- श्रमिक आंदोलन के बाद श्रम विभाग ने फैक्ट्रियों के ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की
- विभाग ने मजदूरों के बकाया वेतन न देने पर संबंधित ठेकेदारों पर पेनल्टी लगाकर नोटिस जारी किए हैं
- अपर श्रमायुक्त ने श्रम कानून उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है
Noida Labour Action: उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन के बाद श्रम विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है. विभाग ने 24 फैक्ट्रियों से जुड़े 203 संविदाकारों (ठेकेदारों) के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. साथ ही दोषी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी तेज कर दी गई है.
1.16 करोड़ की पेनल्टी, नोटिस जारी
मजदूरों के बकाया भुगतान को लेकर विभाग ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित ठेकेदारों पर करीब 1.16 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई है. भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सभी को नोटिस जारी किए गए हैं. विभाग का कहना है कि जिन ठेकेदारों के श्रमिक हिंसा में शामिल पाए गए हैं, उनकी भूमिका भी संदिग्ध मानकर जांच की जा रही है.
अपर श्रमायुक्त का सख्त संदेश
अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने साफ कहा कि श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. जरूरत पड़ने पर केस दर्ज कर कोर्ट में अभियोजन भी किया जाएगा. श्रम विभाग ने श्रमिकों को राहत देते हुए गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में मजदूरों की सैलरी में 21% बढ़ोतरी का ऐलान किया है. नई सैलरी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी. भुगतान 7 से 10 मई के बीच किया जाएगा. श्रम विभाग ने साफ कहा है कि समय पर वेतन न देने या कम भुगतान करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
नई गाइडलाइन: क्या-क्या बदला?
EPF और ESI के अलावा कोई कटौती नहीं
ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से
बोनस और ग्रेच्युटी देना अनिवार्य
प्रोटेस्ट टाइमलाइन: कैसे बढ़ा विवाद और क्या रहे बड़े घटनाक्रम
अप्रैल के पहले सप्ताह में हरियाणा गुरुग्राम के पास मानेसर से शुरू हुआ यह श्रमिकों का आंदोलन कुछ ही दिनों में नोएडा के औद्योगिक इलाकों तक फैल गया. 13 अप्रैल 2026 को हालात हिंसक हो गए, लेकिन प्रशासन और श्रम विभाग के हस्तक्षेप के बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में लाई गई. मजदूरों की वेतन असमानता और महंगाई इस पूरे विवाद की जड़ में रही.
3-6 अप्रैल: मानेसर से नोएडा तक फैला आंदोलन
मानेसर में होंडा मोटरसाइकिल समेत कई कंपनियों के ठेका मजदूरों ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल शुरू की. धीरे-धीरे यह विरोध नोएडा तक फैल गया और औद्योगिक क्षेत्रों में असंतोष बढ़ने लगा.
प्रदर्शन की बड़ी वजह क्या थी?
श्रमिकों का कहना था कि नोएडा में उन्हें करीब 435 रुपये प्रतिदिन मिल रहे हैं, जबकि गुरुग्राम (हरियाणा) में यही मजदूरी 585 रुपये प्रतिदिन है. महंगाई को देखते हुए मजदूर कम से कम 35% वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे.
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