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क‍िसान का बेटा सौरभ भारतीय सेना में बना लेफ्टिनेंट, पहली बार पहुंचे गांव, माता-पिता का भी हुआ सम्‍मान

सौरभ सिंह ने वर्ष 2022 में इंटरमीडिएट के दौरान ही पहले प्रयास में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय थल सेना के लिए चयन हासिल किया था. उस समय उनकी उम्र मात्र 17 वर्ष थी.

क‍िसान का बेटा सौरभ भारतीय सेना में बना लेफ्टिनेंट, पहली बार पहुंचे गांव, माता-पिता का भी हुआ सम्‍मान
बेटे की उपलब्‍धि से बेहद खुश हैं माता-प‍िता.
  • भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने सौरभ सिंह पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचे.
  • मीणों ने फूल-मालाओं और जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया.
  • पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल.

गाजीपुर के जमानियां क्षेत्र के पटकनियां गांव के लिए रविवार (28 जून) का दिन गर्व का पल बन गया. भारतीय सैन्य अकादमी यानी IMA से पास आउट होकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने सौरभ सिंह पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया. इस दौरान उनके माता-पिता का भी सम्मान किया गया. 

जमानियां क्षेत्र के पटकनियां गांव निवासी सौरभ सिंह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार अपने गांव पहुंचे. गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर उनके पिता दिग्विजय सिंह और माता सविता सिंह का भी सम्मान किया गया. पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला. 

साधारण क‍िसान पर‍िवार से आते हैं सौरभ स‍िंह

सौरभ सिंह ने वर्ष 2022 में इंटरमीडिएट के दौरान ही पहले प्रयास में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय थल सेना के लिए चयन हासिल किया था. उस समय उनकी उम्र मात्र 17 वर्ष थी. उनकी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित सैनिक स्कूल से हुई, जबकि हाईस्कूल में उन्होंने 92.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. सौरभ एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता दिग्विजय सिंह किसान हैं और माता सविता सिंह गृहिणी हैं. 

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चार सालों की कठिन और अनुशासित सैन्य ट्रेनिंग के बाद भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त हुआ 

गांव पहुंचने पर सौरभ सिंह ने परिवार और ग्रामीणों के साथ आईएमए की पासिंग आउट परेड के अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि 13 जून को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड की मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु थीं. चार वर्षों की कठिन और अनुशासित सैन्य ट्रेनिंग के बाद उन्हें भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त हुआ है. 

प‍िता ने कहा- बेटे ने बचपन का सपना क‍िया पूरा

सौरभ के पिता दुर्गविजय सिंह ने कहा, ''मेरे बेटे के इस सफलता से बेहद खुशी मिली है, बचपन से ही उसका सपना था फौज में जाने का जो आज पूरा हुआ है.'' दादा रामदुलार सिंह ने बताया क‍ि सौरभ बचपन से ही होनहार रहा है, उसकी सफलता से पूरा परिवार और पूरा क्षेत्र खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है. 

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