600 से ज़्यादा कैदी सुधार गृह से भागे, दो गुटों में झगड़े के बाद सेना और पुलिस तैनात

पुलिस ने घटना के बाद बताया कि जेल में 1000 कैदी थे. बाकी बचे कैदियों ने पुलिस और सेना को परिसर में घुसने से रोका लेकिन पुलिस ने हालत नियंत्रण में लिए. लगभग कंगाल हो चुके श्रीलंका में गहराते विदेश मुद्रा के संकट के कारण स्तिथि बिगड़ती ही जा रही है.

600 से ज़्यादा कैदी सुधार गृह से भागे, दो गुटों में झगड़े के बाद सेना और पुलिस तैनात

Sri Lanka 1948 के बाद अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

श्रीलंका (Sri Lanka) के एक कैदी सुधार केंद्र से करीब 600  से अधिक कैदी भाग निकले. बुधवार को कैदियों के दो गुटों में झगड़ा हो गया और उनके बाद केंद्रीय श्रीलंका के पोलोननार्वुआ (Polonnaruwa) पुर्नवास केंद्र से कैदा भाग निकले.  शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी ने श्रीलंका पुलिस के हवाले से यह जानकारी दी है.  पुलिस के प्रवक्ता निहान थालदुवा ने कहा, " सैनिक और अतिरिक्त बलों को कानदाकाडु पुर्नवास केंद्र में स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए तैनात किया गया है. भागे गए कैदियों को खोजने का अभियान शुरू किया गया है."

पुलिस ने घटना के बाद बताया कि जेल में 1000 कैदी थे. बाकी बचे कैदियों ने पुलिस और सेना को परिसर में घुसने से रोका लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में ले लिया.  पुलिस को घटनास्थल पर तैनात किया गया है और पुर्नवास केंद्र की घेराबंदी कर ली गई है.  इस बीच श्रीलंका में तेल की कमी बढ़ती ही जा रही है और देश 1948 के बाद अपने सबसे बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है.  इससे श्रीलंका में खाने, दवाईयों, खाना पकाने की गैस और ईंधन की देशभर में कमी हो गई है.  

लगभग कंगाल हो चुके देश में, गहराते विदेश मुद्रा के संकट के कारण श्रीलंका विदेशी कर्जा चुकाने में देश कामयाब नहीं हो पा रहा है. श्रीलंका ने अप्रेल में घोषणा की थी कि वह करीब 7 बिलियन का अपना विदेशी मुद्रा का कर्ज नहीं चुका पाएगा. श्रीलंका को 2026 तक कुल 25 बिलियन डॉलर का कर्जा चुकाना है.  

आर्थिक संकट के कारण श्रीलंका में खाद्य सुरक्षा, खेती, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं पर खास तौर से असर पड़ा है. पिछले फसल के मौसम में उत्पादन भी पिछले साल से 40-50 प्रतिशत कम रहा और मौजूदा कृषि मौसम भी बीज, उर्वरक, ईंधन और कर्ज की कमी के कारण खतरे में है.  

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श्रीलंका उन चुनिंदा देशों में से एक है जिसके बारे में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइज़ेशन (FAO) ने घोषणा की है कि जहां इस साल वैश्विक खाने की कमी के कारण भोजन खत्म हो सकता है.