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अफ्रीका के जंगल में छिपा था पिंक मास्क वाला अनोखा बंदर, नई प्रजाति की खोज ने सबको चौंकाया

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में बंदर की इस नई प्रजाति की पहचान की गई है. इनके होंठ खास नारंगी रंग के हैं और ये बंदर जोरदार दहाड़ जैसी आवाज निकालते हैं.

अफ्रीका के जंगल में छिपा था पिंक मास्क वाला अनोखा बंदर, नई प्रजाति की खोज ने सबको चौंकाया
पिंक होंठों वाले बंदर की नई प्रजाति खोजी गई है (फोटो- Junior Amboko)

क्या 21वीं सदी में भी धरती पर ऐसे जानवर हो सकते हैं, जिन्हें इंसानों ने अब तक पहचाना ही नहीं? इस सवाल का जवाब है हां. अफ्रीका के घने जंगलों से ऐसी ही एक हैरान करने वाली खोज सामने आई है. वैज्ञानिकों ने बंदर की एक बिल्कुल नई प्रजाति खोजी है, जो काले रंग की है और उसके मुंह व नाक के आसपास नारंगी-हल्के रंग का ऐसा निशान है, जैसे उसने मास्क पहन रखा हो. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 75 सालों में अफ्रीका में बंदरों की यह सिर्फ पांचवीं नई प्रजाति है. 

अफ्रीका में मिली बंदर की नई प्रजाति

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में बंदर की इस नई प्रजाति की पहचान की गई है. इसके होंठ खास नारंगी रंग के हैं और ये बंदर जोरदार दहाड़ जैसी आवाज निकालते हैं. बुधवार, 15 जुलाई को PLOS ONE जर्नल में छपी एक स्टडी के मुताबिक बंदर की इस प्रजाति का साइंटिफिक नाम कोलोबस कांगोएन्सिस (Colobus congoensis) है, जिसे स्थानीय लोग लिक्वेली कहते हैं. यह अफ्रीका में पिछले 75 सालों में वैज्ञानिकों द्वारा पहचानी गई बंदरों की सिर्फ पांचवीं नई प्रजाति है.

बंदर की इस प्रजाति का साइंटिफिक नाम कोलोबस कांगोएन्सिस (Colobus congoensis) है (फोटो- Junior Amboko)

बंदर की इस प्रजाति का साइंटिफिक नाम कोलोबस कांगोएन्सिस (Colobus congoensis) है (फोटो- Junior Amboko)

फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी के PhD छात्र जूनियर एम्बोको ने इस खोज में अहम भूमिका निभाई. इस खोज में ऑडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी और विस्तार से जेनेटिक स्टडी शामिल थे.

CNN की रिपोर्ट के अनुसार फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी (FAU) और सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क ग्रेजुएट सेंटर के रिसर्चर्स ने बताया कि इस बंदर के शरीर पर चमकदार काले बाल, लंबे रोएं और एक लंबी पूंछ है. साथ ही इसके चेहरे पर नारंगी-क्रीम रंग के खास निशान हैं. ऐसा लगता है कि इन्होंने नारंगी-क्रीम रंग का कोई मास्क पहन रखा है. बंदर की इस प्रजाति में खोपड़ी, दांत और कंकाल से जुड़ी ऐसी खास विशेषताएं हैं जो इसे अफ्रीका में पाई जाने वाली अन्य सभी कोलोबस बंदर प्रजातियों से अलग करती हैं. यह अपने जैसे कोलोबस बंदरों से आकार में छोटा भी है और इसका वजन लगभग 15 पाउंड (6.8 किलोग्राम) है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार लुकुरु वाइल्डलाइफ रिसर्च फाउंडेशन के वैज्ञानिक जॉन हार्ट के अनुसार यह खोज इस बात को पुख्ता करती है कि सेंट्रल कांगो बेसिन में कितने जीव अभी भी ऐसे हैं जिसकी हमें जानकारी नहीं है. हालांकि वैज्ञानिकों ने बंदर की इस नई प्रजाति को लेकर एक चेतावनी दी भी दी है. कम इलाके में रहने और आबादी कम होने की वजह से यह बंदर पहले से ही लुत्प होने के खतरे में हो सकता है. उन्होंने सुझाव दिया है कि इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर' को इसे 'लुप्तप्राय' (endangered) की श्रेणी में रखना चाहिए.

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