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लखनऊ में बनेगी देश की पहली नाइट सफारी, कुकरैल के 5 हजार हेक्टेयर के जंगल में रोमांच का सफर, 1500 करोड़ खर्च

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार को लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षी ‘नाइट सफारी और प्राणि उद्यान परियोजना’ को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है.

लखनऊ में बनेगी देश की पहली नाइट सफारी, कुकरैल के 5 हजार हेक्टेयर के जंगल में रोमांच का सफर, 1500 करोड़ खर्च
कुकरैल नाइट सफारी योगी सरकारी की महत्‍वकांक्षी पर‍ियोजनाओं में से एक है.
  • 5000 हेक्टेयर में फैले कुकरैल वन क्षेत्र में बनेगी नाइट सफारी
  • इंटरनेशनल टूर‍िस्‍ट स्‍पॉट बनने जा रहा लखनऊ
  • भारत की पहली 'नाइट सफारी' होगी कुकरैल नाइट सफारी

Kukrail Night Safari: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अब इंटरनेशनल टूर‍िस्‍ट स्‍पॉट बनने जा रहा है. इसकी वजह यहां पर बनने वाली नाइट सफारी है. यह भारत की पहली शहरी 'नाइट सफारी' है, जो 5000 हेक्टेयर में फैले कुकरैल वन क्षेत्र में बनेगी. इस पर करीब 1500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.

कुकरैल नाइट सफारी योगी सरकारी की महत्‍वकांक्षी पर‍ियोजनाओं में से एक है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी महत्वाकांक्षी ‘नाइट सफारी और प्राणि उद्यान परियोजना' को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. नाइट सफारी के बनने से लखनऊ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्‍शे पर आ जाएगा. 

क्या है Kukrail Night Safari Project?

कुकरैल नाइट सफारी परियोजना लखनऊ के कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट में विकसित की जा रही है. यह भारत की पहली नाइट सफारी होगी, जहां पर्यटक रात में सक्रिय (Nocturnal) वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक व्यवहार के अनुरूप वातावरण में देख सकेंगे.

पारंपरिक चिड़ियाघरों के विपरीत यहां जानवरों को इस तरह के बड़े प्राकृतिक एनक्लोजर में रखा जाएगा कि वे अपने सामान्य व्यवहार के साथ रह सकें, जबकि पर्यटक सुरक्षित ट्राम या इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से उनका अवलोकन करेंगे…यह परियोजना कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट में विकसित की जा रही है, जो इंदिरानगर और कुर्सी रोड क्षेत्र के बीच स्थित है. हजरतगंज से इसकी दूरी करीब 10 किलोमीटर है. 

कुकरैल पहले से ही घड़ियाल संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के लिए प्रसिद्ध है. यहां घने जंगल, प्राकृतिक जल स्रोत और पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियां मौजूद हैं. इसी वजह से इसे नाइट सफारी के लिए उपयुक्त माना गया. 

क्या-क्या होगा खास?

परियोजना को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा. इसमें प्रस्तावित सुविधाएं है...

  • भारत की पहली Night Safari
  • आधुनिक Zoological Park
  • Day Zoo और Night Zoo का अलग अनुभव
  • रात्रिचर वन्यजीवों के विशेष एनक्लोजर
  • सफारी ट्राम एवं बैटरी चालित वाहन
  • इंटरप्रिटेशन सेंटर
  • नेचर एजुकेशन सेंटर
  • बच्चों के लिए इंटरैक्टिव लर्निंग जोन
  • फूड कोर्ट और कैफेटेरिया
  • ई-टिकटिंग व्यवस्था
  • पार्किंग
  • आधुनिक सुरक्षा प्रणाली
  • हरित लैंडस्केपिंग
  • पर्यावरण अनुकूल निर्माण

Delhi Zoo से कैसे अलग होगी?

दिल्ली का राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (Delhi Zoo) एक पारंपरिक चिड़ियाघर है, जहां पर्यटक दिन में पैदल घूमकर जानवरों को देखते हैं.

वहीं, कुकरैल नाइट सफारी पूरी तरह अलग अवधारणा पर आधारित होगी। यहां मुख्य आकर्षण रात में सक्रिय वन्यजीव होंगे. पर्यटक विशेष सफारी ट्राम या इलेक्ट्रिक वाहनों से जंगल जैसे वातावरण में भ्रमण करेंगे। यहां अनुभव किसी सामान्य जू की तरह नहीं बल्कि वास्तविक सफारी जैसा होगा. 

कब शुरू होगी?

सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद अब सरकार पर्यावरण और वन संबंधी शेष औपचारिकताएं पूरी करेगी. इसके बाद निर्माण कार्य तेज किया जाएगा. फिलहाल सरकार ने उद्घाटन की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है. 

क्यों हुआ था विवाद?

इस परियोजना का कुछ पर्यावरणविदों ने विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट की जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी पर असर पड़ सकता है. वहीं, राज्य सरकार का तर्क था कि परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जंगल और वन्यजीवों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे तथा संरक्षण और पर्यटन दोनों को साथ लेकर चला जा सके. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद परियोजना को सशर्त मंजूरी देते हुए पर्यावरणीय नियमों के सख्त पालन का निर्देश दिया. 

उत्तर प्रदेश को क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद लखनऊ देश और विदेश के पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा. इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उत्तर प्रदेश को वाइल्डलाइफ टूरिज्म के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी. साथ ही पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. देश की पहली नाइट सफारी बनने जा रही यह परियोजना उत्तर प्रदेश के पर्यटन इतिहास की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कुकरैल नाइट सफारी एवं जूलॉजिकल पार्क परियोजना को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को लखनऊ के कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट में देश की पहली नाइट सफारी विकसित करने की अनुमति दे दी. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA), केंद्रीय सशक्त समिति (CEC), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और अन्य वैधानिक शर्तों का पूरी तरह पालन करना होगा.

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के साथ ही लंबे समय से चर्चा में रही इस परियोजना का रास्ता साफ हो गया है. राज्य सरकार का दावा है कि यह सिर्फ एक पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहल होगी.

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