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This Article is From Jan 05, 2026

गिलगित-बाल्टिस्तान में विद्रोह: चुनाव में धांधली की आशंका, कार्यवाहक कैबिनेट के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवा

गिलगित-बाल्टिस्तान में चिनारबाग में प्रदर्शनकारियों ने रिवर रोड ब्लॉक कर मुख्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया. पुलिस ने आठ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिससे इलाके में तनाव बढ़ा है.

गिलगित-बाल्टिस्तान में विद्रोह: चुनाव में धांधली की आशंका, कार्यवाहक कैबिनेट के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवा

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में राजनीतिक अस्थिरता और जन-आक्रोश चरम पर है. हाल ही में गठित कार्यवाहक सरकार की संरचना को लेकर युवाओं, विपक्षी दलों और नागरिक समाज ने 'जीबी यूथ मूवमेंट' (GB Youth Movement) के नेतृत्व में मोर्चा खोल दिया है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस तथाकथित कैबिनेट में पाकिस्तान समर्थक विवादित और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है, जो निष्पक्ष चुनाव की संभावनाओं को खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश है.

चिनारबाग में धरना और गिरफ्तारियां रविवार को प्रदर्शनकारियों ने चिनारबाग इलाके में रिवर रोड को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया और मुख्य सचिव सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. आंदोलनकारियों का कहना है कि घांचे, नगर और शिगर जैसे महत्वपूर्ण जिलों को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है. प्रदर्शन के हिंसक होने की खबरों के बीच, पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए 'जीबी यूथ मूवमेंट' के चेयरमैन समेत आठ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है. इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में तनाव और अधिक बढ़ गया है.

चुनाव में धांधली की आशंका 

स्थानीय मीडिया और प्रदर्शनकारियों के अनुसार, कार्यवाहक कैबिनेट में न्यूट्रल लोगों और शिक्षित युवाओं के बजाय 'कठपुतली' नेताओं को जगह दी गई है. उनका दावा है कि यह आने वाले आम चुनावों में धांधली करने की कोशिश है. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक विवादित नियुक्तियों का फैसला रद्द नहीं किया जाता, उनका धरना जारी रहेगा.

संवैधानिक अस्तित्व पर सवाल 

यह विवाद केवल नियुक्तियों तक सीमित नहीं है. 'इंस्टीट्यूट फॉर गिलगित बाल्टिस्तान स्टडीज' के संस्थापक सेंगे सेरिंग और इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज की रिपोर्टों ने क्षेत्र के संवैधानिक दर्जे पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. स्थानीय राष्ट्रवादी समूहों का तर्क है कि गिलगित-बाल्टिस्तान कानूनी तौर पर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है, इसलिए वहां के उम्मीदवारों को पाकिस्तान के प्रति वफादारी की शपथ लेने के लिए मजबूर करना गैर-संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है.

बदलती रणनीति: राष्ट्रवादियों का चुनाव में उतरने का फैसला 

दिलचस्प बात यह है कि जहां पहले राष्ट्रवादी समूह चुनाव का बहिष्कार करते थे, वहीं इस बार उन्होंने सभी निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. उनका मानना है कि बहिष्कार करने से राजनीतिक शून्य पैदा होता है, जिसका फायदा उठाकर पाकिस्तानी सेना समर्थित दल स्थानीय संसाधनों और पहचान पर कब्जा कर लेते हैं. स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव की भी याद दिलाई है, जिसमें विवाद सुलझाने के लिए पाकिस्तान को इस क्षेत्र से अपने नागरिकों को हटाना अनिवार्य बताया गया था. फिलहाल, गिलगित की सड़कों पर गूंजते नारे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं.

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