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This Article is From Mar 29, 2018

अब सरकारी रिकॉर्ड में अंबेडकर के नाम के साथ जुड़ेगा 'रामजी', योगी सरकार ने जारी किया आदेश

बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है.

अब सरकारी रिकॉर्ड में अंबेडकर के नाम के साथ जुड़ेगा 'रामजी', योगी सरकार ने जारी किया आदेश
बीआर अंबेडकर (फाइल फोटो)
  • योगी सरकार ने भीमराव अंबेडकर को लेकर लिया यह फैसला.
  • अब अंबेडकर के नाम के साथ जुड़ेगा रामजी.
  • राम नाईक ने की थी सिफारिश.
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लखनऊ: यूपी सरकार ने आदेश दिया है कि अब डॉ. अंबेडकर का नाम हर जगह डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर लिखा जाएगा, क्‍योंकि 'रामजी' उनके पिता का नाम था. और संविधान के आठवीं अनुसूची में उन्‍होंने अपना नाम यही लिखा था. विपक्ष इसे लेकर बीजेपी पर हमलावर है. उसका कहना है कि बीजेपी सरकार बुनियादी मुद्दों से ध्‍यान भटकाने के लिए हर वक्‍त गैर जरूरी बहस छेड़े रहती है.

बाबा साहब की मूर्तियों के नीचे, उनके नाम वाली सड़कों के पत्‍थरों पर, सरकारी दफ्तरों में लगी उनकी तस्‍वीरों पर और सारे सरकारी दस्‍तावेजों में अब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जगह 'डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर' लिखा जाएगा. अंबेडकर की मौत के 61 साल बाद अब यूपी सरकार को चिंता हुई है कि उनके नाम के साथ उनके पिता का नाम 'रामजी' नहीं लिखा जा रहा है.

यूपी सरकार के मंत्री और प्रवक्‍ता सिद्धार्थनाथ सिंह कहते हैं, 'इसमें देखना चाहिए लोगों को कि संविधान की जो आठवीं अनुसूची है उसमें बाबा साहब ने किस तरह से अपने हस्‍ताक्षर किये हैं. और उसमें दिखेगा कि उन्‍होंने लिखा है भीमराव रामजी अंबेडकर. तो जो उसका सही नाम  है, कम से कम सही से नाम तो हमलोग बुलाएं.'

इस पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हुई हैं. विपक्ष कहता है कि बीजेपी बुनियादी मुद्दों से ध्‍यान हटाने के लिए ऐसे शोशे छोड़ती है.
 
समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं, 'लेकिन आज जरूरी ये है कि जहां बाब भीमराव अंबेकर जी को याद कर रहे हैं, उनके नाम में और नाम जुड़ रहा है, वहीं उनके दिखाए हुए रास्‍ते पर कैसे चलें. मैं समझता हूं कि अब जरूरी यह हो गया है कि इस प्रदेश के मुख्‍यमंत्री संविधान की कुछ लाइनों को पढ़ लें.'

वो भारत रत्‍न हैं, वो संविधान के निर्माता थे, वो देश के पहले कानून मंत्री थे, वो लंदन स्‍कूल ऑफ इकोनॉमिक्‍स, कोलंबिया यूनिवर्सिटी और उस्‍मानिया यूनिवर्सिटी से 4 बार डॉक्‍टरेट थे. वो दलितों के मसीहा थे. वो इतने बड़े थे कि इतने छोटे से शब 'बाबा साहब' कहने से ही पहचाने जाते हैं. ठीक उसी तरह कि बाबू कहने भर से लोग गांधी जी को ही समझते हैं, किसी को मोहनदास करमचंद गांधी नाम बताने की जरूरत नहीं होती.


बाबा साहब के पोते आनंद राज अंबेडकर बताते हैं, 'बाबा साहब के पिता का नाम रामजी था. और वो पिता का नाम जोड़ने में फख्र महसूस करते थे. लेकिन उनका नाम जोड़ने की ये जो राजनीति कर रहे हैं, वो बहुत दुर्भायपूण है. कोई व्‍यक्ति सिर्फ अपने नाम से नहीं जाना जाता, समाज में अपने योगदान से भी जाना जाता है.'

अंबेडकर और गांधी इतने छोटे लोग नहीं हैं कि उनकी पहचान बताने के लिए उनकी वल्दियत और उनके गांव के नाम साथ में बताना जरूरी हो. फिर महात्‍मा गांधी के लिए तो काई ऐसा आदेश नहीं है कि हर जगह उनका नाम महात्‍मा गांधी की बजाय मोहनदारस करमचंद गांधी लिखा जाए. फिर अंबेडकर के लिए ऐसा आदेश क्‍यों? और फिर अंबेडकर के पिता का नाम रामजी नहीं होता तो भी क्‍या सरकार उनके पिता का नाम उनके नाम उनके नाम के साथ लगाना जरूरी करारती. ऐसे बहुत से सवाल हैं जिनका जवाब नहीं है.

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