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युद्ध को धर्म के रंग से धुंधला करने की तैयारी में ट्रंप? देश में ही उठने लगे सवाल; किन बयानों पर लगा आरोप

ट्रंप प्रशासन ने ईरान में अमेरिकी एयरमैन रेस्क्यू को ईस्टर का चमत्कार कहा, जिससे अमेरिका में विवाद बढ़ा. आलोचकों ने प्रशासन पर आस्था और नीति की सीमा धुंधली करने और धार्मिक रंग देने का आरोप लगाया.

युद्ध को धर्म के रंग से धुंधला करने की तैयारी में ट्रंप? देश में ही उठने लगे सवाल; किन बयानों पर लगा आरोप
  • डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान में फंसे अमेरिकी एयरमैन को बचाने को ईस्टर का चमत्कार बताया. अब आलोचना हो रही है.
  • ट्रंप और उनके कैबिनेट सदस्यों ने सैन्य सफलता को धार्मिक आशीर्वाद और ईश्वरीय न्याय के रूप में प्रस्तुत किया है.
  • ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने या नरक का सामना करने की चेतावनी दी थी.
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डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान में अमेरिकी एयरमैन के रेस्क्यू को 'ईस्टर का चमत्कार' बताने पर अमेरिका में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. ट्रंप और उनके कैबिनेट सहयोगियों की ओर से युद्ध और सैन्य अभियानों को धार्मिक रंग देने की कोशिशों की देश के भीतर ही तीखी आलोचना शुरू हो गई है. आलोचकों का कहना है कि प्रशासन आस्था और सरकारी नीति के बीच की लक्ष्मण रेखा को धुंधला कर रहा है.इसके साथ ही ये लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है.

ईरान में फंसे एक अमेरिकी एयरमैन को सुरक्षित निकालने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे 'ईस्टर का चमत्कार' बताया. ट्रंप के इस बयान के बाद उनके कैबिनेट मंत्रियों ने भी इसी सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया.

आमतौर पर अमेरिकी प्रशासन ईस्टर के मौके पर केवल बधाई संदेश जारी करता था, लेकिन इस बार सैन्य सफलता को सीधे तौर पर ईश्वरीय आशीर्वाद और धार्मिक जीत से जोड़कर पेश किया गया है.

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि ईस्टर का दिन इतिहास की सबसे बड़ी जीत (ईसा मसीह के पुनरुत्थान) का प्रतीक है, इसलिए इस पवित्र दिन पर एक अमेरिकी योद्धा का दुश्मन की सीमा से सुरक्षित लौटना बिल्कुल उचित और ईश्वरीय न्याय है.

ट्रंप और रक्षा मंत्री के बयानों से आलोचकों में मची खलबली

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी ट्रंप की पोस्ट को शेयर करते हुए 'गॉड इज गुड' (ईश्वर महान है) लिखा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वही वाक्य था जो रेस्क्यू किए गए अधिकारी ने विमान से निकलने के बाद रेडियो पर कहा था. हालांकि, विवाद तब और गहरा गया जब ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए एक तरफ पावर प्लांट और पुलों को उड़ाने की बात कही, तो दूसरी तरफ अपने संदेश के अंत में 'अल्हम्दुलिल्लाह' (Praise be to Allah) लिखकर तंज कसा.

ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि वे 'हॉर्मुज स्ट्रेट' को खोल दें, वरना उन्हें 'नरक' का सामना करना पड़ेगा.

'ईसाई मूल्यों के खिलाफ' का लगा आरोप

रिपब्लिकन पार्टी की ही पूर्व प्रतिनिधि मार्जोरी टेलर ग्रीन ने ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि प्रशासन का यह रवैया ईसाई मूल्यों के साथ विश्वासघात है.

उन्होंने तर्क दिया कि प्रशासन को युद्ध को बढ़ावा देने के बजाय शांति का मार्ग अपनाना चाहिए, क्योंकि ईसा मसीह की शिक्षाएं दुश्मनों के प्रति भी क्षमा और प्रेम का पैगाम देती हैं.

दूसरी तरफ, 'काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस' (CAIR) ने भी ट्रंप की भाषा की कड़ी निंदा की है. संगठन का कहना है कि ट्रंप द्वारा धमकी भरे लहजे में 'अल्हम्दुलिल्लाह' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना इस्लाम का मजाक उड़ाने जैसा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन अपनी हिंसक धमकियों को सही ठहराने के लिए धार्मिक भाषा को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है.

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