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ईरान-ताइवान से लेकर बिजनेस तक... क्या ट्रंप चीन दौरे से जो हासिल करना चाहते थे वो पूरा हुआ?

व्यापार के मोर्चे पर ट्रंप ने हमेशा की तरह दावा किया कि उन्होंने शी जिनपिंग के साथ 'शानदार ट्रेड डील्स' की हैं. इस दौरे पर अमेरिकी प्राथमिकताओं को 'थ्री-बी' यानी बीफ (Beef), बीन्स (Soybeans) और बोइंग (Boeings) के फॉर्मूले में समेटा गया था.

ईरान-ताइवान से लेकर बिजनेस तक... क्या ट्रंप चीन दौरे से जो हासिल करना चाहते थे वो पूरा हुआ?
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग में बेहद अनुशासित तरीके से बोल रहे और व्यवहार कर रहे थे.
AFP

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बीजिंग का बहुप्रतीक्षित दौरा भारी तामझाम और कूटनीतिक ड्रामे के बीच खत्म तो हो गया, लेकिन इस बात को लेकर अब भी गहरा सस्पेंस है कि आखिरकार इस यात्रा से हासिल क्या हुआ? लगभग एक दशक में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा थी. ट्रंप ने शुक्रवार को बड़े गर्व से दावा किया कि उन्होंने और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिलकर कई ऐसी उलझी हुई समस्याओं को सुलझा लिया है, जिन्हें कोई और छू भी नहीं सकता था. हालांकि, इन 'सॉल्यूशन्स' की हकीकत क्या है, इस पर उन्होंने पूरी तरह सस्पेंस बनाए रखा.

विशेषज्ञ इस पूरी कवायद को केवल एक कूटनीतिक शो मान रहे हैं.चीनी पक्ष की ओर से जारी आधिकारिक बयान में भी दोनों नेताओं की आखिरी द्विपक्षीय बैठक को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई. यही वजह है कि जानकार इसे 'गतिरोध का शिखर सम्मेलन'कह रहे हैं.

हॉर्मुज संकट और ईरान पर क्या बात सामने निकलकर आई?

बीजिंग से रवाना होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने 'फॉक्स न्यूज' को दिए इंटरव्यू में उन मुद्दों पर खुलकर बात की, जिन पर बंद कमरों में चर्चा हुई थी. इस बातचीत के केंद्र में मध्य पूर्व का संकट और ईरान का मुद्दा सबसे ऊपर था. हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच गंभीर चर्चा हुई.

ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान पर विस्तार से बात की है. इस मुद्दे के अंत को लेकर हमारी सोच काफी हद तक एक जैसी है. हम दोनों ही नहीं चाहते कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों और हम चाहते हैं कि हॉर्मुज का समुद्री रास्ता खुला रहे."

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Photo Credit: AFP

हालांकि, चीन इस बात को सार्वजनिक करने से बच रहा है कि वह इस मामले में अमेरिका की क्या मदद करेगा. चीनी विदेश मंत्रालय ने सिर्फ इतना कहा कि यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था और चीन शांति के लिए अथक प्रयास कर रहा है. इसी बीच ट्रंप ने संकेत दिया कि वे चीनी कंपनियों पर से तेल प्रतिबंध हटाने पर विचार कर सकते हैं.

ताइवान को हथियार देने पर क्या बात हुई?

ताइवान का मुद्दा इस बैठक का सबसे संवेदनशील मोड़ था. ट्रंप ने खुलासा किया कि वे ताइवान को दिए जाने वाले 14 अरब डॉलर (करीब 10.5 अरब पाउंड) के रिकॉर्ड सैन्य पैकेज को टालने या रद्द करने पर विचार कर रहे हैं. अगर अमेरिका ऐसा करता है, तो यह बीजिंग की सबसे बड़ी मांग को पूरा करने जैसा होगा. चीन ताइवान पर अपना दावा ठोकता आया है.

हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बीजिंग में साफ किया कि अमेरिका की ताइवान नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस सैन्य पैकेज को रोकने से ताइवान क्षेत्र में युद्ध रोकने की अमेरिकी क्षमता कमजोर होगी. बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने ट्रंप को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि ताइवान का मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों के बीच की 'सबसे महत्वपूर्ण' और संवेदनशील लक्ष्मण रेखा है, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए.

