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This Article is From Nov 10, 2016

कानपुर : छोटे नोटों की कमी से चमड़ा उद्योग के 50 हजार मजदूरों का वेतन रुका

कानपुर : छोटे नोटों की कमी से चमड़ा उद्योग के 50 हजार मजदूरों का वेतन रुका
प्रतीकात्मक फोटो।
  • कर्मचारी और श्रमिक 500 व 1000 के नोट लेने को तैयार नहीं
  • वेतन न मिलने से मजदूरों के परिवारों में खाने के लाले पड़े
  • टेनरियों के बाहर भीड़, कर्मचारियों ने काम नहीं किया
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कानपुर: औद्योगिक शहर कानपुर के प्रमुख चमड़ा उद्योग के करीब 50 हजार कर्मचारियों मजदूरों को वेतन के लाले पड़ गए हैं क्योंकि टेनरी मालिकों के पास नए नोट नहीं हैं और कर्मचारी पुराने 500 और 1000 के नोट लेने को तैयार नहीं हैं. आज भी शहर की कई टेनरी के कर्मचारियों ने वेतन के लिए टेनरियों के बाहर भीड़ लगाए रखी और कर्मचारियों ने काम नहीं किया.

शहर के जाजमउ इलाके में करीब चार सौ टेनरियां हैं जहां करीब 50 हजार मजदूर कर्मचारी काम करते हैं. टेनरियों में वेतन तारीख महीने की नौ से दस तारीख होती है. लेकिन अचानक आठ नवंबर को पांच सौ हजार के नोट बंद हो जाने से टेनरी मालिकों के सामने संकट खड़ा हो गया है कि वे इतने कर्मचारियों को नकदी में कहां से वेतन बांटें क्योंकि कर्मचारी 500 और 1000 के नोट लेने से मना कर रहे हैं.

तलत लेदर इंडस्ट्रीज के मालिक आसिफ खान ने आज बताया कि आज हमारी टेनरी के कार्यालय के सामने सैकड़ों मजदूर वेतन लेने के लिए खड़े हैं लेकिन हम उन्हें वेतन नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि हमारे पास नए नोट ही नहीं हैं. बैंक से भी दस हजार रूपए से अधिक नहीं निकल पा रहे हैं. इसलिए कर्मचारियों को वेतन दे पा रहे हैं. जब वेतन नहीं दे पा रहे हैं तो मजदूर काम नहीं कर रहे हैं और काम बंद पड़ा है.

सुपर टेनरी के निदेशक इमरान सिद्दीकी ने बताया कि उनकी टेनरी में भी काम नहीं हो पा रहा है क्योंकि मजदूर आफिस का घेराव किए खड़े हैं और पिछले महीने के वेतन की मांग कर रहे हैं. अब हमारे पास पांच सौ, हजार के नोट हैं जो कर्मचारी लेने को तैयार नहीं हैं. अब कर्मचारियों मजदूरों को यह दिलासा दिया है कि टेनरी के एकाउंटेंट को बैंक भेजा है वह जैसे ही पैसे लेकर आता है वेतन दे दिया जाएगा लेकिन हम सच्चाई जानते हैं कि बैंक से दस हजार रूपये से ज्यादा नहीं मिलेगा जिससे हम अपने 120 मजदूरों, कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पाएंगे .

कमोबेश ऐसा ही आलम पूरे जाजमउ इलाके में है जहां टेनरी कर्मचारी मजदूर अपनी अपनी टेनरी के सामने वेतन मिलने की आस में खड़े हैं. चार पांच हजार रूपये प्रति माह कमाने वाले मजदूर इसी वेतन से अपने परिवार का पेट भरते हैं.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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