बीजिंग:
चीन ने शुक्रवार को अपने रक्षा बजट में करीब 13 प्रतिशत की वृद्धि की। साथ ही उसने कहा है कि वह भारत जैसे पड़ोसी देशों के साथ बेहतर सम्बंध चाहता है। चीन की राष्ट्रीय कार्यपालिका बैठक के वार्षिक सत्र के प्रवक्ता ली झाओक्सिंग ने कहा कि सीमा विवाद समाप्त करने से पहले भारत और चीन अपने सीमावर्ती इलाकों में शांति बरकरार रखने की सहमति पर पहुंच गए हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक ली ने कहा कि चीन ने वर्ष 2011 के लिए अपना रक्षा बजट 12.7 प्रतिशत बढ़ाकर 91.5 अरब डॉलर किया है। पिछले साल इसमें 7.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर सीमावर्ती इलाकों में शांति बरकरार रखने के लिए प्रासंगिक समझौतों के क्रियान्वयन के लिए तैयार है जो दोनों देशों के हित में है। ली ने कहा, "यह सच है कि चीन के रक्षा बजट में वृद्धि की गई है लेकिन सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में देश का रक्षा बजट काफी कम है। यह अनुपात अन्य देशों की अपेक्षा काफी कम है।" भारत में यह अनुपात दो प्रतिशत से काफी ज्यादा है। चीन के रक्षा बजट में वृद्धि से भारत जैसे देशों पर दबाव पड़ने का सवाल पूछे जाने पर ली ने यह बात कही। उन्होंने कहा, "सरकार हमेशा सैन्य बजट को सीमित रखने की कोशिश करती है और राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सैन्य खर्च तार्किक स्तर पर रखा गया है।" चीन के पूर्व विदेश मंत्री रह चुके ली ने कहा कि चीन का रक्षा खर्च पारदर्शी और सुरक्षात्मक रवैए पर आधारित है। ली ने कहा कि रक्षा बजट में की गई बढ़ोतरी से देश की 25 लाख सैनिकों वाली पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को आधुनिक बनाना है लेकिन विदेशी राजनीतिज्ञों और विश्लेषकों ने सैन्य विस्तार को लेकर चिंता जाहिर की है।
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