- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया तेज हो गई है.
- मुजतबा खामेनेई, अयातुल्लाह खामेनेई के पुत्र, ईरानी सत्ता में सक्रिय हैं और IRGC के साथ उनके गहरे संबंध हैं
- आयतुल्लाह मोहम्मद मेहदी मीर बाघेरी और हसन खुमैनी जैसे अन्य सैय्यद नेता भी संभावित उम्मीदवार हैं
तेहरान में जारी संकट के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया तेज हो गई है.28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में खामेनेई की मौत के बाद देश में सरकार को संभालने वाला नेता की जरूरत है.ईरान की विशेषज्ञ सभा (असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स) इस महत्वपूर्ण फैसले के लिए विचार-विमर्श कर रही है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.भारत में ईरान के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने हाल ही में स्पष्ट किया कि सर्वोच्च नेता का चयन अभी पूरा नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि कई उम्मीदवारों पर विचार किया जा रहा है, जिसमें अयातुल्लाह मुजतबा खामेनेई भी शामिल हैं.उनका नाम इसलिए प्रमुख है क्योंकि उनकी योग्यता और धार्मिक-राजनीतिक अनुभव मजबूत है, लेकिन यह फैसला आखिरी नहीं है.सुप्रीम लीडर की प्रक्रिया जारी है और योग्य व्यक्ति का चयन किया जाएगा.हालांकि वेस्टर्न मीडिया यही बता रही थी कि यही अब सुप्रीम लीडर होंगे, जिसे हकीम इलाही ने गलत ठहराया है.
किसे चुनेंगे सुप्रीम लीडर, क्या कोई अलग महत्व है?
सुप्रीम लीडर 99 प्रतिशत सैय्यद परिवार से होगा,आपको बता दें कि ईरान में सैय्यद लोगों की सबसे ज्यादा इज्जत होती है, वहीं अयातुल्लाह खुमैनी या आयतुल्लाह खामेनेई दोनों की ही बात करें तो दोनों ही सैय्यद परिवार से थे.आपको बता दें कि हजरत मोहम्मद साहब की नस्ल से जो होता है वो सैय्यद कहलाया जाता है.वहीं सिर्फ उनकी बेटी की औलादों में से जिन्हें शिया अपना आठवां इमाम मानते हैं वो इमाम अली रज़ा है जिनका श्राइन ईरान के मशहद शहर में हैं, और ईरानी इमाम रज़ा को ईरान में पाकर बहुत फख्र करते हैं.इसलिए सैय्यद की ईरान में बहुत इज्जत है, तो ये कयास लगाए जा रहे हैं कि सैय्यद ही को सुप्रीम लीडर बनाया जाएगा, आपको बता दें सैय्यद के सर पर काला अमामा होता है जैसे आयतुल्लाह खुमैनी, खामेनेई या पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी थे और गैर सैय्यद के सफेद अमामा होता है.
कौन कौन है सैय्यद परिवार से रेस में
मुजतबा खामेनेई: सैय्यद भी और अयातुल्लाह खामेनेई के बेटे भी
मुजतबा होसैनी खामेनेई जिनकी उम्र लगभग 56 वर्ष है.ये अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं.उनका जन्म 1969 में मशहद में हुआ था.वे एक मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं और लंबे समय से ईरानी सत्ता के पीछे की शक्तियों में सक्रिय माने जाते हैं.विशेष रूप से इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ उनके गहरे संबंध हैं, जो ईरान की सैन्य और राजनीतिक शक्ति का मुख्य स्तंभ है. साथ ही लोग इमोशनल होकर इन्हें भी चुनना चाहते हैं, क्योंकि इन्हें देखकर लोग आयतुल्लाह ख़ामेनई को याद करेंगे, हालांकि अभी उस एतबार से ये चुनिंदा नहीं है सिर्फ IRGC के दबाव में इनका नाम आगे आ सकता है.वहीं, अगर ये सुप्रीम लीडर बने तो सबसे पहला जो आरोप लगेगा वो वंशवाद का लगेगा क्योंकि आयतुल्लाह खुमैनी के बाद भी उनके परिवार या बेटे में से किसी को नहीं बनाया गया था, दूसरे ही सुप्रीम लीडर यानी आयतुल्लाह खामेनेई चुने गए. दूसरा वेस्टर्न मीडिया ने काफी इनके खिलाफ प्रोपगंडा चलाया हुआ था जिसमें कभी इनके स्वास्थ्य के ऊपर झूठी खबरें उड़ाई तो कभी उनकी करोड़ो की प्रॉपर्टी विदेश में होने की बात बताई.तो इस हिसाब से ये सब चुनौती उनके नाम के सामने आएंगे.