व्यापारिक सौदों का 'थ्री-बी' फॉर्मूला

व्यापार के मोर्चे पर ट्रंप ने हमेशा की तरह दावा किया कि उन्होंने शी जिनपिंग के साथ 'शानदार ट्रेड डील्स' की हैं. इस दौरे पर अमेरिकी प्राथमिकताओं को 'थ्री-बी' यानी बीफ (Beef), बीन्स (Soybeans) और बोइंग (Boeings) के फॉर्मूले में समेटा गया था. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने उम्मीद जताई कि चीन अगले तीन वर्षों में अरबों डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदेगा.

विमान निर्माता कंपनी बोइंग को लेकर एक बड़ी घोषणा जरूर हुई, जिसके तहत चीन अमेरिका से 200 जेट विमान खरीदेगा. ट्रंप ने बाद में कहा कि यह संख्या 750 तक जा सकती है. हालांकि, दोनों देशों के बीच चल रहे मुख्य टैरिफ वॉर (सीमा शुल्क युद्ध) को खत्म करने के लिए कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका. पिछले साल हुआ अस्थायी समझौता इस साल नवंबर में खत्म होने जा रहा है, जिससे व्यापारिक तनाव फिर बढ़ सकता है.

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रेयर अर्थ्स पर फंसा पेंच

आर्थिक मोर्चे पर जहां ट्रंप का सबसे बड़ा हथियार टैरिफ है, वहीं चीन के पास 'रेयर अर्थ्स' (दुर्लभ खनिज) का इक्का है. चीन ने पिछले साल इन महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर रोक लगा दी थी, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन ठप हो गई थी. हालांकि बाद में चीन आपूर्ति बहाल करने पर सहमत हुआ था, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन अब भी निर्यात लाइसेंस देने में जानबूझकर देरी कर रहा है.

काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) की विशेषज्ञ हीदी क्रेडो-रेडिकर ने चेतावनी दी कि चीन ने पिछले साल इन खनिजों के निर्यात पर जो पाबंदियां लगाई थीं, उसने अमेरिकी और यूरोपीय उद्योगों की कमर तोड़ दी है. आज भी अमेरिका अपने रक्षा तंत्र, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चीन के नियंत्रण वाले सप्लाई चेन पर निर्भर है. चीन के पास इस बाजार की ताला-चाबी है और वह अमेरिकी उद्योगों को पछाड़ने के लिए कीमतों का खेल खेल रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका को इस मोर्चे पर आत्मनिर्भर होने में अभी कई साल लगेंगे.

वहीं मानवाधिकारों के मुद्दे पर ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग चीन में हिरासत में लिए गए अमेरिकी पादरियों को रिहा करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. लेकिन हॉन्गकॉन्ग के लोकतंत्र समर्थक मीडिया दिग्गज जिमी लाई का मामला काफी पेचीदा बना हुआ है. जिमी लाई को पिछले साल 20 साल की सजा सुनाई गई थी और उनका परिवार ट्रंप से उनकी रिहाई की गुहार लगा रहा है. 

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डोनाल्ड ट्रंप को अपनी रैलियों और भाषणों में तय स्क्रिप्ट से हटकर बोलने, मजाक उड़ाने या विरोधियों पर तंज कसने के लिए जाना जाता है. लेकिन बीजिंग में ट्रंप का एक बेहद अनुशासित और अलग रूप देखने को मिला. वह पूरे दौरे पर बेहद संयमित दिखे, यहां तक कि स्टेट डिनर में दिया गया उनका भाषण भी संयमित था. व्हाइट हाउस के अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप इस बेहद महत्वपूर्ण समिट को किसी भी अप्रत्याशित बयान से खराब नहीं करना चाहते थे, क्योंकि चीनी अधिकारी अपनी तयशुदा बैठकों में किसी भी तरह के 'सरप्राइज' को पसंद नहीं करते है. 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

इस पूरी नीरस यात्रा में अगर कुछ सकारात्मक रहा, तो वह था 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत थी. ट्रंप ने बताया कि उन्होंने और जिनपिंग ने एआई के खतरों से निपटने के लिए 'सुरक्षा घेरा' बनाने पर चर्चा की है. ट्रंप ने कहा कि एआई चिकित्सा और सैन्य क्षेत्र के लिए शानदार है, लेकिन इसके जरिए जैविक, परमाणु और साइबर खतरों का जोखिम भी जुड़ा है, जिसे दोनों देश मिलकर संभाल सकते हैं. चीनी कंपनियां अमेरिकी एआई चिप्स खरीदने के लिए बेताब हैं, क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ये आधुनिक चिप्स चीन को देता है, तो चीन की एआई कंप्यूटिंग क्षमता तीन गुना बढ़ जाएगी.

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