित अन्य बाधाओं को हटाए." इससे पहले इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय शांति वार्ता विफल हो गई थी, जिसके बाद 13 अप्रैल से अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी ने ईरान के बंदरगाहों का रास्ता रोक रखा है.

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