फाइल फोटो
- गोरखपुर की घटना के बाद सबक
- मेडिकल कॉलेजों और उच्च चिकित्सा संस्थानों को निर्देश
- गैस और दवा के भुगतान बकाया न रखने का निर्देश
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नई दिल्ली:
गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में 30 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद प्रदेश का चिकित्सा शिक्षा विभाग विशेष रूप से सतर्क हो गया है और उसने प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कालेजों और बडे़ चिकित्सा संस्थानों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि वह अपने अपने संस्थानों में किसी भी प्रकार की दवा और आक्सीजन की कमी न होने दें और यदि किसी गैस आपूर्तिकर्ता का कोई बकाया हो उसका भुगतान तुरंत किया जाए. अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा) अनीता भटनागर जैन ने बताया कि यह निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पहले भी सभी 21 संस्थानों को दिये गये थे लेकिन कल गोरखपुर के हादसे के बाद यह निर्देश एक बार फिर सभी संस्थानो के प्रमुखों को भेजे गये है.
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गौरतलब है कि कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारो को बताया था कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत आक्सीजन की कमी की वजह से नही हुई है. अपर मुख्य सचिव : जैन ने आज कहा कि गोरखपुर के हादसे के बाद हमने प्रदेश के नौ सरकारी मेडिकल कालेजो और 12 अन्य बडे चिकित्सीय संस्थानो के प्राचार्य और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को लिखित निर्देश दिये हैं कि वह यह सुनिश्चित करें कि उनके मेडिकल कालेज या चिकित्सीय संस्थान में दवा और आक्सीजन की कमी न होने पाये और यदि किसी गैस सप्लायर्स का कोई भी पैसा बाकी हो तो उसका भुगतान तुरंत कर दिया जायें. संस्थान में किसी भी तरह आक्सीजन की कमी न होने पाये और आक्सीजन का पर्याप्त स्टाक सुरक्षित रखा जाए.
Video : बच्चों की मौत की जिम्मेदार कौन
उत्तर प्रदेश में नौ सरकारी मेडिकल कालेज हैं . यह मेडिकल कालेज लखनऊ, कानपुर, आगरा, इलाहाबाद, मेरठ, झांसी, गोरखपुर, सैफेई और अंबेडकर नगर में है. इसके अलावा 12 बड़े चिकित्सीय संस्थान है जो राज्य सरकार के अन्तर्गत आते हैं.
इनपुट : भाषा
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गौरतलब है कि कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारो को बताया था कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत आक्सीजन की कमी की वजह से नही हुई है. अपर मुख्य सचिव : जैन ने आज कहा कि गोरखपुर के हादसे के बाद हमने प्रदेश के नौ सरकारी मेडिकल कालेजो और 12 अन्य बडे चिकित्सीय संस्थानो के प्राचार्य और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को लिखित निर्देश दिये हैं कि वह यह सुनिश्चित करें कि उनके मेडिकल कालेज या चिकित्सीय संस्थान में दवा और आक्सीजन की कमी न होने पाये और यदि किसी गैस सप्लायर्स का कोई भी पैसा बाकी हो तो उसका भुगतान तुरंत कर दिया जायें. संस्थान में किसी भी तरह आक्सीजन की कमी न होने पाये और आक्सीजन का पर्याप्त स्टाक सुरक्षित रखा जाए.
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उत्तर प्रदेश में नौ सरकारी मेडिकल कालेज हैं . यह मेडिकल कालेज लखनऊ, कानपुर, आगरा, इलाहाबाद, मेरठ, झांसी, गोरखपुर, सैफेई और अंबेडकर नगर में है. इसके अलावा 12 बड़े चिकित्सीय संस्थान है जो राज्य सरकार के अन्तर्गत आते हैं.
इनपुट : भाषा
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