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ट्रंप के सबसे भरोसेमंद AI सिपहसालार श्रीराम कृष्णन कौन हैं, क्यों छोड़ रहे अपना पद?

श्रीराम कृष्णन की गिनती दुनिया के सबसे प्रभावशाली तकनीकी निवेशकों और नीति निर्माताओं में होती है.श्रीराम कृष्णन का व्हाइट हाउस तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था.

ट्रंप के सबसे भरोसेमंद AI सिपहसालार श्रीराम कृष्णन कौन हैं, क्यों छोड़ रहे अपना पद?
श्रीराम कृष्णन ने माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक (अब मेटा), ट्विटर और स्नैप जैसी दिग्गज कंपनियों में ऊंचे पदों पर काम किया.
AFP

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे भरोसेमंद एआई (AI) सिपहसालार श्रीराम कृष्णन व्हाइट हाउस छोड़ने जा रहे हैं. ट्रंप सरकार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पॉलिसी के सबसे बड़े चेहरे श्रीराम कृष्णन ने एलान किया है कि वह जून के आखिर में अपने पद से इस्तीफा दे देंगे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला प्रस्थान माना जा रहा है. कृष्णन का जाना ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वह अमेरिका की पूरी एआई नीति की रीढ़ माने जाते थे.

व्हाइट हाउस छोड़ने की जानकारी खुद श्रीराम कृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा की. उन्होंने बताया कि वह कुछ समय का ब्रेक लेंगे और इसके बाद अमेरिका के सामने एआई क्षेत्र में आ रही बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए काम करेंगे. हालांकि, वह आगे क्या करने वाले हैं, इसका खुलासा उन्होंने अभी नहीं किया है. अपने फेयरवेल स्पीच में उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की जमकर तारीफ की और कहा कि आज अगर अमेरिका एआई की रेस में दुनिया में सबसे आगे है, तो वह सिर्फ ट्रंप के नेतृत्व की वजह से है.

व्हाइट हाउस में बिताए 18 महीने

श्रीराम कृष्णन ने व्हाइट हाउस में लगभग 18 महीने का कार्यकाल पूरा किया. इस दौरान उन्होंने अमेरिका की तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करने के लिए कई बड़े नीतिगत फैसले लिए. कृष्णन ने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान 'अमेरिकन एआई एक्शन प्लान' और 'नेशनल एआई पॉलिसी फ्रेमवर्क' जैसे अहम ढांचों को तैयार किया गया. उन्होंने एआई एक्सीलरेशन पार्टनरशिप को बढ़ावा दिया.

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था राज्यों के अधिकारों को सीमित करने वाला एक कार्यकारी आदेश तैयार करना. 'द वाशिंगटन पोस्ट' के मुताबिक, कृष्णन उस नीति को बनाने में शामिल थे, जो अमेरिकी राज्यों को एआई पर अपने अलग और कड़े नियम बनाने से रोकती है, ताकि पूरे देश में तकनीक का विकास बिना किसी रुकावट के हो सके. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने भी उनकी तारीफ करते हुए उन्हें प्रशासन के लिए एक 'बेहद महत्वपूर्ण संपत्ति' बताया है.

कौन हैं श्रीराम कृष्णन? 

भारत के चेन्नई में जन्मे श्रीराम कृष्णन की गिनती आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली तकनीकी निवेशकों और नीति निर्माताओं में होती है. उन्होंने चेन्नई के एसआरएम (SRM) इंजीनियरिंग कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की और इसके बाद वह अमेरिका चले गए. अमेरिका के टेक कॉरपोरेट जगत में उन्होंने एक बड़ा मुकाम हासिल किया. उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक (अब मेटा), ट्विटर और स्नैप जैसी दिग्गज कंपनियों में ऊंचे पदों पर काम किया.

इसके बाद, वह सिलिकॉन वैली की मशहूर वेंचर कैपिटल फर्म 'एंड्रीसन होरोविट्ज़' से जुड़ गए और एक प्रमुख निवेशक के रूप में उभरे. जब एलन मस्क ने ट्विटर (अब X) को खरीदा था, तब श्रीराम कृष्णन उनके सबसे भरोसेमंद सलाहकारों की कोर टीम में शामिल थे. यही वजह थी कि जब 20 जनवरी 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की, तो उन्होंने कृष्णन को अपना 'सीनियर व्हाइट हाउस पॉलिसी एडवाइजर ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' नियुक्त किया.

नियुक्ति पर हुआ था भारी विरोध, फिर भी बने ट्रंप के चहेते

श्रीराम कृष्णन का व्हाइट हाउस तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था. जब साल 2024 में ट्रंप ने उनके नाम का एलान किया था, तब रिपब्लिकन पार्टी के भीतर और ट्रंप के कट्टपंथी समर्थकों ने इसका कड़ा विरोध किया था. ट्रंप की करीबी सहयोगी लॉरा लूमर ने कृष्णन के पुराने बयानों को लेकर उन पर निशाना साधा था, जिसमें कृष्णन ने अमेरिकी आव्रजन सुधारों का समर्थन किया था.

इस भारी राजनीतिक विरोध और विवादों के बावजूद ट्रंप ने कृष्णन पर अपना भरोसा बनाए रखा. कृष्णन ने भी अपनी काबिलियत के दम पर खुद को साबित किया और बहुत जल्द वह व्हाइट हाउस के भीतर सिलिकॉन वैली के सबसे मजबूत प्रतिनिधि बन गए.

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