- किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने परिसर में स्थित छह मजारों को वैधता स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी किया था.
- निर्धारित समय सीमा तक केवल एक मजार की ओर से जवाब मिला है, बाकी पांच मजारों को फाइनल नोटिस भेजा जाएगा.
- फाइनल नोटिस के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण के लिए पंद्रह दिन की समय सीमा निर्धारित की है.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मजारों को हटाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले में KGMU प्रशासन ने 6 मजारों को नोटिस जारी किया था, लेकिन तय समय सीमा में केवल एक ही मजार की ओर से जवाब दाखिल किया गया है. ऐसे में नोटिस का जवाब नहीं देने वाली मजारों को प्रशासन की ओर से जल्द ही फाइनल नोटिस भेजा जाएगा. इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी.
KGMU प्रशासन ने परिसर के भीतर स्थित कुल 6 मजारों को उनकी वैधता स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी किया था. हालांकि निर्धारित समय सीमा के भीतर इनमें से केवल एक मजार की ओर से जवाब दाखिल किया गया है.
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5 मजारों को दिया जाएगा फाइनल नोटिस
अब प्रशासन ने निर्णय लिया है कि जिस मजार ने जवाब दिया है, उसके प्रतिनिधियों को 'पर्सनल अपीरियंस' (व्यक्तिगत उपस्थिति) के लिए बुलाया जाएगा, जिससे वे अपना स्पष्टीकरण दे सकें. वहीं, शेष 5 मजारों को अब सीधे फाइनल नोटिस भेजा जाएगा.
15 दिन बाद होगी ध्वस्तीकरण कार्रवाई
KGMU प्रशासन के मुताबिक, फाइनल नोटिस के बाद प्रशासन ने 15 दिनों का समय तय किया गया है. यदि इस अवधि में कोई ठोस साक्ष्य या संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी.
8 में से 6 मजारों को जारी किया है नोटिस
लखनऊ केजीएमयू में कुल आठ मजारें/दरगाहें हैं. इनमें से छह को केजीएमयू ने अवैध बताया और नोटिस जारी किया था. केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि शाहमीना की मजार और हरमैन शाह की दरगाह को नोटिस नहीं दिया गया है. इनके अलावा जो छह अन्य मजारें हैं, नोटिस उनके लिए है.
KGMU के नोटिस को कोर्ट में दी जाएगी चुनौती!
हालांकि केजीएमयू प्रशासन के दावों को मजारों से जुड़े लोग खारिज कर रहे हैं. शाहमीना की मजार के व्यवस्थापक नासिर मिनाई ने कहा कि मजारों को दिया नोटिस अवैध है. मजारों/दरगाहों के बाकायदा नजूल में दर्ज कागजात हैं. ऐसे में इन कागजों के आधार पर केजीएमयू के नोटिस को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.
22 जनवरी को जारी किया गया था नोटिस
छह मजारों को 22 जनवरी को नोटिस देकर 15 दिन में मजारों को ध्वस्त करने के लिए कहा गया था. साथ ही नोटिस में कहा गया कि नोटिस अवधि पूरी होने के बाद अगर प्रशासन ने इसे हटाया तो हटाने का सारा खर्च मजार संचालकों से वसूला जाएगा.
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