Noida International Airport inauguration: भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं में एक नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा का पहला चरण तैयार हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे, और इस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां ज़ोर-शोर से चल रही हैं.
गौतम बुद्ध नगर के जेवर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public–Private Partnership) मॉडल के तहत 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित यह एयरपोर्ट ग्रेटर नॉएडा और आसपास के क्षेत्र में विकास का नए केंद्रबिंदु होगा.
मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में तैयार
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, यमुना एक्सप्रेसवे पर रणनीतिक रूप से स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन प्रणालियों के निर्बाध जुड़ाव के साथ एक बहु-मोडल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जो यात्रियों और माल ढुलाई के लिए कुशल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा.
सरकार का आंकलन है कि नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा का पहला चरण शुरू होने के बाद इस हवाई अड्डे का इस्तेमाल सालाना एक करोड़ 20 लाख हवाई यात्री कर सकेंगे. इस नए हवाई अड्डा के पूरी तरह से विकसित होने पर इसकी क्षमता हर साल 7 करोड़ लोगों को हैंडल करने की होगी.
इसको देखते हुए भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार के साथ मिलकर एयरपोर्ट को आसपास के बड़े शहरों से जोड़ने और आसपास के इलाकों में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचा तैयार करने का फैसला किया है. सबसे ज़्यादा फोकस रोड, हाईवे और मेट्रो कनेक्टिविटी के तेज़ी से विस्तार करने पर है.
दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद से सीधा कनेक्शन
करीब दो हफ्ते पहले ही केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना उपमार्ग से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक नए सड़क के निर्माण के लिए 3630.77 करोड़ रुपये के के संशोधित खर्च (Capital Cost) को अनुमति दी है. इस नए कोर्रिडोर के निर्माण से दक्षिणी दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम में रहने वाले लोगों के लिए जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधी हाई-स्पीड रोड कनेक्टिविटी मिल जाएगी.
कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा जारी एक नोट के मुताबिक, 31.42 किलोमीटर लंबा यह गलियारा (corridor) दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधी और उच्च गति का संपर्क मार्ग होगा जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आर्थिक विकास और प्रचालन दक्षता को बढ़ावा मिलेगा.
यह गलियारा (corridor) ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे इस पूरे इलाके में multimodal transport (बहुआयामी परिवहन) व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी.
एलिवेटेड रोड और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
भारत सरकार के आंकलन के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं में एक इस प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन से जेवर हवाई अड्डे -दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे कॉरिडोर की आर्थिक विकास की क्षमता का कारगर उपयोग हो सकेगा, और फरीदाबाद में भी शहरी विकास का ढांचा मज़बूत करने में मदद मिलेगी.
भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, इस परियोजना का लगभग 11 किलोमीटर लंबा हिस्सा एलिवेटेड मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा जो डीएनडी-बल्लभगढ़ बाईपास और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच नए संपर्क मार्ग का महत्वपूर्ण खंड है और इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ता है.
यह एलिवेटेड रोड फरीदाबाद मास्टर प्लान, 2031 के तहत तय घनी आबादी वाले शहरी विकास और भविष्य के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए हरियाणा सरकार द्वारा निर्धारित क्षेत्र से होकर गुजरेगा. इस प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर पर 689.24 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है. हरियाणा सरकार इसका 450 करोड़ रुपये वहन करेगी.
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