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डील करो या तबाही झेलोः ईरान पर ट्रंप की धमकी और दबाव का खेल, 28 फरवरी से अब तक क्या क्या हुआ?

ट्रंप कभी नरम बनते हैं तो कभी कठोर. संभवतः यह नीति इसलिए भी अपनाई गई है कि एक तरफ बातचीत का रास्ता भी खुला रहे तो दूसरी ओर हमले की चेतावनी भी बरकरार रहे.

डील करो या तबाही झेलोः ईरान पर ट्रंप की धमकी और दबाव का खेल, 28 फरवरी से अब तक क्या क्या हुआ?
AFP
  • बीती रात प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने एक बार फिर ये नहीं बताया कि वो इस युद्ध से बाहर कैसे निकलेंगे.
  • पर वे कई मसलों पर बातें किए, जिससे स्पष्ट हुआ कि अमेरिका, ईरान पर दबाव बना रहा है कि वह बातचीत की मेज पर आए.
  • पिछले 5 हफ्ते से ट्रंप अपने बयानों को लेकर एक रणनीति अपनाई है. कभी धमकी तो कभी डील और दबाव का खेल खेलते हैं.

बीती रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस से वार्ता कर ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर कई बातें स्पष्ट कीं पर उन्होंने ये नहीं बताया कि इस लड़ाई से दोनों देश बाहर कैसे निकलेंगे. हालांकि इस दौरान उन्होंने कई मसलों पर बात की जिससे यह फिर स्पष्ट हुआ कि अमेरिका, ईरान पर दबाव बना रहा है क्योंकि वो चाहता है कि ईरान बातचीत की मेज पर आए और अमेरिकी शर्तें माने. इस दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा कि "ईरान के पास विकल्प हैं, उसे समझदारी से निर्णय लेना चाहिए क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप मजाक नहीं करते." इन बयानों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका अपने पुराने रुख से बिल्कुल नहीं हटा है. ट्रंप पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि या तो ईरान डील करे या फिर बड़े हमले के लिए तैयार रहे. यानी बातचीत और दबाव, दोनों साथ-साथ चल रहे हैं.

अब तक क्यों नहीं बनी बात

अब तक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ पाने के पीछे एक दूसरे की शर्तों को नहीं मानना रहा है. ट्रंप खुद भी कह चुके हैं कि "ईरान की तरफ से जो बड़ा प्रस्ताव आया था, वह नाकाफी है. हालांकि उस प्रस्ताव में क्या था, इस पर कुछ भी नहीं बताया गया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की मांगें काफी सख्त थीं और वह अमेरिकी प्रस्ताव को लेकर सतर्क है. बीती रात प्रेस से वार्ता में ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि डील हो सकती है. लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अगर बातचीत नहीं हुई तो ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े हमले भी हो सकते हैं. अमेरिका ईरान को दो रास्ते दे रहा है. बातचीत कर लो नहीं तो कार्रवाई झेलो. ट्रंप को उम्मीद है कि डील हो सकती है लेकिन हमले का विकल्प अभी भी खुला है.

क्यों अहम है यह रणनीति?

यह रणनीति इसलिए अहम है क्योंकि यह दिखाती है कि अमेरिका एक तरफ कूटनीति चला रहा है तो दूसरी तरफ सैन्य दबाव भी बनाए हुए है. यानी ईरान पर हर तरफ से दबाव बनाने की कोशिश हो रही है.
अभी की स्थिति में साफ है कि अमेरिका पूरी तरह युद्ध भी नहीं चाहता और बिना शर्त समझौता भी नहीं चाहता. यही कारण है कि ट्रंप कभी नरमी बरतते हैं तो कभी कठोर हो जाते हैं. संभवतः यह नीति इसलिए भी अपनाई गई है कि एक तरफ बातचीत का रास्ता भी खुला रहे तो दूसरी ओर हमले की चेतावनी भी बरकरार रहे.

28 फरवरी से अब तक क्या क्या हुआ?

28 फरवरी 2026 से लेकर 7 अप्रैल 2026 तक ट्रंप के बयान एक साफ पैटर्न दिखाते हैं. शुरुआत में आक्रामक सैन्य घोषणा, फिर मनोवैज्ञानिक दबाव, फिर तेज धमकियां, और आखिर में 'युद्ध जल्दी खत्म होने' और 'वापस आ सकते हैं' जैसी लाइनें बोलना.

28 फरवरी 2026: ईरान के साथ कॉम्बैट ऑपरेशंस की शुरुआत

ईरान के खिलाफ 28 फरवरी 2026 को युद्ध की शुरुआत हुई. ट्रंप ने पुष्टि की कि ईरान के खिलाफ मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस शुरू हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन 'बहुत बड़ा और लगातार चल रहा' है. ट्रंप ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि 'अपनी सरकार बदलो', तो इशारा साफ था कि लक्ष्य ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना है. यह सबसे शुरुआती बयान था, जिसमें सीधे शासन परिवर्तन जैसी बातें शामिल थीं.

