- अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है, लेकिन उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं
- NDTV को मिले वीडियो में कराची एयरपोर्ट पर ईरानी सैन्य विमान और ईंधन टैंकर खड़े दिखे
- ईरानी RC-130H विमान अप्रैल से मई तक पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर एक महीने तक खड़ा रहा था
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता जारी है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है. मध्यस्थता कराने वाले पाकिस्तान को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. NDTV को मिले एक ऑनलाइन वीडियो से पता चलता है कि जब भी तेहरान किसी संघर्ष में होता है, तो पाकिस्तान ईरानी सैन्य विमानों को पनाह देता रहा है. ऐसा सिर्फ मिडिल ईस्ट में चल रहे मौजूदा युद्ध के दौरान ही नहीं हुआ है, बल्कि पाकिस्तान पहले भी ऐसा कर चुका है. यह पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है.
कराची एयरपोर्ट पर ईरानी विमान की कहानी
NDTV को मिले और जुलाई 2025 के इस YouTube वीडियो में कराची हवाई अड्डे के रनवे पर ईरानी ट्रांसपोर्ट और हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर खड़े दिखाई दिए. यह वीडियो इजरायल के 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' खत्म होने के कुछ हफ्तों बाद का है, जिसमें इजरायल ने ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया था.
इस वीडियो के स्क्रीनशॉट CBS News की उस रिपोर्ट के एक दिन बाद सामने आए हैं, जिसमें बताया गया था कि पाकिस्तान इस समय ईरानी विमानों को पनाह दे रहा है. यह बात इस्लामाबाद में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुई शांति वार्ता में मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
NDTV की एक रिपोर्ट CBS की रिपोर्ट का समर्थन करती है और इसमें 25 अप्रैल को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर खड़े ईरानी वायु सेना के RC-130H Khofash विमान की एक हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीर दिखाई गई है. RC-130H, C-130 'हरक्यूलिस' का एक स्पेशल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वैरिएंट है, जिसे ईरान दशकों से इस्तेमाल कर रहा है.
एक महीने तक नूर खान एयरबेस पर खड़ा रहा ईरानी विमान
Intel Lab के शोधकर्ता डेमियन साइमन द्वारा किए गए एनालिसिस से पता चलता है कि यह विमान 11 और 12 अप्रैल 2026 के बीच नूर खान एयरबेस पर पहुंचा था और कम से कम 12 मई 2026 तक, यानी पहुंचने के लगभग एक महीने बाद तक वहीं खड़ा रहा.
सीनेट हाउस एप्रोप्रिएशन्स कमेटी की सुनवाई को संबोधित करते हुए, अमेरिकी सीनेटर ग्राहम ने अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन से कहा कि उन्हें पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है.

उन्होंने कहा कि अगर ईरानी सैन्य संपत्तियों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी ठिकानों पर ईरानी विमानों को खड़ा कर रखा है, तो इसका मतलब है कि हमें मध्यस्थता के लिए शायद किसी और को ढूंढ़ना चाहिए. इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि यह मामला (अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत) कहीं आगे नहीं बढ़ रहा है.
खास बात यह है कि YouTube पर अपलोड किए गए जुलाई 2025 के उस पुराने वीडियो से पता चलता है कि पिछले साल इजरायल के साथ तनाव बढ़ने के समय, ईरान ने अपना एकमात्र बचा हुआ KC-747 हवाई टैंकर कराची एयरपोर्ट पर खड़ा कर दिया था. माना जा रहा है कि यह विमान मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के दौरान एक इजराइली हवाई हमले में तबाह हो गया. यह हमला तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे पर हुई.
जुलाई 2025 के वीडियो में ईरानी वायु सेना का एक KC-707 हवाई ईंधन भरने वाला टैंकर भी दिखाई देता है, जो नागरिक बोइंग 707 का ही एक रूप है.

अमेरिका में बने ये पुराने जेट विमान दशकों से ईरानी वायु सेना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि प्रतिबंधों के कारण इन्हें आधुनिक विमानों से बदला नहीं जा सका. इस साल की शुरुआत में, इजराइली और अमेरिकी हवाई हमलों में इस प्रकार के कम से कम दो विमान नष्ट हो चुके हैं.
एक बयान में, पाकिस्तान सरकार ने इस विमान की मौजूदगी से इनकार न करते हुए कहा है कि वह नूर खान हवाई अड्डे पर ईरानी विमान की मौजूदगी के संबंध में CBS News की रिपोर्ट को गुमराह करने वाली और सनसनीखेज बताते हुए सिरे से खारिज करती है. उनका कहना है कि इस तरह की अटकलबाजी वाली बातें क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए चल रहे प्रयासों को कमजोर करने के लिए की जा रही हैं.
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