- अमेरिकी सरकार ने जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़ी तीन मिलियन से ज्यादा फाइलें सार्वजनिक कीं
- सर्वाइवर्स ने आरोप लगाया कि उनके अब्यूज़र्स अभी भी छिपे हुए हैं
- डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा कि व्हाइट हाउस ने फाइलों की समीक्षा में कोई हस्तक्षेप नहीं की है
जेफ़्री एपस्टीन केस एक बार फिर विवादों में है, क्योंकि सर्वाइवर्स ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शुक्रवार को जब अमेरिकी सरकार ने इस केस से जुड़ी लाखों नई फाइलें सार्वजनिक कीं, तो सर्वाइवर्स ने दावा किया कि उनके कथित अब्यूज़र्स “अब भी छिपे और सुरक्षित” हैं. यह केस लंबे समय से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी घेरे हुए है, क्योंकि उनके नाम का कई बार इन दस्तावेज़ों में उल्लेख आता रहा है. डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने जोर देकर कहा कि व्हाइट हाउस का इन फाइलों की समीक्षा में कोई हस्तक्षेप नहीं था. उनके मुताबिक, “व्हाइट हाउस ने ना तो जांच को प्रभावित किया, ना बताया कि क्या रहना चाहिए और क्या हटाना है.” उन्होंने बताया कि इन तीन मिलियन से ज्यादा दस्तावेज़ों में ट्रम्प, एलन मस्क, बिल गेट्स और ब्रिटेन के पूर्व प्रिंस एंड्रयू जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं.उनका कहना है कि इनके कुछ दस्तावेज़ों में ट्रम्प पर “गलत और सनसनीखेज दावे” भी थे, जिन्हें 2020 के चुनाव से ठीक पहले एफबीआई को भेजा गया था.
वहीं, ट्रम्प के पूर्व पर्सनल वकील रह चुके ब्लांश ने इस आरोप को खारिज किया कि सरकार ने ट्रम्प को बचाने के लिए दस्तावेज़ों में से किसी भी शर्मनाक सामग्री को हटाया है. उन्होंने कहा कि “हमने राष्ट्रपति ट्रम्प को बचाने की कोशिश नहीं की,” और बताया कि इसमें कम से कम 1,80,000 तस्वीरें और करीब 2,000 वीडियो थे.ब्लांश ने बताया कि ज्यादातर महिलाओं और लड़कियों की तस्वीरें हटा दी गई हैं, सिवाय गिसलेन मैक्सवेल की तस्वीरों के जो नाबालिग लड़कियों की ट्रैफिकिंग मामले में दोषी हैं और 20 साल की जेल में हैं.
सर्वाइवर्स क्यों हैं नाराज?
हालांकि, एपस्टीन सर्वाइवर्स इससे नाराज़ हैं. उनका कहना है कि कई दस्तावेज़ों में उनकी पहचान से जुड़ी डीटेल्स अब भी मौजूद हैं, "जबकि जिन पुरुषों ने हमें अब्यूज़ किया, वे अब भी छिपे और सुरक्षित हैं.” यह बयान कुल 19 लोगों ने साइन किया, जिनमें से कई ने अपनी सुरक्षा के लिए सिर्फ आद्याक्षर का इस्तेमाल किया. सर्वाइवर्स ने मांग की है कि एपस्टीन फाइल्स पूरी तरह और बिना सेंसरिंग के जारी की जाएं और अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी को अगले महीने कांग्रेस में इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए.
टॉप बिजनेस लीडर्स, सेलिब्रिटी और राजनेता भी फाइलों में
जेफ़्री एपस्टीन की 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में मौत हो गई थी, जब वह नाबालिग लड़कियों की सेक्स ट्रैफिकिंग के मामले में ट्रायल का इंतजार कर रहे थे. उनकी मौत को सुसाइड बताया गया था. इससे पहले सामने आए दस्तावेजों में भी एपस्टीन के कई बड़े लोगों से संबंधों का ज़िक्र मिल चुका है, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स, फिल्ममेकर वुडी एलन, कई यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, और राजनेता खासकर ट्रम्प और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन शामिल रहे हैं.
नई फाइलों में सामने आए एक ड्राफ्ट ईमेल में एपस्टीन ने दावा किया कि बिल गेट्स ने एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स किए थे, जिसे गेट्स फाउंडेशन ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए बयान में खारिज कर दिया. एक अन्य दस्तावेज़ में 2012 की एलन मस्क और एपस्टीन की ईमेल बातचीत सामने आई, जिसमें मस्क पूछते हैं“आपके आइलैंड पर सबसे वाइल्ड पार्टी कौन सी होती है?” मस्क ने शनिवार को X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि इन ईमेल्स को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा सकती है. साथ ही उन्होंने मांग की कि एपस्टीन के साथ गंभीर अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
कुछ और ईमेल में एपस्टीन हॉलीवुड के जाने-माने प्रोड्यूसर स्टीव टीश को कई महिलाओं से जोड़ते दिखाई देते हैं. एक ईमेल में वह एक महिला को “रशियन, सच कम बोलने वाली लेकिन मज़ेदार” बताते हैं. इसके अलावा, एपस्टीन और पूर्व प्रिंस एंड्रयू की बातचीत भी सामने आई, जिसमें एंड्रयू उन्हें 2010 में बकिंघम पैलेस आने का न्योता देते हैं.
कांस्पिरेसी थ्योरीज़ की भी चर्चा
अमेरिका में राइट-विंग समूहों में लंबे समय से एपस्टीन से जुड़ी कई कांस्पिरेसी थ्योरीज़ चर्चा में रही हैं. हालांकि, वास्तविकता यह है कि एपस्टीन के अपराधों में अब तक गिसलेन मैक्सवेल को छोड़कर किसी और पर मुकदमा नहीं चला है. ब्लांश ने संकेत दिया कि नई फाइलों से भी किसी बड़े नए केस खुलने की उम्मीद नहीं है. ट्रम्प और क्लिंटन दोनों का नाम इन दस्तावेज़ों में कई बार आता है, लेकिन किसी पर आधिकारिक आरोप नहीं लगे हैं. रिपब्लिकन नेताओं की एक कमेटी बिल और हिलेरी क्लिंटन पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है, क्योंकि उन्होंने एपस्टीन मामले की जांच में गवाही देने से इनकार कर दिया था.
ट्रम्प ने भी महीनों तक इन फाइलों को सार्वजनिक किए जाने का विरोध किया था. लेकिन उनकी पार्टी में बढ़ते दबाव के बाद उन्हें 'एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट' पर हस्ताक्षर कर सभी फाइलें जारी कराने की मंजूरी देनी पड़ी. यह फाइलें 19 दिसंबर तक जारी होनी थीं. डिप्टी अटॉर्नी जनरल ब्लांश ने कहा कि शुक्रवार को जारी फाइलों के साथ “पूरी डॉक्यूमेंट रिव्यू प्रक्रिया खत्म हो गई,” और देरी इसलिए हुई क्योंकि 1,000 से ज्यादा सर्वाइवर्स की पहचान छिपाने के लिए रेडैक्शन का काम जरूरी था.
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