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This Article is From Nov 14, 2022

रूसी राष्ट्रपति Putin ने G20 सम्मेलन से क्यों बनाई दूरी...यह हैं इसके 10 बड़े कारण

रूसी राष्ट्रपति व्लादमिर पुतिन (Vladimir Putin) आखिरी बार G20 में साल 2014 में शरीक हुए थे. साल 2014 में ही रूस (Russia) ने क्रीमिया (Crimea) को यूक्रेन (Ukraine) से छीना था. उन्हें साल 2014 में जी20 सम्मेलन (G20 Summit) में इतनी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा कि उन्हें जल्द ही सम्मेलन छोड़ कर जाना पड़ा था.

रूसी राष्ट्रपति Putin ने G20 सम्मेलन से क्यों बनाई दूरी...यह हैं इसके 10 बड़े कारण
Russia Ukraine War: यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन ने काटी जी 20 सम्मेलन से कन्नी ( File Photo)
  1. द डायलॉग ऑफ सिविलाइज़ेशन इंस्टीट्यूट के प्रमुख रिसर्चर एलेक्सी मालाशेंकों का कहना है कि पुतिन एक बार फिर सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत नहीं होना चाहते. उन्होंने याद किया कि साल 2014 में पुतिन को पारंपरिक ग्रुप फोटो में दूर किनारे खड़ा किया गया था.   
  2. जी20 सम्मेलन में यूक्रेन में रूस के आक्रमण का मुद्दा उठने की पूरी संभावना है, इससे कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका लगा है और खाने की भी किल्लत हुई है.  
  3. क्रेमलिन के नज़दीकी विदेश मामलों के जानकार, फायोडोर लकीयानोव, ने संकेत दिया कि पुतिन यूक्रेन के मुद्दे पर टस से मस होने को तैयार नहीं है.  
  4. रूसी संसद ने कहा कि पुतिन जी20 सम्मेलन को वीडियो लिंक से भी संबोधित नहीं करेंगे. 
  5. रूसी राष्ट्रपति पुतिन की तुलना में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की जी 20 नेताओं के साथ लॉबी करने में अधिक कामयाब होंगे. ज़ेलेंस्की इस जी 20 सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं.   
  6. रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव करेंगे. वह जुलाई में ही हुए एक जी20 सम्मेलन में सभागार से बाहर निकल गए थे जब यूक्रेन में रूसी आक्रमण की निंदा की जा रही थी. यही वाकया उनके साथ दोबारा घट सकता है.  
  7. राजनैतिक विश्लेषक कोनस्टेंटिन कालाचेव ने कहा कि बाली में पुतिन का ना आना बताता है कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है. ना ही ऐसा कोई प्रस्ताव है जो दोनों पक्षों को संतुष्ट कर सकता है.   
  8. सितंबर में हजारों रिज़र्व बलों को यूक्रेन में भेजने के फैसले के बाद भी रूसी सेना को यूक्रेन में खारकीव से पीछे हटना पड़ा. कुछ दिन पहले ही रूस ने रणनीतिक तौर पर अहम खेरसॉन क्षेत्र से भी वापसी की है. यह रूस के लिए शर्मिंदगी की बात है. शांतिवार्ता भी ठंडे बस्ते में है.    
  9. राजनैतिक विश्लेषक कंपनी आर. पोलिटिक (R.Politik) की फाउंडर तातियाना स्टानोव्या ने कहा, पुतिन का मानना है कि रूस की अमेरिका विरोधी मुहिम को काफी समर्थन मिल रहा है और उनके जी 20 में ना जाने से रूस के न्यूट्रल देशों के साथ संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
  10. रूस पहले ही उन देशों के साथ संबंध गहरे कर रहा है जो वैश्विक मामलों में अमेरिकी दबदबे के खिलाफ हैं. पुतिन पश्चिम विरोधी गुट को मजबूत करना चाह रहे हैं.  
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