'तारीख पर तारीख मिलती है पर न्याय नहीं मिलता है'. मुजफ्फरनगर में एक शख्स पर NDPS एक्ट में केस दर्ज होने के करीब 10 साल बाद तक न्याय के लिए इंतजार करना पड़ा. इसी मामले की सुनवाई करते हुए एडिशनल सेशन जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने मशहूर फिल्म 'दामिनी' का डायलॉग बोल आरोपी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया. कोर्ट ने आरोपी दोषमुक्त करते हुए कहा कि दस साल तक कोर्ट के चक्कर लगाना भी एक सजा है.
जज दिवाकर कुछ महीने पहले कई दोषियों को मौत की सजा सुनाकर चर्चा में आए थे. उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह की देरी की कल्पना नहीं की जा सकती है. जज दिवाकर ने फैसले के दौरान रिटायर हो चुके जिला जज के उनकी कोर्ट से 97 'पार्ट हर्ड' यानी आधे सुने गए मामलों को वापस लिए जाने का भी जिक्र किया. इन मामलों में सबूत और ट्रायल अभी भी खत्म होना बाकी है.
जज दिवाकर ने कहा कि जो मामले सुने जा रहे हैं अगर उस मामले में ट्रायल और सुनवाई शुरू हो गई हो. उन्होंने सीआरपीसी की 412 और बीएनएसएस के सेक्शन 452 का जिक्र किया. जिसमें इस तरह के आदेश को रिकॉर्ड करने की जरूरत होती है.
क्या था पूरा मामला
मुजफ्फरनगर के पटेल नगर इलाके के रहने वाले अशोक भारती के पास से 150 ग्राम चरस बरामद हुआ था. ये बरामदगी 21 अक्तूबर 2015 को हुई थी. मुजफ्फरनगर में इसका ट्रायल शुरू हुई. इसके बाद इस केस में कई तरह की पेचीदगियां आईं. इसमें गवाह के लगातार गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय रहा. जबकि ये बरामदगी पब्लिस प्लेस से हुई थी. एनडीपीएस मामले में गवाह का होना जरूरी होती है. आरोपी से बरामद सैंपल को कोर्ट में पेश नहीं किया गया. वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत में भी कमिया पाई गईं. कोर्ट ने बाद में पाया कि पुलिस ने जो रिकवरी दिखाई है उसमें भी मामला स्टूरियो टाइप जैसा था. केस 2015 में दर्ज किया गया था. इस मामले में चार्जशीट 2016 में फाइल की गई. अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप साबित करने में असफल होने के 10 साल बाद भारती को इस मामले से बरी किया गया.
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