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ईरान युद्ध से इस छोटे देश का रेवन्यू क्यों बढ़ रहा है, बेतहाशा कमाई के पीछे क्या है फॉर्मूला?

विश्व बैंक और द इकोनॉमिस्ट के आंकड़े के मुताबिक, गुयाना का तेल राजस्व जो पहले 370 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह था, वह अब बढ़कर 623 मिलियन डॉलर हो गया है.

ईरान युद्ध से इस छोटे देश का रेवन्यू क्यों बढ़ रहा है, बेतहाशा कमाई के पीछे क्या है फॉर्मूला?

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है. एक तरफ जहां दुनिया भर के देश महंगाई, तेल की कमी और टूटती सप्लाई चेन से जूझ रहे हैं, वहीं दक्षिण अमेरिका का एक छोटा सा देश गुयाना इस तबाही के बीच अप्रत्याशित रूप से मालामाल हो रहा है. महज छह साल पहले तेल उत्पादक बनने वाला यह देश आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुका है. ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में आए उछाल ने गुयाना की तिजोरी को ऐसे समय में भर दिया है, जब बड़े-बड़े विकसित देश मंदी के डर से कांप रहे हैं.

तेल की कीमतों में उछाल 

गुयाना की इस 'लॉटरी' लगने के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का आसमान छूना है. युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 62 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, लेकिन ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में आए संकट के बाद यह औसत 108 डॉलर के पार पहुंच गया है.

गुयाना के लिए यह सोने पर सुहागा जैसा है, क्योंकि उसने ठीक इसी समय अपनी तेल उत्पादन क्षमता में भी भारी इजाफा किया है. 2025 के अंत तक जहां उत्पादन 8.92 लाख बैरल प्रतिदिन था, वहीं अब यह 9.20 लाख बैरल को पार कर चुका है और जल्द ही इसके 10 लाख बैरल पहुंचने की उम्मीद है.

आंकड़ों क्या गवाही दे रहे हैं? 

विश्व बैंक और द इकोनॉमिस्ट के आंकड़े गुयाना की इस छलांग की पुष्टि करते हैं. युद्ध शुरू होने के बाद से गुयाना का तेल राजस्व जो पहले 370 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह था, वह अब बढ़कर 623 मिलियन डॉलर हो गया है.

2020 से यह देश औसतन 40.9% की वार्षिक दर से विकास कर रहा है, जो दुनिया में किसी भी देश के लिए एक सपना जैसा है. जानकारों का मानना है कि ऊंची कीमतों की बदौलत गुयाना सरकार को इस साल अपनी शुरुआती अनुमानों से 4 अरब डॉलर ज्यादा की कमाई हो सकती है.

आखिर कमाई का फॉर्मूला क्या है?

गुयाना की तेल नीति भी इस मुनाफे में अहम भूमिका निभा रही है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल गुयाना के तेल उत्पादन का 75% हिस्सा विदेशी कंपनियां अपनी लागत वसूलने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं.

बाकी बचे मुनाफे में से गुयाना को 14.5% (रॉयल्टी मिलाकर) हिस्सा मिलता है. हालांकि यह हिस्सा कम लग सकता है, लेकिन युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में बढ़ने का एक बड़ा फायदा यह हुआ है कि कंपनियां अपनी लागत बहुत जल्दी वसूल कर लेंगी. जैसे ही लागत वसूली पूरी होगी, गुयाना का मुनाफा सीधा 50% तक बढ़ जाएगा. यानी मौजूदा युद्ध गुयाना के लिए भविष्य के बड़े मुनाफे का रास्ता साफ कर रहा है.

इतने पैसे का क्या कर रही गुयाना सरकार?

इस अथाह पैसे का इस्तेमाल गुयाना सरकार बुनियादी ढांचे को सुधारने में कर रही है. देश के कोने-कोने में नई सड़कें, स्कूल और आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए जा रहे हैं.

हाल ही में सरकार ने देश के हर वयस्क नागरिक (18 साल से ऊपर) को करीब 500 अमेरिकी डॉलर का नकद बोनस देने का भी ऐलान किया है. लंबे समय से गरीबी की मार झेल रहे इस देश के पास अब अपनी तस्वीर बदलने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं.

सरकार ने एक 'नेचुरल रिसोर्स फंड' भी बनाया है, जिसमें मार्च तक 3.8 अरब डॉलर जमा हो चुके थे, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए पैसा सुरक्षित रहे.

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