- यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले ही सुपर एक्टिव हुए अखिलेश यादव
- चुनाव की घोषणा से पहले ही सपा अपने कैंडिडेट उतारने की तैयारी में जुटी
- उत्तर प्रदेश में 2027 के शुरुआत में होंगे विधानसभा चुनाव
यूपी में विधानसभा चुनाव में लगभग 8 महीने बचे हैं. मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ने चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में विधानसभावार समीक्षा और संभावित प्रत्याशियों को तैयारी में जुटने के संकेत देने शुरू कर दिए हैं. संभव है कि सपा चुनावों की घोषणा से दो से तीन महीने पहले से प्रत्याशियों के नामों का ऐलान भी शुरू कर दे. पार्टी का मानना है कि जल्दी टिकट घोषित करने से प्रत्याशियों को तैयारी का भी समय मिलेगा और चुनाव से ऐन पहले होने वाली बगावत भी कम होगी.
एक-एक प्रत्याशी पर माथापच्ची
समाजवादी पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिलों की बैठकों में एक एक सीट की समीक्षा कर स्थानीय नेताओं से रिपोर्ट लेने और अपने पास मौजूद सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रत्याशी चयन का काम कर रहे हैं. अखिलेश यादव ठीक वैसे ही प्रत्याशियों के ध्यान में जुटे हैं, जैसे साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने किया था. हर सीट का आकलन कर उस समीकरण पर फिट बैठने वाले उम्मीदवार को चुनने का काम किया जा रहा है.
सपा ने प्रदेश में कराया है सर्वे
सपा ने पूरे प्रदेश में एक सर्वे कराया है. इस सर्वे में जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे और सपा नेताओं की पकड़ को लेकर आंकड़े हैं. इस रिपोर्ट के आधार पर वो जिला इकाई की बैठक में अपने पदाधिकारियों से आंकड़े समझ रहे. सर्वे रिपोर्ट और अपने नेताओं के आंकड़े का मिलान करने के बाद उस सीट पर मुद्दे क्या हैं, कौन बेहतर चुनाव लड़ सकता है, इस पर चर्चा हो रही है। इसमें सबसे बड़ा फैक्टर जाति का है.
पैरवी पर नहीं, क्षमता के आधार पर टिकट
सूत्र बता रहे हैं कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार पैरवी के आधार पर नहीं बल्कि चुनाव लड़ने की क्षमता और नेता की पकड़ को टिकट का आधार बना रहे हैं. जिला इकाई की बैठक के बाद जिस नाम को सबसे मुफीद पाया जा रहा है, उस नेता को बिना शोर शराबे के चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटने को लेकर हरी झंडी दे दी जा रही है. पार्टी का मानना है कि अभी से प्रत्याशी को पता रहेगा कि उसे टिकट मिलने वाला है तो वो तैयारियों में जुटकर बेहतर नतीजे दे सकता है.
कांग्रेस के साथ होगा गठबंधन?
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में सपा को 111 सीटें मिली थीं। हालांकि 2022 में सपा का गठबंधन सुभासपा से था लेकिन अब वो इंडिया अलायन्स में कांग्रेस के साथ है. पिछले लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस साथ आए और नतीजों में इसका बेहतर अंजाम दिखा जब सपा को 37 और कांग्रेस को छह सीटें हासिल हुईं. आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ सीटों का बंटवारा होना अभी बाकी है लेकिन सपा हर सीट पर अपने लोगों को तैयार कर मजबूत चुनाव लड़ने की रणनीति के साथ मैदान में जाना चाहती है.
'चुनाव लड़ना है तो जिला अध्यक्ष पद छोड़ें'
समाजवादी पार्टी के सूत्रों ने बताया कि पार्टी के कुछ जिलाध्यक्ष भी चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं. जब ये बात सपा प्रमुख अखिलेश यादव को पता चली तो उन्होंने सीधा सवाल टिकटार्थियों से किया कि जिलाध्यक्ष के पद के साथ आप चुनाव कैसे लड़ सकते हैं. अगर जिलाध्यक्ष रहते वो चुनाव में उतरे तो उनका सारा फोकस अपनी सीट पर रहेगा. ऐसे में जिले के संगठन का संचालन ठीक से नहीं हो पाएगा. ऐसे के जिलाध्यक्ष को साफ कहा गया है कि अगर वो चुनाव लड़ना चाहते हैं तो पहले जिलाध्यक्ष का पद छोड़ें.
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