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भारत की घातक अस्त्र मिसाइल का सौदा, EVM बनाने में मदद, पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे में बड़ी डील संभव

सूत्रों के मुताबिक,भारत जरूरी मिनरल सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने में निवेश कर सकता है.

भारत की घातक अस्त्र मिसाइल का सौदा, EVM बनाने में मदद, पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे में बड़ी डील संभव
भारत-इंडोनेशिया के बीच अहम डील साइन होने की उम्मीद.
  • पीएम मोदी आज इंडोनेशिया के जकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो संग द्विपक्षीय बैठक करेंगे
  • दोनों देशों के बीच EVM निर्माण सहयोग और अस्त्र मिसाइल सौदे समेत कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है
  • दोनों देश मिलकर सबांग पोर्ट का विकास करेंगे जो मलक्का जलडमरूमध्य के पास भारत के रणनीतिक हितों से जुड़ा है

प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया दौरे के पहले चरण में आज जकार्ता पहुंचे हैं. उनके और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय बैठक होनी है. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई एमओयू और द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिनमें इंडोनेशिया के लिए खास EVM बनाने में मदद करना और भारत की 'अस्त्र' मिसाइल सौदा अहम है.

भारत से ये घातक मिसाइल खरीदेगा इंडोनेशिया-सूत्र

PM मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कुछ बड़ी डील्स साइन होने की उम्मीद जताई जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, भारत इंडोनेशिया के लिए खास EVM बनाने में मदद कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो इसे भारत के चुनाव प्रबंधन मॉडल को बड़ी मान्यता के तौर पर देखा जाएगा. सूत्रों के हवाले से खबर ये भी है कि  'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल की कामयाबी के बाद, इंडोनेशिया ने भारत की घातक 'अस्त्र' मिसाइलें खरीदने का फैसला किया है.

भारत और इंडोनेशिया मिलकर करेंगे सबांग पोर्ट का विकास 

सूत्रों के मुताबिक,भारत जरूरी मिनरल सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने में निवेश करेगा. इंडोनेशिया अपने ब्रह्मोस मिसाइल भंडार को बढ़ा रहा है, भारत उसे और बैटरी सप्लाई करके मदद करेगा. भारत और इंडोनेशिया मिलकर सबांग पोर्ट का विकास करेंगे. यह पोर्ट मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के पास है और भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से 100 मील दूर है. दरअसल इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति भारत के हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण के लिए बेहद अहम है. दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील व्यापारिक रास्ते यानी 'मलक्का जलडमरूमध्य' पर स्थित होने की वजह से इंडोनेशिया भारत का एक जरूरी समुद्री साझेदार बन गया है.

दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंध

दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध अब सिर्फ संयुक्त सैन्य अभ्यासों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये रक्षा-औद्योगिक सहयोग में बदल चुके हैं. भारत इस बार पहली बार इंडोनेशिया के बहुराष्ट्रीय 'गरुड़ शील्ड' सैन्य अभ्यास में पर्यवेक्षक के बजाय अपने सैनिकों के साथ सीधे हिस्सा लेने जा रहा है, जो दोनों सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल को साफ तौर पर दिखाता है.

इंडोनेशिया का घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर जोर

इंडोनेशिया में भारत के राजदूत संदीप चक्रवर्ती ने NDTV से कहा कि भारत रक्षा उत्पादन में बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है. यह अनुभव इंडोनेशिया के लिए बहुत काम का है. इंडोनेशिया अपने देश में ही घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता बढ़ाना चाहता है, इस काम में भारत उसका सबसे भरोसेमंद पार्टनर बनने जा रहा है. यानी अब बात सिर्फ मिसाइल खरीदने-बेचने की नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, इंडस्ट्रियल पार्टनरशिप, ट्रेनिंग और इंडोनेशिया के भीतर मिलकर हथियार बनाने (जॉइंट प्रोडक्शन) तक पहुंच चुकी है.
 

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