पाकिस्तान में दो विदेशी महिलाओं के अपहरण और गैंगरेप के मामले में अब एक नया मोड़ आया है. जांच अधिकारियों को शक है कि इस खौफनाक वारदात के पीछे कोई साधारण फिरौती नहीं, बल्कि करोड़ों डॉलर का क्रिप्टोकरेंसी विवाद था. इस हाई-प्रोफाइल मामले के मुख्य आरोपियों में पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार का पोता रजा डार शामिल है.
पीड़ित महिलाओं में से एक एस्ट्रिड गैब्रिएला रॉबिन्सन ब्राचो ने अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराया है. बयान में उसने वारदात वाली रात की भयानक सच्चाई बयां की है.
'पैसा दो या मरने के लिए तैयार रहो'
एस्ट्रिड ने मजिस्ट्रेट को दिए अपने बयान में बताया कि जैसे ही वे और उनकी सहेली स्टीफनी एड्रियाना पाकिस्तान पहुंचीं, उसके कुछ ही समय बाद लाहौर के एक घर में हथियारबंद लोग जबरन घुस आए. हमलावरों ने आते ही दोनों महिलाओं को बंधक बना लिया.
पीड़िता के मुताबिक, आरोपी किसी आम लूटपाट के इरादे से नहीं आए थे. वे लगातार उस कंप्यूटर और डिजिटल वॉलेट को ढूंढ रहे थे जिसमें लाखों-करोड़ों की क्रिप्टोकरेंसी रखी हुई थी. एस्ट्रिड ने बताया, "उन्होंने हमसे पूछा कि पैसे वाला कंप्यूटर कहां है? मैंने डर के मारे बता दिया कि वह हरे रंग के बैग में है. इसके बाद रजा डार लगातार हमसे पैसों की मांग करने लगा और क्रिप्टो के पासवर्ड मांगने लगा."
बयान के अनुसार, जब महिलाओं ने आनाकानी की तो एक हमलावर ने एस्ट्रिड के सिर पर जोर से वार किया. वहीं दूसरे ने जान से मारने की धमकी देते हुए कहा, "अगर पैसे दे दिए तो जिंदा बचोगी, नहीं तो यहीं मार दिए जाओगे."

आरोपियों को अदालत में पेश किया गया.
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बंधक बनाकर किया गैंगरेप
क्रिप्टोकरेंसी की डकैती के बीच इन विदेशी महिलाओं को भयानक यौन उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ा. एस्ट्रिड ने रोते हुए अदालत को बताया कि उन्हें जबरन ऊपर के एक कमरे में ले जाया गया. वहां राइफल लिए एक शख्स बाहर पहरा दे रहा था, जबकि अंदर दो दरिंदों ने उनके साथ गैंगरेप किया.
एस्ट्रिड ने कहा, "जब मैं डर के मारे रोने लगी, तो वे हंस रहे थे. उन्होंने मुझे चुप रहने को कहा और मेरे चेहरे पर कई थप्पड़ मारे."
1 लाख डॉलर की मांगी फिरौती
रजा डार ने एस्ट्रिड के मोबाइल का इस्तेमाल कर उसके जानने वालों से संपर्क किया और मोटी रकम ऐंठने की कोशिश की. शुरुआत में तो कहीं से मदद नहीं मिली, लेकिन बाद में दूसरी पीड़िता स्टीफनी की मां ने जैसे-तैसे 1 लाख डॉलर का इंतजाम किया.
पैसे मिलते ही रजा डार ने दोनों से कहा कि अब वे जाने के लिए आजाद हैं. उसने उनके पासपोर्ट लौटाए और खुद गाड़ी चलाकर उन्हें एयरपोर्ट की तरफ ले जाने लगा. लेकिन इसी दौरान एस्ट्रिड ने गाड़ी में डार को फोन पर किसी से बात करते सुना. फोन पर दूसरी तरफ से कहा जा रहा था, "बॉस के निर्देश कुछ अलग हैं."
इस बातचीत से दोनों महिलाएं भांप गईं कि उनकी जान को अब भी खतरा है. इसी बीच गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया. इसका फायदा उठाकर दोनों महिलाएं गाड़ी से कूदीं, शोर मचाया और सड़क से गुजर रहे लोगों की मदद से ट्रैफिक पुलिस तक पहुंचकर अपनी जान बचाई.

रजा डार के खिलाफ अमेरिकी महिलाओं की ओर से शिकायत की कॉपी
अपराधियों ने कैसे बुना जाल?
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरी साजिश काफी समय पहले से रची जा रही थी. पीड़ित महिलाएं (जो नीदरलैंड और वेनेजुएला की नागरिक बताई जा रही हैं) अक्टूबर 2025 में सिंगापुर में एक क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान रजा डार से मिली थीं.
डार ने बिजनेस वीजा का झांसा देकर दोनों को पाकिस्तान आने का न्योता दिया. महिलाएं जैसे ही 29 जून को लाहौर पहुंचीं, उन्हें अगवा कर लिया गया और इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया.
चार आरोपी पुलिस रिमांड पर, पीड़ितों ने छोड़ा देश
अदालत ने पुलिस को जल्द से जल्द जांच पूरी कर 8 जुलाई को अगली रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है.
पाकिस्तान के ARY न्यूज के मुताबिक, मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराने के तुरंत बाद दोनों विदेशी महिलाएं पाकिस्तान छोड़कर जा चुकी हैं. स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से उनके ठिकाने को गुप्त रखा गया है. हालांकि, कानूनी जानकारों का मानना है कि अगर पीड़ित महिलाएं देश से बाहर चली गई हैं, तो आने वाले समय में पुलिस और अभियोजन पक्ष के लिए अदालत में इस केस को साबित करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है. फिलहाल दोनों के बयानों को सील कर सुरक्षित रख लिया गया है.
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