- कानपुर के किडनी ट्रांसप्लांट कांड में फरार आरोपियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है.
- वीडियो में डॉ. अफजल और परवेज सैफई नोटों की गड्डियों के साथ नजर आ रहे हैं, जो अवैध कमाई का सबूत माना जा रहा है.
- पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेकर जांच तेज कर दी है और इसे गिरोह की सक्रियता का अहम सुराग माना है.
Kanpur Kidney Scandal Viral Video: कानपुर के चर्चित किडनी ट्रांसप्लांट कांड में फरार चल रहे आरोपियों को लेकर एक बार फिर सनसनी फैल गई है. इस बार मामला एक वायरल वीडियो का है, जिसमें इस गिरोह के मुख्य सूत्रधार बताए जा रहे डॉ. अफजल और उसका साथी परवेज सैफई नोटों की गड्डियों के साथ खेलते नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है.
नोटों की गड्डियों के साथ वीडियो वायरल
दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में डॉ. अफजल और परवेज सैफई एक बिस्तर पर बैठे दिखाई दे रहे हैं. दोनों 500-500 रुपये के नोटों की मोटी गड्डियों के साथ मस्ती करते नजर आ रहे हैं. पुलिस को शक है कि यह रकम अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के जरिए ही कमाई गई थी. हालांकि, यह वीडियो कब का है, इसे लेकर अभी साफ जानकारी सामने नहीं आई है.
पुलिस ने लिया वीडियो का संज्ञान
वीडियो सामने आने के बाद डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने मामले का संज्ञान लिया है. उनके निर्देश पर पुलिस ने जांच तेज कर दी है. कासिम आबिदी के मुताबिक, यह वीडियो गिरोह की गतिविधियों और अवैध कमाई की ओर इशारा करता है. पुलिस इसे अहम सुराग मानकर आगे की कार्रवाई कर रही है.
500 के नोटों की गड्डियों के साथ दिखे कानपुर किडनी कांड के फरार आरोपी का सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है. आरोपी की तलाश में कई जिलों में लगातार दबिश दी जा रही है#Kanpur pic.twitter.com/bl1lp3c3Xf
— NDTV India (@ndtvindia) April 6, 2026
लॉजिस्टिक व्यवस्था संभालता था परवेज सैफई
पुलिस जांच में सामने आया है कि डॉ. अफजल और परवेज सैफई इस गिरोह की अहम कड़ी थे. दोनों पर आरोप है कि वह मेरठ के डॉक्टर रोहित और उनकी सर्जिकल टीम को कानपुर लाने-ले जाने की पूरी व्यवस्था देखते थे. गाड़ियों की बुकिंग से लेकर ठहरने तक का इंतजाम इसी नेटवर्क के जरिए किया जाता था. मेरठ का अंकित नाम का युवक इस काम में मदद करता था.
जांच में यह भी पता चला है कि परवेज सैफई ने अपनी गाड़ी से डॉक्टर रोहित की टीम को कम से कम तीन बार कानपुर पहुंचाया था. पुलिस का दावा है कि इस काले कारोबार में उसकी बराबर की हिस्सेदारी थी और वह हर ट्रांसप्लांट के बदले मोटी रकम लेता था.
30 मार्च को हुआ था किडनी ट्रांसप्लांट कांड भंडाफोड़
किडनी ट्रांसप्लांट के इस अवैध नेटवर्क का खुलासा 30 मार्च को हुआ था. केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में मेरठ की रहने वाली पारुल तोमर का गैरकानूनी तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था. इस मामले में बिहार के बेगूसराय के आयुष नामक युवक को बहला-फुसलाकर उसकी किडनी निकाली गई थी.
अब तक 8 आरोपी भेजे गए जेल
पुलिस इस मामले में अब तक आहूजा अस्पताल के संचालक, IMA की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति सुरजीत आहूजा समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. हालांकि, इस रैकेट के असली मास्टरमाइंड अभी भी फरार हैं. पुलिस मेरठ के डॉ. रोहित, डॉ. अली, डॉ. अफजल, डॉ. वैभव मुद्गल और प्रयागराज के नवीन पांडेय की तलाश में लगातार दबिश दे रही है. कानपुर पुलिस की टीमें मेरठ, गाजियाबाद, उन्नाव, जालौन और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं.
यह एक संगठित और शातिर गिरोह- डीसीपी
डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि फरार आरोपियों के ठिकानों से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं. उनके अनुसार, यह एक संगठित और शातिर गिरोह है, जो योजनाबद्ध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का अवैध कारोबार कर रहा था. फिलहाल 6 से 7 आरोपी अभी भी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए कई पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं.
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