यूपी में हुए हिंसक प्रदर्शन में दो लोगों की जान चली गई, जबकि 75 लोग घायल हो गए.
- मायावती के लॉमेकर पर लगा दलितों के हिंसक प्रदर्शन का आरोप
- यूपी पुलिस ने लगाया आरोप
- हिंसत प्रदर्शन में 2 लोगों की जान चली गई, जबकि 75 लोग घायल हो गए
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लखनऊ:
यूपी पुलिस ने सोमवार को दलितों समूहों द्वारा किए गए प्रदर्शन का आरोप बसपा सुप्रीमो मायावती की पार्टी के एक लॉमेकर पर लगाया है. यूपी में दलित समूह द्वारा किए गए हिंसक प्रदर्शन में दो लोगों की जान चली गई, जबकि 75 लोग घायल हो गए. इस संबंध में राज्य विधानसभा में मेरठ के हस्तिनापुर का प्रतिनिधित्व करने वाले योगेश वर्मा को हिरासत में लिया गया है.
मेरठ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मंजिल सैनी ने कहा कि योगेश वर्मा हिंसा का मुख्य षड्यंत्रकारी है.यूपी में मेरठ उन प्रमुख शहरों में से एक था, जहां हिंसा हुई थी. उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ भी जमकर झड़प हुई. इस हिंसा में दो लोगों की मौत भी हो गई. मेरठ और मुजफ्फरपुर में एक-एक व्यक्ति की मौत की खबर आई. वहीं, इस हिंसा में कम से कम 45 पुलिसकर्मी घायल हो गए. सरकार ने 200 रैपिड एक्शन फोर्स कर्मियों को मेरठ भेजा. साथ ही पुलिस फोर्स को आगरा और हापुर भी भेजा गया.
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मंजिल सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए पुलिस को खुली छूट दी हुई थी. इस हिंसा में शामिल करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उन पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. योगेश वर्मा भी उन 200 लोगों में शामिल है, जिन्हें हिरासत में लिया गया है. योगेश वर्मा पर कई मुकदमे दर्ज है, जिनमें हत्या की कोशिश से लेकर हिंसा फैलाने के मामले शामिल हैं.
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इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कथित रूप से शिथिल करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के खिलाफ प्रदर्शन को अपनी पार्टी का समर्थन जताते आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा भड़कायी जिससे जान एवं माल की क्षति हुई.
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मायावती ने यह भी कहा था कि मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय का फैसलाअदालत में नरेंद्र मोदी सरकार के निराशाजनक रवैये का परिणाम था. उन्होंने कथित रूप से हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय के आदेश का विरोध कर रहे बेगुनाह लोगों को परेशान नहीं किया जाए.
मेरठ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मंजिल सैनी ने कहा कि योगेश वर्मा हिंसा का मुख्य षड्यंत्रकारी है.यूपी में मेरठ उन प्रमुख शहरों में से एक था, जहां हिंसा हुई थी. उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ भी जमकर झड़प हुई. इस हिंसा में दो लोगों की मौत भी हो गई. मेरठ और मुजफ्फरपुर में एक-एक व्यक्ति की मौत की खबर आई. वहीं, इस हिंसा में कम से कम 45 पुलिसकर्मी घायल हो गए. सरकार ने 200 रैपिड एक्शन फोर्स कर्मियों को मेरठ भेजा. साथ ही पुलिस फोर्स को आगरा और हापुर भी भेजा गया.
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मंजिल सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए पुलिस को खुली छूट दी हुई थी. इस हिंसा में शामिल करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उन पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. योगेश वर्मा भी उन 200 लोगों में शामिल है, जिन्हें हिरासत में लिया गया है. योगेश वर्मा पर कई मुकदमे दर्ज है, जिनमें हत्या की कोशिश से लेकर हिंसा फैलाने के मामले शामिल हैं.
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इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कथित रूप से शिथिल करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के खिलाफ प्रदर्शन को अपनी पार्टी का समर्थन जताते आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा भड़कायी जिससे जान एवं माल की क्षति हुई.
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मायावती ने यह भी कहा था कि मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय का फैसलाअदालत में नरेंद्र मोदी सरकार के निराशाजनक रवैये का परिणाम था. उन्होंने कथित रूप से हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय के आदेश का विरोध कर रहे बेगुनाह लोगों को परेशान नहीं किया जाए.
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