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This Article is From Jan 26, 2026

बलूचिस्तान बना विशाल जेल, BYC की रिपोर्ट ने खोली पाकिस्तान की पोल

बीवाईसी ने आगे आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में कानूनी व्यवस्था को मानवाधिकार रक्षकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.

बलूचिस्तान बना विशाल जेल, BYC की रिपोर्ट ने खोली पाकिस्तान की पोल
  • बलूच यकजेहती कमेटी ने 2025 में पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान को विशाल जेल और मौत की कोठरी बताया है
  • वर्ष 2025 में बलूचिस्तान में जबरन गायब किए गए 1,223 मामलों का दस्तावेजीकरण किया गया है
  • रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में 188 गैर-न्यायिक हत्याएं हुईं, जिनमें मकरान डिवीजन सबसे प्रभावित क्षेत्र है

बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने 2025 के लिए अपनी वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को एक विशाल जेल और मौत की कोठरी में बदल दिया है. इस रिपोर्ट में पूरे प्रांत में 2025 के दौरान जबरन गायब किए गए 1,200 से अधिक मामलों और लगभग 200 कथित गैर-न्यायिक हत्याओं का दस्तावेजीकरण किया गया है. ये आंकड़े बलूचिस्तान में तेजी से बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति को प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त हैं.

क्या है रिपोर्ट में

रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में जबरन गुमशुदगी के 1,223 मामले दर्ज किए गए. इनमें से 348 व्यक्तियों को बाद में रिहा कर दिया गया, जबकि 832 लोग अभी भी लापता हैं. लापता लोगों में कम से कम 75 नाबालिग और 18 महिलाएं शामिल हैं. केच जिले में गुमशुदगी के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए, जहां वर्ष के दौरान 339 मामले दर्ज किए गए. रिपोर्ट में 188 कथित गैर-न्यायिक हत्याओं का भी दस्तावेजीकरण किया गया है. बलूचिस्तान संगठन (BYC) ने कहा कि 75 लोगों को राज्य की लंबे समय से चली आ रही "मारो और फेंक दो" नीति के तहत मार डाला गया. मकरान डिवीजन और अवारान जिले को इस संबंध में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना गया.

देखें बलूच नेता का ट्वीट

प्रदर्शन करने पर भी कार्रवाई

BYC ने बलूचिस्तान में 2025 के दौरान प्रतिदिन चलाए गए बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों पर भी प्रकाश डाला. समूह ने आरोप लगाया कि इन अभियानों से महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों को व्यापक नुकसान पहुंचा. रिपोर्ट में खुजदार जिले के ज़हरी क्षेत्र में हवाई हमलों में 20 नागरिकों की हत्या का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा, समिति ने बताया कि जबरन गायब किए जाने के मामलों को समाप्त करने की मांग को लेकर वर्ष भर में 122 से अधिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किए गए. इनमें से कम से कम 39 प्रदर्शनों को कथित तौर पर बलपूर्वक तितर-बितर कर दिया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया कि इन दमनकारी कार्रवाइयों के दौरान 400 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया और दर्जनों घायल हुए.

बीवाईसी ने आगे आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में कानूनी व्यवस्था को मानवाधिकार रक्षकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसने शांतिपूर्ण असहमति को दबाने के लिए आतंकवाद विरोधी कानूनों, 3-एमपीओ और धारा 144 के इस्तेमाल का हवाला दिया. समूह ने कहा कि उसके पांच नेता, जिनमें केंद्रीय आयोजक महरंग बलूच भी शामिल हैं, वर्तमान में जेल में हैं, जबकि अन्य कार्यकर्ताओं को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.
 

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