- सऊदी अरब के वित्त मंत्री इस्लामाबाद में आर्थिक समर्थन देने के लिए पहुंचे थे, जो नए खाड़ी समीकरण को दर्शाता है
- सऊदी अरब और यूएई के बीच यमन, सूडान और विदेश नीति को लेकर गहरी प्रतिस्पर्धा और अविश्वास बढ़ रहा है
- पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पारस्परिक रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तानी लड़ाकू विमान सऊदी में तैनात किए हैं
मामले से परिचित एक सूत्र ने एएफपी को बताया कि सऊदी अरब के वित्त मंत्री शनिवार को "आर्थिक समर्थन" दिखाने के लिए इस्लामाबाद में थे. यह घटना पाकिस्तान के अपने सहयोगी से प्रतिद्वंद्वी बने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को अरबों डॉलर का कर्ज लौटाने की घोषणा के कुछ दिनों बाद हुई है. ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान खाड़ी (Gulf) में नये समीकरण गढ़ रहा है. वो अमेरिका और चीन को मैनेज करते हुए इलाके में संयुक्त अरब अमीरात को अलग-थलग करने की कोशिशों में लग गया है.
सऊदी अरब और यूएई में बढ़ रही दरार
सऊदी अरब और यूएई के बीच अब यमन, सूडान और क्षेत्रीय दबदबे को लेकर तीव्र प्रतिस्पर्धा और अविश्वास बढ़ रहा है. आर्थिक विविधीकरण, तेल उत्पादन कोटे और स्वतंत्र विदेश नीति के मुद्दों पर दोनों देशों के हित टकरा रहे हैं, जिससे उनके रिश्ते रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता में बदल गए हैं. अमेरिका-ईरान युद्ध में भी कूटनीतिक समाधान खोजने के प्रयासों पर सीधे तौर पर अबू धाबी ने कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन कुछ अमीराती विद्वानों और विश्लेषकों ने सोशल मीडिया पर मिस्र और पाकिस्तान की मध्यस्थता में भूमिका की कड़ी आलोचना की है. पिछले महीने, पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की ने मध्य पूर्व में युद्ध समाप्त करने के प्रयासों पर बातचीत की थी.
पाकिस्तानी जेट्स पहुंचे सऊदी अरब
सऊदी अरब के परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ सैन्य संबंध हैं, जिसके साथ उसने पिछले साल एक पारस्परिक रक्षा समझौता किया था. सऊदी राज्य मीडिया ने शनिवार को बताया कि रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तानी लड़ाकू विमान सऊदी अरब में उतरे थे. पाकिस्तान रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि पाकिस्तान से फाइटर जेट्स, किंग अब्दुलअजीज एयर बेस (पूर्वी सेक्टर) पर पहुंच गए हैं. यह तैनाती दोनों देशों के बीच हुए संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत की गई है. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता को समर्थन देने के लिए उठाया गया है.
दोनों के बीच गहरे हो रहे संबंध
यह तैनाती पिछले कुछ हफ्तों में बिगड़े पश्चिम एशिया हालात के बाद अहम मानी जा सकती है. सीजफायर से पहले खाड़ी देश पर ड्रोन हमले भी हुए थे. इस दौरान जरूरी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ और एक सऊदी नागरिक की मौत हो गई थी. रियाद और इस्लामाबाद ने सितंबर 2025 में एक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें दोनों पक्षों ने यह वादा किया कि वे किसी भी देश के खिलाफ किसी भी हमले को दोनों पर हमला मानेंगे. इससे दशकों पुरानी सिक्योरिटी पार्टनरशिप काफी गहरी हुई.
क्या तुर्की और पाकिस्तान अब इजरायल के पीछे
इन सबके बीच यूएई और इजरायल के बीच संबंध सितंबर 2020 में ऐतिहासिक अब्राहम समझौते के तहत औपचारिक रूप से सामान्य हुए हैं. यह एक बड़ी राजनयिक सफलता थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, पर्यटन, और तकनीकी (विशेषकर स्वास्थ्य और ऊर्जा) के क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ा है. ये समझौता अमेरिका और खासकर ट्रंप की पहल पर हुआ था. अब उसी यूएई को घेरने में सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की नजर आ रहे हैं. तुर्की की एक समाचार वेबसाइट के अनुसार कतर भी पाकिस्तान से संपर्क बढ़ा रहा है. वो और सऊदी 5 अरब डॉलर पाकिस्तान को यूएई का कर्ज भरने के लिए देने वाले हैं. ऐसे में लग रहा है कि खाड़ी में तुर्की और पाकिस्तान सऊदी अरब के जरिए नये खेल में लग गए हैं. इजरायल के ग्रेटर इजरायल में तुर्की और ईरान खास मायने रखते हैं. तो क्या तुर्की और इजरायल में युद्ध हुआ तो पाकिस्तान और सऊदी उसके साथ होंगे? अमेरिका और ईरान चुपचाप तमाशा देखेंगे? क्या पाकिस्तान मुस्लिम जगत का नया नेता बनने की तैयारी कर रहा है और इसीलिए ईरान युद्ध को खत्म करवाने में पूरा जोर लगाए हुए हैं? क्योंकि पाकिस्तान को भी अपनी सुरक्षा को लेकर भारत के बाद सबसे ज्यादा डर इजरायल से ही है.
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