- इजरायल ने सीरिया के इदलिब प्रांत में अबू अल-दुहुर मिलिट्री एयरपोर्ट पर हवाई हमला किया
- इस हमले को सीरिया, तुर्की और अमेरिका ने तुरंत निंदा की और इसे क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला बताया गया
- इजरायल ने तुर्की की सैन्य मौजूदगी को लेकर चेतावनी दी थी और इसे सुरक्षा समझौते का उल्लंघन बताया
इजरायल और तुर्की के बीच तनाव चरम पर है. अभी ज्यादा दिन नहीं जब शीर्ष स्तर पर दोनों देशों के नेताओं ने एक-दूसरे को धमकी दी. मंगलवार को सीरिया के इदलिब प्रांत में अबू अल-दुहुर मिलिट्री एयरपोर्ट पर इजरायल का हवाई हमला इसमें एक नई कड़ी है. ये हमला सिर्फ सीरियाई मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला नहीं था. जानकारों का मानना है कि यह सीरिया की राजधानी दमिश्क में असद के बाद की लीडरशिप और उसके तुर्की सहयोगियों के लिए एक सोच-समझकर दिया गया संदेश था.
क्या है संदेश
इस हमले में रनवे को तो नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ. इस हमले की दमिश्क, अंकारा और वॉशिंगटन ने तुरंत निंदा की. सीरिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत टॉम बैराक ने इसे एक अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कदम" बताया, जिससे "क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा नहीं मिलता. वहीं, सीरियाई विदेश मंत्रालय ने इसे सैन्य आक्रामकता की अनुचित कार्रवाई बताया. बाद में इजरायल ने हमले की पुष्टि की. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की बार-बार चेतावनियों के बावजूद, अलेप्पो के पास एक एयरबेस पर तुर्की सैनिकों को तैनात करने की इजाजत देकर सीरिया सुरक्षा को लेकर बनी सहमति का उल्लंघन करने की कगार पर था.
तुर्की क्या बोला
तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि तुर्की सीरिया की अपनी सैन्य क्षमता और बुनियादी ढांचा विकसित करने की कोशिशों का समर्थन करना जारी रखेगा. तुर्की ने गुरुवार को इस बात से इनकार किया कि उत्तरी सीरिया के उस एयर बेस पर उसकी कोई सैन्य मौजूदगी थी, जिस पर इस हफ्ते की शुरुआत में इजरायल ने हमला किया था.
मोसाद चीफ को लेकर खुलासा
इस हमले से पहले खबर है कि इजरायल की जासूसी एजेंसी के प्रमुख ने पिछले हफ्ते सीरिया के विदेश मंत्री से फ़ोन पर बात की थी. इस बातचीत में उन्होंने सीरिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी पर चर्चा की. मोसाद जासूसी एजेंसी के प्रमुख रोमन गोफमैन और सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी के बीच 14 अगस्त को हुई यह बातचीत, इजरायल और राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व वाले दमिश्क प्रशासन के बीच अब तक के सबसे उच्च-स्तरीय संपर्कों में से एक है.
इजरायल का मकसद साफ
कुल मिलाकर देखें तो सीरिया में मजबूत सेना इजरायल नहीं चाहता. इसके लिए उसने वहां असद सरकार बनते ही बमबारी भी पहले की थी. साथ में सीरिया और इजरायल के बीच में बफर जोन भी बना रखा है. ऐसे में अभी हमले का मकसद सिर्फ और सिर्फ ये है कि वो तुर्की को अपने क्षेत्र में किसी भी हाल में घुसने नहीं देना चाहता. इसके लिए उसे अमेरिका की भी परवाह नहीं है. अगर तुर्की ने सीरिया में ऐसी कोई भी कोशिश की तो ये मसला तुर्की की अपनी जमीन तक पहुंच सकता है. मतलब इजरायल और तुर्की में सीधा विवाद.
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