गुलेल में पत्थर की जगह गेंदे का फूल रखकर वार किया जाता है
- आगरा की यमुना नदी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है.
- रोज शाम को अंधेरा होते ही लोग शौच के लिये नदी किनारे आ जाते हैं.
- अब गंदगी करने वालों की तादाद में भारी कमी आई है.
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आगरा:
कहावत है भय बिना प्रीत नहीं होती, आगरा में यमुना नदी को बचाने के लिये जुटे समाजसेवियों ने भी इसी कहावत को अपनाते हुए तट पर गंदगी फैलाने वालों को सुधारने के लिए अजब तरीका ढूंढा है. अभियान में जुटे वॉलंटियर्स गंदगी फैलाने वालों पर गुलेल से वार करते हैं. हालांकि, गुलेल में पत्थर नहीं बल्कि उसकी जगह गेंदे का फूल रखकर वार किया जाता है. एक सप्ताह पहले शुरू की गई इस अनोखी पहल ने अपना असर भी दिखाना शुरू कर दिया है और यमुना तट पर अब गंदगी करने वालों की तादाद में भारी कमी आई है.
रिवर कनेक्ट अभियान के संयोजक समाजसेवी ब्रज खंडेलवाल ने बताया कि आगरा की लाइफलाइन मानी जाने वाली यमुना नदी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है. भीषण गंदगी और उपेक्षा के चलते शहरवासी यमुना नदी को भूलने लगे थे. इसी को देखते हुए यमुना को बचाने का यह अभियान शुरू किया गया है.
यह भी पढ़ें : अब यमुना किनारे शौच किया तो खैर नहीं, ये हैं NGT के नए आदेश
उन्होंने बताया कि लोगों को यमुना नदी से जोडने के लिए उन लोगों ने एत्माद्दौला व्यू प्वाइंट पर रोजाना आरती शुरू करवाई. लेकिन, गंदगी फैलाने वाले मानने को तैयार नहीं थे. उन्होंने बताया कि रोजाना शाम को अंधेरा होते ही लोग शौच के लिये नदी किनारे आ जाते और गंदगी फैलाते. जिससे आरती में पहुंचने वालों को भारी दिक्कत होती थी.

गंदगी फैलाने वालों को सुधारने के लिये उन लोगों ने माला पहनाना शुरू किया. पर, इसका कोई खास असर नहीं हुआ. आखिरकार, एक सप्ताह पहले अभियान से जुड़े लोगों ने एक दर्जन गुलेल मंगवाई और गंदगी फैलाने के लिये नदी किनारे पहुंचने वालों पर इससे 'वार' शुरू किया. अब अभियान से जुड़े वॉलंटियर्स अंधेरा होने से पहले ही नदी के तट पर तैनात हो जाते हैं और किसी को भी गंदगी फैलाते देखते ही उस पर 'हमला' बोल दिया जाता है. हालांकि, गुलेल में पत्थर की जगह गेंदे के फूल से वार किया जाता है, ताकि किसी को चोट न लगे.
VIDEO : वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल से यमुना को भारी नुकसान
अभियान में जुटे लोगों के इस अजब-गजब तरीके से गंदगी फैलाने वालों के दिल में खौफ बैठ गया है और अब तट पर गंदगी फैलाने के लिए आने वाले लोगों की तादाद में भारी कमी देखी जा रही है.
रिवर कनेक्ट अभियान के संयोजक समाजसेवी ब्रज खंडेलवाल ने बताया कि आगरा की लाइफलाइन मानी जाने वाली यमुना नदी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है. भीषण गंदगी और उपेक्षा के चलते शहरवासी यमुना नदी को भूलने लगे थे. इसी को देखते हुए यमुना को बचाने का यह अभियान शुरू किया गया है.
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उन्होंने बताया कि लोगों को यमुना नदी से जोडने के लिए उन लोगों ने एत्माद्दौला व्यू प्वाइंट पर रोजाना आरती शुरू करवाई. लेकिन, गंदगी फैलाने वाले मानने को तैयार नहीं थे. उन्होंने बताया कि रोजाना शाम को अंधेरा होते ही लोग शौच के लिये नदी किनारे आ जाते और गंदगी फैलाते. जिससे आरती में पहुंचने वालों को भारी दिक्कत होती थी.

गंदगी फैलाने वालों को सुधारने के लिये उन लोगों ने माला पहनाना शुरू किया. पर, इसका कोई खास असर नहीं हुआ. आखिरकार, एक सप्ताह पहले अभियान से जुड़े लोगों ने एक दर्जन गुलेल मंगवाई और गंदगी फैलाने के लिये नदी किनारे पहुंचने वालों पर इससे 'वार' शुरू किया. अब अभियान से जुड़े वॉलंटियर्स अंधेरा होने से पहले ही नदी के तट पर तैनात हो जाते हैं और किसी को भी गंदगी फैलाते देखते ही उस पर 'हमला' बोल दिया जाता है. हालांकि, गुलेल में पत्थर की जगह गेंदे के फूल से वार किया जाता है, ताकि किसी को चोट न लगे.
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अभियान में जुटे लोगों के इस अजब-गजब तरीके से गंदगी फैलाने वालों के दिल में खौफ बैठ गया है और अब तट पर गंदगी फैलाने के लिए आने वाले लोगों की तादाद में भारी कमी देखी जा रही है.
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