20 मार्च 2026: पर्ल हार्बर वाला बयान

इस दिन जापान के प्रधानमंत्री के साथ बैठक में ट्रंप ने 1941 के पर्ल हार्बर हमले का जिक्र किया. उन्होंने कहा, “सरप्राइज अटैक क्या होता है, जापान से बेहतर कौन जानता है. आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया.” यह बयान दिखाता है कि अमेरिका ने ईरान पर हमले में पहले से चेतावनी न देने को सही ठहराया.

1 अप्रैल 2026: हमारे पास सारे पत्ते हैं

इस युद्ध के शुरू होने के 31 दिन बाद पहली अप्रैल को एक प्राइमटाइम संबोधन में ट्रंप ने कहा कि, “हम यह काम बहुत तेजी से खत्म कर देंगे. हमारे पास सारे पत्ते हैं.” लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि युद्ध कब खत्म होगा. यहां आत्मविश्वास दिखा, लेकिन स्पष्ट योजना नहीं.

2 अप्रैल 2026: ‘लगभग खत्म' लेकिन और हमले

अगले ही दिन ट्रंप ने फिर कहा कि 'ऑपरेशन पूरा होने के करीब' है. लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगले 2-3 हफ्तों में और जोरदार हमले होंगे. उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने सीजफायर मांगा है. हालांकि ईरान ने इस बात से साफ इनकार किया. यानी बयान में जीत का दावा और आगे हमले दोनों साथ.

5 अप्रैल 2026: हॉर्मुज पर ‘नर्क' की धमकी

तीन दिन बाद हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप का रुख और भी सख्त हो गया. वे बोले, "अगर ईरान ने हॉर्मुज में दखल दिया तो नर्क बरसेगा. साथ ही सहयोगी देशों से कहा कि वे शिपिंग रूट्स की जिम्मेदारी लें. उनका यह बयान सीधे ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा था.

6 अप्रैल 2026: एक रात में खत्म कर देंगे

लगातार दूसरे दिन ट्रंप मीडिया से मुखातिब हुए और अब तक का सबसे आक्रामक बयान दिया. वे बोले, "अमेरिका एक ही रात में पूरे ईरान को खत्म कर सकता है. वह रात कल भी हो सकती है."

7 अप्रैल 2026: जल्दी निकल जाएंगे, लेकिन वापस भी आ सकते हैं

ट्रंप ने कहा अमेरिका, ईरान से “कुछ हफ्तों में बाहर आ सकता है. लेकिन जरूरत पड़ी तो फिर हमला कर सकते हैं.” उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पहले ही रोक दिया गया है. यानी अब पूरा फोकस ईरान से निकलने और वहां कंट्रोल करने पर आ गया. ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि अमेरिका मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर नहीं है. यह घरेलू राजनीति से जुड़ा मैसेज था.

तो ट्रंप की रणनीति क्या है?

28 फरवरी का बयान साफ करता है कि अमेरिका ने तेज और बड़े हमले से शुरुआत की. दुश्मन को चौंकाने की कोशिश की. साथ ही मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का काम भी किया.  ईरान के लोगों से सरकार बदलने की अपील करना एक राजनीतिक दबाव है. यानी ट्रंप वहां की अगली सत्ता पर अपनी पूरी पकड़ चाहते हैं.

पर बयानों में विरोधाभास क्यों?

ट्रंप एक तरफ 'लगभग जीत गए' तो दूसरी तरफ 'और हमले करेंगे' जैसे बयान दे रहे हैं. सुनने वालों को ये विरोधाभासी वाले बयान जरूर लगेंगे लेकिन यह महज एक रणनीति भर है.  वो ईरान को भ्रम की स्थिति में रखना चाहते हैं. और अपनी मजबूत स्थिति बनाना चाहते हैं. लेकिन ट्रंप के बयानों और लगातार चल रहे ईरान पर आक्रमण ने इसे सैन्य मुद्दे से अधिक आर्थिक मुद्दा बना दिया है क्योंकि हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान ने अमेरिका और इजरायल से जुड़े देशों के लिए बंद कर दिया है.

एग्जिट स्ट्रेटेजी के संकेत

हालांकि यह लड़ाई कितनी लंबी और चलेगी इस पर ट्रंप ने स्पष्ट तो कुछ भी नहीं कहा लेकिन 7 अप्रैल को दिए गए उनके बयान पर गौर करें तो उन्होंने कहा था कि 'जल्दी निकल जाएंगे' और जरूरत पड़ी तो 'वापस आएंगे'. यह पूरी तरह से ट्रंप के मनोदशा को बताता है कि ट्रंप बेशक लंबी लड़ाई नहीं चाहते लेकिन वो ईरान पर कंट्रोल बनाए रखना चाहते हैं. ट्रंप ने कई बयान दिए हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है- क्या यह वाकई खत्म होने वाला है या यह सिर्फ एक नए दौर की शुरुआत है. आने वाले दिन तय करेंगे कि यह टकराव डील में बदलेगा या और गहराएगा. और इसके लिए आज की रात बहुत अहम है क्योंकि उनकी डेडलाइन जो खत्म होने वाली है.

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