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गाजीपुर के दर्जनों गांव में फैली रहस्यमयी बीमारी, 40 से 50 बच्चे हुए मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग!

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है. जिले के एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों में एक ऐसी 'रहस्यमयी बीमारी' ने दस्तक दी है, जिसने मासूमों के बचपन को दिव्यांगता की बेड़ियों में जकड़ दिया है.

गाजीपुर के दर्जनों गांव में फैली रहस्यमयी बीमारी, 40 से 50 बच्चे हुए मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग!
  • गाजीपुर के दर्जनों गांव में एक रहस्यमयी बीमारी से लगभग पचास बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग हो गए हैं
  • बच्चे जन्म के समय स्वस्थ होते हैं, कुछ महीनों, वर्षों के भीतर तेज बुखार आने के बाद उनकी हालत गंभीर हो जाती है
  • मानसिक और शारीरिक नियंत्रण खोने के कारण माता-पिता मजबूरन अपने बच्चों को जंजीरों और रस्सियों से बांधकर रखते हैं
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गाजीपुर (यूपी):

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है. जिले के एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों में एक ऐसी 'रहस्यमयी बीमारी' ने दस्तक दी है, जिसने मासूमों के बचपन को दिव्यांगता की बेड़ियों में जकड़ दिया है. अब तक करीब 40 से 50 बच्चे इस अज्ञात बीमारी के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से अपाहिज हो चुके हैं.

स्वस्थ जन्म, फिर अचानक 'बुखार' और सब खत्म

इन पीड़ित बच्चों की कहानी एक जैसी ही है. माता-पिता के अनुसार, बच्चे जन्म के समय बिल्कुल स्वस्थ होते हैं. लेकिन कुछ समय बीतने के बाद (किसी को 4 महीने, किसी को 2 साल तो किसी को 5 साल की उम्र में) अचानक तेज बुखार आता है. यह बुखार उतरते-उतरते बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह दिव्यांग बना देता है.

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जंजीरों और रस्सियों में कैद मासूमियत

हालात इतने बदतर हैं कि मानसिक संतुलन खो देने और शारीरिक नियंत्रण न रहने के कारण माता-पिता अपने ही बच्चों को रस्सियों और जंजीरों के सहारे बांधकर रखने को मजबूर हैं. हरिहरपुर गांव की सुभावती देवी बताती हैं कि उनकी दो बेटियां स्वस्थ थीं, लेकिन बुखार आने के बाद वे दिव्यांग हो गईं. अब उन्हें बांधकर रखना पड़ता है ताकि वे कहीं चली न जाएं. गायत्री देवी के अनुसार, उनकी बेटी 5 साल की उम्र में मस्तिष्क ज्वर (Brain Fever) का शिकार हुई, जिससे उसके हाथ-पैर टेढ़े हो गए. त्रिवेणी चौहान का कहना है कि जन्म के समय बच्चा काला पड़ गया था, जिसे डॉक्टरों ने 'गंदा पानी' पीने का असर बताया, लेकिन सालों बाद भी स्थिति जस की तस है.

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इन गांवों में फैला है खौफ

यह बीमारी जिले के इन प्रमुख गांवों में पैर पसार चुकी है. फतेहल्लाहपुर, बहादीपुर, हरिहरपुर हाला, शिकारपुर, छोटी जंगीपुर, पठानपुर, धारीकला और अगस्ता. लगभग हर गांव में 8 से 10 बच्चे इस स्थिति का सामना कर रहे हैं.

राज्यपाल का संज्ञान और प्रशासन की पहल

इस गंभीर मामले को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी सिद्धार्थ राय ने प्रमुखता से उठाया है. उन्होंने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर इस रहस्यमयी बीमारी से अवगत कराया. राज्यपाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी गाजीपुर को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं. जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने स्पष्ट किया है कि गांवों में मेडिकल टीमें भेजी जा रही हैं. विशेषज्ञ डॉक्टर बच्चों की जांच करेंगे ताकि बीमारी की जड़ का पता लगाया जा सके और समुचित इलाज शुरू हो सके.

आर्थिक तंगी और इलाज की मार

पीड़ित परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहद दयनीय है. कई पिता गुजरात या अन्य राज्यों में मजदूरी कर रहे हैं ताकि बच्चों के इलाज के लिए पैसे भेज सकें. लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह कौन सी बीमारी है.

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