- शिवपाल यादव ही सपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं : मुलायम
- 'रामगोपाल यादव सपा से छह साल के लिए निष्कासित हैं'
- चुनाव चिन्ह को लेकर मुलायम को सोमवार को चुनाव आयोग से मिलना है
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नई दिल्ली:
समाजवादी पार्टी में लगातार जारी नाटकीय घटनाक्रम के बीच अंदरूनी घमासान जारी है. रविवार शाम मुलायम सिंह यादव की ओर से अचानक बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस से लगा था कि कुछ नया होने जा रहा है और शायद मुलायम सिंह नरम पड़ जाएं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. मुलायम ने जोर देकर कहा, समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष मैं ही हूं और शिवपाल यादव यूपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, अखिलेश यादव मुख्यमंत्री हैं.
दिल्ली में अपने आवास पर पत्रकार वार्ता में मुलायम सिंह यादव ने साफ कर दिया कि उनका रुख अखिलेश गुट और खासतौर पर रामगोपाल यादव को लेकर नरम नहीं हुआ है.
मुलायम ने कहा कि रामगोपाल यादव जब समाजवादी पार्टी से निष्कासित थे तो ऐसे में उनकी पहल पर बुलाया गया अधिवेशन भी फर्जी है. उन्होंने कहा कि रामगोपाल यादव को 30 दिसंबर को पार्टी से निकाल दिया गया था, इसलिए उनके द्वारा 1 जनवरी को बुलाया गया राष्ट्रीय सम्मेलन, जिसमें अखिलेश को पार्टी प्रमुख बनाया गया, वह अवैध था.
(पढ़ें : चुनाव आयोग ने 17 जनवरी से पहले फैसला न लिया तो जब्त हो सकती है सपा की 'साइकिल')
इस बीच रामगोपाल यादव ने सपा के दोनों खेमों के बीच किसी सुलह की संभावना से इनकार किया है और कहा कि चार-छह लोगों ने नेताजी को गुमराह किया कि उन्हें 200 विधायकों का समर्थन हासिल है. उनके रुख का अब पर्दाफाश हो गया है.
बैठक से पहले मुलायम ने कुछ कार्यकार्ताओं को संबोधित किया. इस दौरान मुलायम सिंह के साथ अमर सिंह भी मौज़ूद थे. गौरतलब है कि चुनाव चिन्ह को लेकर मुलायम सिंह यादव को सोमवार को चुनाव आयोग से मिलना है.
अखिलेश गुट ने शनिवार को ही विधायकों, विधान पार्षदों, सांसदों और प्रतिनिधियों के समर्थन का हलफ़नामा जमा करा दिया था.
(पढ़ें : सपा के सिंबल पर संघर्ष - अखिलेश खेमे ने छह बक्सों में चुनाव आयोग को सौंपे दस्तावेज)
इससे पहले लखनऊ में मुलायम ने सुलह के सवाल पर कहा कि जब विवाद ही नहीं तो समझौता कैसा. सुबह मुलायम सिंह यादव लखनऊ में सपा के दफ़्तर पहुंचे, जहां वो राष्ट्रीय अध्यक्ष के कमरे में बैठे थे.
दिल्ली में अपने आवास पर पत्रकार वार्ता में मुलायम सिंह यादव ने साफ कर दिया कि उनका रुख अखिलेश गुट और खासतौर पर रामगोपाल यादव को लेकर नरम नहीं हुआ है.
मुलायम ने कहा कि रामगोपाल यादव जब समाजवादी पार्टी से निष्कासित थे तो ऐसे में उनकी पहल पर बुलाया गया अधिवेशन भी फर्जी है. उन्होंने कहा कि रामगोपाल यादव को 30 दिसंबर को पार्टी से निकाल दिया गया था, इसलिए उनके द्वारा 1 जनवरी को बुलाया गया राष्ट्रीय सम्मेलन, जिसमें अखिलेश को पार्टी प्रमुख बनाया गया, वह अवैध था.
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इस बीच रामगोपाल यादव ने सपा के दोनों खेमों के बीच किसी सुलह की संभावना से इनकार किया है और कहा कि चार-छह लोगों ने नेताजी को गुमराह किया कि उन्हें 200 विधायकों का समर्थन हासिल है. उनके रुख का अब पर्दाफाश हो गया है.
बैठक से पहले मुलायम ने कुछ कार्यकार्ताओं को संबोधित किया. इस दौरान मुलायम सिंह के साथ अमर सिंह भी मौज़ूद थे. गौरतलब है कि चुनाव चिन्ह को लेकर मुलायम सिंह यादव को सोमवार को चुनाव आयोग से मिलना है.
अखिलेश गुट ने शनिवार को ही विधायकों, विधान पार्षदों, सांसदों और प्रतिनिधियों के समर्थन का हलफ़नामा जमा करा दिया था.
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इससे पहले लखनऊ में मुलायम ने सुलह के सवाल पर कहा कि जब विवाद ही नहीं तो समझौता कैसा. सुबह मुलायम सिंह यादव लखनऊ में सपा के दफ़्तर पहुंचे, जहां वो राष्ट्रीय अध्यक्ष के कमरे में बैठे थे.
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