उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने बीते दिनों साफ कर दिया कि पार्टी के सभी बड़े फैसले वो खुद लेती हैं. मायावती ने आकाश आनंद को लेकर चल रहे अटकलों पर भी विराम लगा दिया. उन्होंने कहा कि पार्टी के उम्मीदवारों का चयन और टिकट वितरण वह खुद करती हैं.
दरअसल, कहा जा रहा था कि आकाश आनंद ही बसपा का सारे फैसले रहे थे और टिकट का जिम्मा भी उनके हाथ में ही था. लेकिन मायावती ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है और एक बार फिर से आकाश आनंद को उनका राजनीतिक कद बता दिया है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब मायावती अपने भतीजे को पार्टी के फैसलों से दूर कर रहीं हों. अतीत में छह ऐसे मौके आए जब उन्हें आकाश आनंद को राजनीतिक तौर पर खुद से या पार्टी से दूर करना पड़ा.
कब-कब आए ऐसे मौके?
31 जुलाई 2026- मायावती ने सोशल मीडिया एक्स पर साफ किया कि पार्टी के सभी बड़े फैसले वह खुद लेते हैं. राज्य स्तरीय बैठकों और पार्टी पदाधिकारियों के नाम वह खुद तय करती हैं. मायावती ने कहा है कि आकाश आनंद का कद बढ़ाने या कम करने जैसा कुछ नहीं है. पार्टी उम्मीदवार तय करने में भी उनकी कोई भूमिका नहीं है.
- 13 अप्रैल 2025- मायावती ने आकाश आनंद को एक और मौका देने का निर्णय लिया, क्योंकि उन्होंने अपनी गलतियां मानीं, सीनियर लोगों का सम्मान किया और ससुर के प्रभाव में न आने का संकल्प लिया.
- 2 मार्च, 2025- बीएसपी ने आकाश आनंद को पार्टी के सभी पदों और BSP उत्तराधिकारी से हटाया
- 23 जून, 2024- जून में आकाश आनंद को फिर से राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त किया गया.
- 7 मई, 2024 - मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया, कहा कि उन्हें "परिपक्वता" की आवश्यकता है.
- 10 दिसंबर, 2023- मायावती ने उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक/नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया और अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया.
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