- 5000 हेक्टेयर में फैले कुकरैल वन क्षेत्र में बनेगी नाइट सफारी
- इंटरनेशनल टूरिस्ट स्पॉट बनने जा रहा लखनऊ
- भारत की पहली 'नाइट सफारी' होगी कुकरैल नाइट सफारी
Kukrail Night Safari: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अब इंटरनेशनल टूरिस्ट स्पॉट बनने जा रहा है. इसकी वजह यहां पर बनने वाली नाइट सफारी है. यह भारत की पहली शहरी 'नाइट सफारी' है, जो 5000 हेक्टेयर में फैले कुकरैल वन क्षेत्र में बनेगी. इस पर करीब 1500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.
कुकरैल नाइट सफारी योगी सरकारी की महत्वकांक्षी परियोजनाओं में से एक है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी महत्वाकांक्षी ‘नाइट सफारी और प्राणि उद्यान परियोजना' को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. नाइट सफारी के बनने से लखनऊ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर आ जाएगा.
गुफा के आकार का होगा नाइट सफारी
नाइट सफारी को बेहद खास लुक दिया जाएगा. मॉडल के मुताबिक, नाइट सफारी का मेन गेट गुफा के आकार का होगा, जिसे लकड़ी और पत्थर के जरिए नेचुरल लुक दिया जाएगा. मेन गेट पर ही वन्यजीवों के चित्र उकेरे जाएंगे. आर्टिफिशियल वॉटरफॉल के बीच बैठकर लोग खुद को रोमांचित महसूस करेंगे.
200 वाहन हो सकेंगे एक साथ पार्क, खाने-पीने का होगा इंतजाम
मेन गेट से एंट्री करते ही एक किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाई जाएगी. करीब 200 वाहन एक साथ यहां पार्क हो सकेंगे. एक बार मेन गेट से अंदर जाने के बाद टूरिस्ट को दिन और रात में अंतर नहीं समझ आएगा. सफारी के अंदर ही खाने-पीने का इंतजाम होगा. रेस्टोरेंट्स के साथ कई अन्य सुविधाएं पर्यटकों को लग्जरी फील देंगे.
500 से 1000 रुपए तक हो सकता है टिकट
टिकट की बात करें तो नाइट सफारी का लुत्फ उठाने के लिए पर्यटकों को 500 से 1000 रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाइट सफारी में एक बार करीब 8000 पर्यटक आ सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी
बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार को लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षी ‘नाइट सफारी और प्राणि उद्यान परियोजना' को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने इस परियोजना से पूरे वन क्षेत्र के प्रभावित होने की दलील खारिज करते हुए कहा, ‘‘क्या यह देश हमेशा ठहराव की स्थिति में रहे? चिड़ियाघर अब पुराने हो गए हैं. इन सब चीजों को देखने के लिए विशेषज्ञ मौजूद हैं.''
खंडपीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल हैं. उसने कहा, ‘‘जांच-पड़ताल के बाद और शर्तें तय करके और उनका अनुपालन सुनिश्चित करते हुए, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की मदद से सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं.''
खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह परियोजना के लिए केंद्र से जरूरी मंजूरी लेने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्टकी बनाई उच्चाधिकार समिति (सीईसी), केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की शर्तों का सख्ती से पालन करे.
कोर्ट सीईसी को दिया ये निर्देश
शीर्ष अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि सीईसी ने कुकरैल ‘नाइट सफारी' परियोजना को मंजूरी दे दी है. पीठ ने सीईसी को निर्देश दिया कि वह मौके पर जाकर देखे कि क्या संबंधित प्रशासन शर्तों का पालन कर रहा है और तीन महीने बाद रिपोर्ट पेश करे. CJI ने कुछ याचिकाकर्ताओं को परियोजना के संबंध में सीईसी को अपने सुझाव देने की अनुमति दी।
दो चरणों में बंटी यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत की पहली शहरी ‘नाइट सफारी' है, जो 5,000 हेक्टेयर में फैले कुकरैल वन क्षेत्र में बनेगी और इस पर लगभग 1,500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. मंजूरी देते समय सीईसी ने (72 एकड़ में फैले) लखनऊ चिड़ियाघर को कुकरैल में स्थानांतरित करने के सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. सीईसी ने सरकार से इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए कहा कि वह जंगल से गुजरने वाली मौजूदा सड़क को चार-लेन वाले कॉरिडोर के बजाय दो-लेन वाले रास्ते में बदले.
‘एडवेंचर जोन' की योजना में मूल रूप से ट्राम सेवा, अंधेरा होने के बाद जंगल का अनुभव, कई तरह की रोमांचक गतिविधियां और ‘ऑग्मेंटेड रियल्टी' (एआर) आधारित थिएटर शामिल थे, लेकिन उसे अब रद्द कर दिया गया है.
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