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This Article is From Apr 30, 2026

भारत का कोहिनूर वापस करो, अब अमेरिका से उठी मांग

कोहिनूर सिर्फ एक हीरा नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक गर्व और औपनिवेशिक दर्द- दोनों का प्रतीक है. जोहरान ममदानी ने दिखा दिया है कि भले उनकी परवरिश अमेरिका में हुई हो लेकिन उन्होंने अपनी भारतीय जड़ों को काटा नहीं है.

भारत का कोहिनूर वापस करो, अब अमेरिका से उठी मांग
न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने बताया ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स से क्या कहेंगे

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने दिखा दिया है कि भले उनकी परवरिश अमेरिका में हुई हो लेकिन उन्होंने अपनी भारतीय जड़ों को काटा नहीं है, उनका दिल अभी भी हिंदुस्तानी ही है. ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय अभी अमेरिका की यात्रा पर हैं और ममदानी ने बुधवार को साफ संकेत दिया कि अगर उनकी किंग चार्ल्स से बात होगी, तो वह सिर्फ औपचारिक नहीं होगी. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब ममदानी से पूछा गया कि वह राजा से क्या कहेंगे, तो उन्होंने सामान्य शिष्टाचार छोड़कर ब्रिटेन को उसके काले अतीत की याद दिलाई- कोहिनूर हीरे की बात उठाई.

ममदानी ने बिना झिझक कहा, “अगर मैं राजा से बात करता… तो मैं शायद उनसे कोहिनूर हीरा वापस करने के लिए कहूंगा.”

गौरतलब यह है कि ममदानी की मां मीरा नायर भारत में पैदा हुई थीं और पढ़ाई के लिए अमेरिका गई थीं. बाद में वह युगांडा में मेयर के पिता महमूद ममदानी के साथ रहीं. आमतौर पर मेयर और ब्रिटिश राजघराने के बीच बातचीत सख्त नियमों और “नरम कूटनीति” के तहत होती है, लेकिन ममदानी के बयान ने इस चर्चा में इतिहास का मुद्दा जोड़ दिया है.

ममदानी के इस बयान के बाद ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय और उनकी पत्नी क्वीन कैमिला बुधवार को न्यूयॉर्क के वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर गए, जहां 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी मनाई जा रही है. इस कार्यक्रम में ममदानी भी शामिल हुए. 

भारत का कोहिनूर

कोहिनूर सिर्फ एक हीरा नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक गर्व और औपनिवेशिक दर्द- दोनों का प्रतीक है. भारत की कोल्लूर खान से निकला यह हीरा (कटाई से पहले) करीब 186 कैरेट का था और यह मुगलों और सिखों सहित कई भारतीय राजवंशों के पास रहा. 1849 में दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के बाद, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 10 साल के महाराजा दलीप सिंह से जबरन लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर कराए, जिसके तहत यह हीरा रानी विक्टोरिया को दे दिया गया.

आज यह 105.6 कैरेट का हीरा क्वीन एलिजाबेथ (क्वीन मदर) के ताज में जड़ा हुआ है और लंदन के टॉवर ऑफ लंदन में मजबूत कांच के पीछे सुरक्षित रखा गया है. भारत के लिए कोहिनूर “सबसे बड़ा वापस न किया गया खजाना” माना जाता है. ममदानी की बात भारत की बड़ी आबादी की भावना से मेल खाती है, जो इसे कानूनी तोहफा नहीं बल्कि लूटा हुआ खजाना मानती है.

कई भारतीयों के लिए लंदन में इस हीरे की मौजूदगी आज भी औपनिवेशिक दौर में हुए “धन के शोषण” की याद दिलाती है. ब्रिटेन की सरकार हमेशा कहती रही है कि यह हीरा कानूनी संधि के जरिए मिला था, जबकि भारतीय इतिहासकारों का कहना है कि एक बच्चे से दबाव में कराए गए समझौते की कोई नैतिक या कानूनी मान्यता नहीं होती. ममदानी की यह मांग अकेली नहीं है. ग्रीस (एल्गिन मार्बल्स) और अफ्रीका (बेनिन ब्रॉन्ज़) से भी आवाज उठ रही है कि पश्चिमी देशों के संग्रहालय और राजघराने उनकी ऐतिहासिक वस्तुएं वापस करें.

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