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This Article is From Feb 12, 2018

यूपी में गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव के लिए दलों के बीच रस्साकशी शुरू

योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के कारण रिक्त लोकसभा की दो सीटों पर उपचुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने शुरू कर दी तैयारियां

यूपी में गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव के लिए दलों के बीच रस्साकशी शुरू
यूपी में लोकसभा उपचुनाव में अपने गढ़ गोरखपुर सीट को बचाए रखना सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए चुनौती है.
  • गोरखपुर योगी का गढ़, फूलपुर में बीजेपी 2014 में पहली बार जीती
  • समाजवादी पार्टी इस चुनाव में नहीं करेगी कोई गठबंधन
  • दोनों सीटों पर 11 मार्च को मतदान, 14 मार्च को आएंगे परिणाम
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लखनऊ: यूपी की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं. इसके लिए राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. इन सीटों पर पहले बीजेपी का कब्जा था जिसे बचाए रखने के लिए वह पूरा जोर लगाएगी. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस उपचुनाव में जीत हासिल करके राज्य सरकार को सबक सिखाने की फिराक में हैं.  

गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने के कारण रिक्त हुई हैं क्योंकि ये दोनों इस्तीफा देकर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बन गए हैं. उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में रहने के लिए इन दोनों को प्रदेश की विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना जरूरी था.

उधर समाजवादी पार्टी (सपा) के विधानसभा में विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी ने गोरखपुर में पत्रकारों से कहा कि सपा दोनों उपचुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर लड़ेगी और उसका उपचुनाव में किसी भी दल से कोई गठबंधन नहीं होगा.

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राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए गोरखपुर लोकसभा सीट प्रतिष्ठा का सवाल है क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस सीट पर पांच बार जीत हासिल कर चुके हैं. योगी के पहले उनके गुरू मंहत अवैद्यनाथ इस सीट पर तीन बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. दूसरी तरफ है फूलपुर लोकसभा सीट जो कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी. पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस सीट पर पार्टी का प्रतिनिधित्व कर चुके थे. इस सीट पर पहली बार भाजपा ने 2014 में जीत दर्ज की थी और केशव प्रसाद मौर्य ने यहां पार्टी का भगवा झंडा लहराया था.

इन उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. सबकी निगाहें भाजपा पर होंगी जो इन दोनों सीटों को वापस हासिल करना चाहेगी. उसके लिए यह उपचुनाव खासतौर पर इसलिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न है क्योंकि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में यह पार्टी प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई है. नौ फरवरी को चुनाव आयोग ने दोनों सीटों पर 11 मार्च को उपचुनाव कराये जाने की घोषणा की थी और परिणामों की घोषणा 14 मार्च को की जाएगी.

उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की प्रतिष्ठा से जुड़ी गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव की घोषणा के बाद भाजपा और मुख्य विपक्षी दल सपा और कांग्रेस ने उपचुनाव में जीत हासिल करने का दावा किया. प्रमुख विपक्षी दलों सपा और बहुजन समाज पार्टी ने इन दोनों ही सीटों के उपचुनाव मतपत्रों के जरिए कराने की मांग पहले से ही की है.

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भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा की जीत का विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उनका दल हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहता है. भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है. मुझे विश्वास है कि आने वाले उपचुनाव में पार्टी और बड़े अंतर से जीतेगी.

हालांकि सपा का दावा है कि मतदाता गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को उसकी वादाखिलाफी का सबक सिखाएंगे. सपा प्रवक्ता सुनील सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा को उसकी वादाखिलाफी के लिए सबक जरूर सिखाएगी क्योंकि पिछले चुनाव में भाजपा ने जो वादे किए थे वे आज तक पूरे नहीं हुए हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी दोनों ही सीटों पर जीत हासिल करेगी. अगले एक-दो दिन में सपा गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर देगी.

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इस बीच, कांग्रेस ने भी दावा किया कि प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के शासनकाल में डर का माहौल बना हुआ है और उप चुनाव में जनता इसका जवाब देगी. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अशोक सिंह ने कहा कि कांग्रेस गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव लड़ेगी और निश्चित रूप से बेहतर प्रदर्शन करेगी. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार हर मोर्चे पर खासकर कानून एवं व्यवस्था के मामले में बुरी तरह नाकाम साबित हुई है. प्रदेश में डर का माहौल है और किसानों की दुश्वारियां खत्म नहीं हुई हैं.
(इनपुट भाषा से)

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