Ganga Expressway Kab Chalu Hoga: 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसव का अब निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब यह उद्घाटन के लिए भी पूरी तरह से तैयार है. यूपी एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) ने संकेत दिया है कि इसका औपचारिक उद्घाटन 25 मार्च से 31 मार्च के बीच हो सकता है. राज्य सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क कर रही है ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जा सके. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि करोड़ों रुपये की लागत से बना यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ता है. आइए जानते हैं इसके रूट मैप, टॉल चार्ज से लेकर अन्य सुविधाओं के बारे में...
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1 अप्रैल 2026 से पुरी तरह खुल सकता है एक्सप्रेसवे
अधिकारियों के मुताबिक, ट्रायल रन और टोल सिस्टम की टेस्टिंग पहले ही सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है. अब तैयारी यह है कि 1 अप्रैल 2026 से एक्सप्रेसवे पर पूरी तरह वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी जाए और टोल ऑपरेशन्स भी शुरू हो जाएं. यह तारीख इसलिए चुनी गई है क्योंकि इसी दिन से नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत होती है, जिससे रिवेन्यू बढ़ाने में मदद मिलेगी.
गंगा एक्सप्रेसवे का पूरा रूट मैप
मेरठ के बिजौली गांव के पास से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर डंडू गांव तक जाने वाला गंगा एक्सप्रेसवे पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे, तेज रफ्तार मार्ग से जोड़ता है. यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत कुल 12 जिलों से होकर गुजरता है. उम्मीद है कि इसके चालू होने से इस पूरे क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज होगी.
कितना हो सकता है टोल चार्ज?
एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी. अभी यह सफर करीब 12 घंटे का होता है, लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी सिर्फ 6 से 7 घंटे में तय की जा सकेगी. हालांकि टोल रेट अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार कारों से लगभग ₹2.55 प्रति किलोमीटर टोल लिया जा सकता है. इस हिसाब से एक तरफ का सफर लगभग 1,515 रुपये में पड़ेगा. वहीं, छोटे कमर्शियल वाहनों से करीब 2,405 रुपये तक लिए जा सकते हैं, जबकि बसों और ट्रकों को लगभग 4,840 रुपये तक टोल देना पड़ सकता है.

बनाई गई इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप
शाहजहांपुर में एक्सप्रेसवे पर 3.5 किलोमीटर लंबा एयर स्ट्रिप भी बनाया गया है, जिसका इस्तेमाल भारतीय वायुसेना के विमान आपात स्थिति में टेकऑफ और लैंडिंग के लिए कर सकेंगे. पिछले साल इस स्ट्रिप पर राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29, जगुआर, C-130J सुपर हरक्यूलिस, AN-32 और MI-17 V5 हेलिकॉप्टर जैसे कई वायुसेना के विमानों ने 'लैंड ऐंड गो' ड्रिल्स भी की गई थी. इस एक्सप्रेसवे की खासियत यह है कि यहां लड़ाकू विमान दिन और रात दोनों समय लैंड कर सकते हैं. यह क्षमता देश में किसी और एयर स्ट्रिप में नहीं है. इससे पहले लखनऊ-आगरा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भी वायुसेना ने इमरजेंसी लैंडिंग ड्रिल्स की थीं, लेकिन वे केवल दिन के समय तक सीमित थीं.
सेफ्टी का भी पूरा ध्यान
एक्सप्रेसवे पर हर एक किलोमीटर की दूरी पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि रास्ते की लगातार निगरानी की जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो. ये सभी कैमरे टोल प्लाजा पर बने कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. इसके अलावा, हाईवे के किनारे‑किनारे जगह‑जगह इमरेजेंसी संपर्क नंबर वाले साइनबोर्ड भी लगाए जाएंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग तुरंत सहायता ले सकें.

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