- गाजा युद्ध में हजारों बच्चों की जान गई है और कई बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से गंभीर आघात झेल रहे हैं.
- नुसेरात शरणार्थी शिविर में बच्चे ब्रेकडांस के जरिए युद्ध के डर और तनाव से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं.
- मलबे के बीच ब्रेकडांस करने वाले बच्चे कुछ समय के लिए युद्ध की भयावह यादों से दूर हो पाते हैं.
गाजा युद्ध ने हजारों बच्चों की जिंदगी पर गहरा असर डाला है. इस संघर्ष में बड़ी संख्या में बच्चों की जान गई है, जबकि कई बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से गंभीर आघात से गुजर रहे हैं. ऐसे हालात में गाजा के एक शरणार्थी शिविर में ब्रेकडांस बच्चों के लिए उम्मीद और राहत का जरिया बनकर उभरा है. ब्रेकडांस के जरिए बच्चों के भीतर युद्ध के कारण मौजूद डर, तनाव और नकारात्मक विचारों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है.
मध्य गाजा स्थित नुसेरात शरणार्थी शिविर में अलग‑अलग उम्र के लड़के और लड़कियां हर हफ्ते मलबे के बीच एकत्रित होते हैं. यह बच्चे यहां पर ब्रेकडांस का अभ्यास करते हैं. गाजा में बमबारी और तबाही से घिरे माहौल के बीच ब्रेकडांस उनके लिए कुछ पल की राहत, खुशी और आत्मविश्वास लेकर आता है.

युद्ध की भयावह यादों से दूरी बनाने की कोशिश
मलबों के बीच संगीत की धुन पर थिरकते ये बच्चे कुछ देर के लिए ही सही, लेकिन युद्ध की भयावह यादों से दूर चले जाते हैं. ब्रेकडांस न सिर्फ एक कला के रूप में सामने आ रहा है, बल्कि यह बच्चों को भावनात्मक रूप से भी संबल प्रदान कर रहा है. यही कारण है कि लोग इस पहल को जमकर सराह रहे हैं.
युद्ध की शुरुआत के बाद 72 हजार से ज्यादा की मौत
गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से 72,500 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें से अधिकांश नागरिक थे. साथ ही इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.
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