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होर्मुज संकट का हल निकालने के लिए 35 देश आज करेंगे महामंथन, जानें ये क्यों और कितना जरूरी

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समिट वर्चुअली होगी. अध्यक्षता यूके के विदेश मंत्री करेंगे. इसमें 35 देश जुट रहे हैं. प्रमुख भागीदारों में यूके, फ्रांस के अलावा जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं.

होर्मुज संकट का हल निकालने के लिए 35 देश आज करेंगे महामंथन, जानें ये क्यों और कितना जरूरी
  • अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने से वैश्विक तेल-गैस सप्लाई प्रभावित हुई है
  • होर्मुज स्ट्रेट खोलने के उपायों पर 35 देश मिल बैठकर मंथन करेंगे जिसमें अमेरिका शामिल नहीं है
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समिट का प्रमुख एजेंडा फ्रीडम ऑफ नेविगेशन यानी समुद्र में आवाजाही की आजादी बहाल करना है
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अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला क्या किया, उसने दुनिया की दुखती रग दबा दी. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी कर दी. दुनिया में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई का ये प्रमुख समुद्री मार्ग ठप होने से तमाम देशों का दम फूल रहा है. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है. गंभीर होती स्थिति के बीच होर्मुज स्ट्रेट खोलने के उपायों पर गुरुवार को 35 देश मिल बैठकर मंथन करेंगे. गौर करने की बात ये है कि इसमें अमेरिका शामिल नहीं है. 

होर्मुज समिट में कौन-कौन से देश?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समिट वर्चुअली होगी. अध्यक्षता यूके के विदेश मंत्री करेंगे. इसमें 35 देश जुट रहे हैं. पूरी लिस्ट हालांकि रणनीतिक कारणों से जारी नहीं की गई है, लेकिन जिन प्रमुख भागीदारों के नाम सामने आए हैं, उनमें यूके, फ्रांस के अलावा जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया शामिल हैं. इनके अलावा यूएई, बहरीन और ओमान भी शामिल हो सकते हैं. अन्य सहयोगी देशों में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और नाइजीरिया जैसे देशों का नाम सामने आ रहा है. 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समिट का मुख्य एजेंडा

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समिट का प्रमुख एजेंडा फ्रीडम ऑफ नेविगेशन यानी समुद्र में आवाजाही की आजादी बहाल करना है. 
  • सबसे पहला फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय व्यापार फिर शुरू करने के सभी विकल्पों पर विचार का होगा. 
  • युद्ध की वजह से फंसे व्यापारिक जहाजों और उन पर मौजूद नाविकों की सुरक्षा और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना. 
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी तेल, गैस और अन्य वस्तुओं के आयात-निर्यात को फिर से पटरी पर लाना. 

समिट के बाद ब्रिटिश सैन्य योजनाकार अलग से बैठक करेंगे और देखेंगे देखना होगा कि जंग खत्म होने के बाद इस समुद्री रास्ते को हमेशा के लिए सुरक्षित करने के लिए सेनाएं अपनी क्षमताओं का किस तरह इस्तेमाल कर सकती हैं.

देखें- ट्रंप को ब्रिटेन की दो टूक! जंग में नहीं होगा शामिल, होर्मुज खोलने के लिए बुलाई अहम बैठक

होर्मुज ठप होने से दुनिया बेहाल 

दुनिया में कच्चे तेल की लगभग 20 पर्सेंट सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है. लिक्विड नेचुरल गैस (एलएनजी) आपूर्ति का 5वां हिस्सा भी यहीं से आता-जाता है. होर्मुज के बंद होने से वैश्विक बाजारों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. जानकार इसकी तुलना 1970 के तेल संकट से कर रहे हैं. खाद और सल्फर जैसे केमिकलों की सप्लाई लगभग ठप हो गई है. कतर से हीलियम जैसी गैसों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है

इन देशों पर सबसे ज्यादा संकट

बीबीसी का अनुमान है कि ईरान संकट की वजह से कई देशों में खाने-पीने की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ सकते हैं. इनमें जाम्बिया में 30 फीसदी, श्रीलंका में 15 फीसदी, ताइवान में 12.5 पर्सेंट और पाकिस्तान में 11 पर्सेंट बढ़ोतरी हो सकती है. भारत में भी 10 फीसदी तक दाम बढ़ने की आशंका जताई गई है. इसके अलावा ग्रीस, वेनेजुएला, तुर्की और अजरबैजान में भी 8-9 पर्सेंट का इजाफा हो सकता है. 

तेल-गैस की सप्लाई में कमी

ब्रेंट क्रूड ऑयल जो युद्ध से पहले 70 डॉलर प्रति डॉलर था, वो 119 डॉलर तक पहुंच गया. अब भी 100 डॉलर के आसपास बने हुए हैं. नेचुरल गैस के दाम 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के लेवल पर पहुंच रहे हैं. भारत अपनी जरूरत की 50-60% एलपीजी होर्मुज के रास्ते से मंगवाता है. सप्लाई कम होने से गैस की किल्लत हो गई है. कच्चे तेल की कमी का असर भी दिखने लगा है. विमानन ईंधन के दाम बढ़ चुके हैं. 

एशिया से अमेरिका तक असर

होर्मुज से होकर गुजरने वाला अधिकतर कच्चा तेल पूर्वी एशियाई देशों में जाता है. ऐसे में इसके बंद होने से जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में आती दिख रही है. अमेरिका भी इससे अछूता नहीं रहा है. वहां भी गैस के दाम 4 डॉलर तक बढ़ गए हैं. 

यूरोप में गैस का संकट

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू के बाद यूरोप अपनी गैस की जरूरतें पूरी करने के लिए कतर पर निर्भर है. होर्मुज बंद होने से कतर से आने वाली एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) की सप्लाई रुक गई है जिससे यूरोप में गैस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. 

कतर, कुवैत और इराक जैसे खाड़ी के देश तेल और गैस के प्रमुख निर्यातक हैं. होर्मुज बंद होने से वो अपने तेल और गैस को दुनिया तक पहुंचा नहीं पा रहे हैं, जिससे उन्हें अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है. 

देखें- ईरान के खिलाफ जंग में अब UAE भी कूदेगा? अमेरिका की मदद और होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के लिए बना रहा प्लान

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