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अमेरिका को NATO से बाहर निकालने की तैयारी में क्यों हैं ट्रंप, उनके पास यह करने का अधिकार है?

Donald Trump vs NATO: ईरान जंग के बीच एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह अमेरिका को इस सैन्य गुट से बाहर निकालने पर मजबूती से विचार कर रहे हैं.

अमेरिका को NATO से बाहर निकालने की तैयारी में क्यों हैं ट्रंप, उनके पास यह करने का अधिकार है?
Donald Trump vs NATO: अमेरिका को NATO से बाहर निकालने की तैयारी में क्यों हैं ट्रंप
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो सैन्य गठबंधन से अमेरिका को बाहर निकालने पर विचार कर रहे हैं
  • 2023 के कानून के अनुसार नाटो संधि से बाहर निकलने के लिए 100 सदस्यीय सीनेट में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है
  • विदेश मंत्री रुबियो ने 2023 में सीनेट की मंजूरी के बिना नाटो से बाहर निकलने का विरोध किया था, अब यूटर्न ले रहे
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ईरान जंग के बीच अपने जुबानी हमलों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया टारगेट खोज लिया है- नाटो सैन्य गठबंधन. नाटो या 'उत्तर अटलांटिक संधि संगठन' के साथी देशों ने ट्रंप की लड़ाई को अपना सर्मथन देने से इनकार कर दिया है, होर्मुज को फिर से खोलने में मदद करने की मांग को खारिज कर दिया है और यहां तक कि अमेरिकी फाइटर जेट को उड़ान भरने के लिए अपना सैन्य बेस नहीं दे रहे हैं. इन सबसे ट्रंप खासा नाराज हैं. द टेलीग्राफ के साथ एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह अमेरिका को इस सैन्य गुट से बाहर निकालने पर मजबूती से विचार कर रहे हैं.

 सवाल है कि क्या ट्रंप बिना अमेरिकी संसद की मंजूरी के ऐसा कर सकते हैं? अमेरिका का संविधान और कानून ऐसे गठबंधन से अमेरिका को बाहर निकालने को लेकर क्या कहता है. आपको यह भी बताएंगे कि इस मामले में अमेरिका के मौजूदा विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कैसे यूटर्न मारा है.

Q- किसी संधि को तोड़ने को लेकर अमेरिकी संविधान क्या कहता है?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका का संविधान यह साफ-साफ कहता है कि राष्ट्रपति के पास सीनेट की सलाह और सहमति से दूसरे देशों के साथ संधियां करने की शक्ति है, बशर्ते 100 सदस्यीय सीनेट में से दो-तिहाई सहमत हों. हालांकि किसी संधि को तोड़ने या उसे वापस लेने पर अमेरिका का संविधान चुप है. (नोट- अमेरिकी सीनेट अमेरिकी संसद का ऊपरी और अधिक शक्तिशाली सदन है.)

Q- अमेरिका का कानून क्या कहता है?

2023 में अमेरिका में जो बाइडेन की सरकार थी और तब वहां की संसद से एक कानून पास हुआ था. इस कानून के अनुसार कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति उस समय तक नाटो की स्थापना करने वाली संधि से अमेरिका को बाहर नहीं निकाल सकता, जब तक कि इस फैसले को 100-सदस्यीय सीनेट में दो-तिहाई बहुमत का समर्थन न हो. कमाल की बात है कि इसे पास कराने में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा हाथ था.

Q- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कैसे मारा यूटर्न? 

यह कानून 2024 नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट में संशोधन के रूप में पेश किया गया था. यह कानून पेंटागन के लिए एक विशाल वार्षिक बिल सेटिंग नीति है. इस संशोधन के मुख्य प्रायोजक वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम काइन और फ्लोरिडा के तत्कालीन रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रुबियो थे. अब वही रुबियो ट्रंप सरकार में विदेश मंत्री बन गए हैं और दूसरी भाषा बोल रहे हैं. रुबियो अब (31 मार्च 2026) विदेश मंत्री के तौर पर कह रहे हैं कि "हमें नाटो के साथ अपने रिश्तों की समीक्षा करनी होगी."

रुबियो का साल 2023 का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट भी वायरल हो रहा है. इसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति सीनेट (संसद) की मंजूरी के बिना एकतरफा फैसला लेकर नाटो (NATO) से बाहर नहीं हो सकता.

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Q- नाटो संधि क्या कहती है?

नाटो में यूरोपीय देश, अमेरिका और कनाडा शामिल हैं. इसका गठन 1949 में सोवियत रूस के हमलों के जोखिम का मुकाबला करने के उद्देश्य से किया गया था और तब से यह पश्चिम की सुरक्षा की आधारशिला रहा है. 1949 की उत्तरी अटलांटिक संधि के अनुच्छेद 13 में कहा गया है कि कोई भी देश या पार्टी अमेरिकी सरकार को एक साल का नोटिस देने के बाद पीछे हट सकती है. यह अमेरिकी सरकार का काम है कि वह अन्य सरकारों को इसकी जानकारी दे कि यह विशेष देश नाटो से बाहर जा रहा है.

ध्यान रहे कि आज तक, किसी भी नाटो सदस्य ने कभी भी अपनी सदस्यता रद्द नहीं की है.

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