आयतुल्लाह मोहम्मद मेहदी मीर बाघेरी -दूसरे सैय्यद नेता जो रेस में हैं
सबसे ऊपर जो इस वक्त नाम चल रहा है वो आयतुल्लाह सैय्यद मोहम्मद मेहदी मीर बाघेरी का चल रहा है.एक वो खुद मेंबर है मेंबर ऑफ काउंसिल के, दूसरे वो अयातुल्लाह ख़ामेनई के करीबी भी थे. वहीं एक सैय्यद परिवार का होने की वजह से भी उनका नाम आगे चल रहा है, वो कुम शहर में 1961 में जन्म लिए थे और कुम एकेडमी ऑफ इस्लामिक साइंस के हेड भी रह चुके हैं, उनकी साइंस और धर्म पर अच्छी पकड़ है.वहीं आपको बता दें वो एक सख्त नेता के रूप में माने जाते हैं, अगर वो सुप्रीम लीडर बन गए तो इजरायल अमेरिका के लिए और भी मुश्किल आएगी क्योंकि वो फौरन सख्त फैसले ही लेंगे जो कि दुश्मनों के लिए खतरनाक ही होगा.
हसन खुमैनी: क्रांति के संस्थापक अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के पोते हैं हसन खुमैनी जो खुद सैय्यद भी हैं, हालांकि वे सुधारवादी विचारधारा के करीब माने जाते हैं, लेकिन कट्टरपंथी गुट उन्हें पसंद नहीं करते, उनके विचार भी अलग ही रहते हैं, वहीं देखा जाए क्योंकि वो आयतुल्लाह खुमैनी के परिवार से हैं तो ही उनका नाम हो सकता है हालांकि इनका रेस में नाम कम है.
गैर सैय्यद अगर बने तो ये हैं नाम जो है रेस में
गोलाम-होसैन मोहसिनी-एजे'ई: ईरान के चीफ जस्टिस हैं और गार्जियन काउंसिल के सदस्य हैं..वे सुप्रीम लीडर के उत्तराधिकारी के लिए एक संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं.मोहसिनी-एजे'ई ने 2021 से ईरान के चीफ जस्टिस के रूप में कार्य किया है और 2026 में अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उन्हें अंतरिम नेतृत्व परिषद में नियुक्त किया गया था. मोहसिनी-एजे'ई का जन्म 1956 में ईरान के ईझियेह, इस्फहान प्रांत में हुआ था..उन्होंने हघानी सेमिनरी से शिक्षा प्राप्त की और 2005 से 2009 तक ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री के रूप में कार्य किया.. वे 2009 से 2014 तक ईरान के प्रॉसीक्यूटर-जनरल भी रहे.
अयातुल्लाह अली रेजा अराफी
अयातुल्लाह अली रेजा अराफी एक वरिष्ठ शिया मौलवी और ईरान की मदरसा व्यवस्था के प्रमुख हैं.वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष और गार्जियन काउंसिल के पूर्व सदस्य हैं..अराफी को सुप्रीम लीडर के उत्तराधिकारी के लिए एक संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है .अराफी का जन्म 1956 में ईरान के मशहद में हुआ था.उन्होंने मशहद के फर्दौसी यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की और बाद में हव्ज़े इल्मियह में पढ़ाई की.. वे 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध में शामिल थे और बाद में ईरान की न्याय प्रणाली में विभिन्न पदों पर कार्य किया.अराफी को एक रूढ़िवादी मौलवी माना जाता है और वे ईरान की इस्लामी व्यवस्था के समर्थक हैं.वे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी माने जाते हैं और उनके उत्तराधिकारी के लिए एक संभावित उम्मीदवार हैं.
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