Sedition Law News
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'हर सैनिक ये शपथ लेता है कि ....' : राजद्रोह कानून पर याचिका डालने वाले रिटायर्ड जनरल ने बताया सुप्रीम कोर्ट जाने का कारण
- Thursday May 12, 2022
- Reported by: विष्णु सोम
जनरल वोम्बतकेरे ने कहा कि मैंने देखा था कि बहुत सी चीजें गलत हो जाती हैं. मेरा मानना है कि अगर एक जगह अन्याय है, तो हर जगह अन्याय है. अन्याय का विरोध करना ही होगा.
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राजद्रोह कानून : SC के ऐतिहासिक फैसले की 5 खास बातें
- Wednesday May 11, 2022
- Edited by: राहुल कुमार
सुप्रीम कोर्ट में आज राजद्रोह कानून (Sedition Law) के मामले की हुई. भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुवाई वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ मामले की सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजद्रोह कानून पर तब तक रोक रहे, जब तक इसका पुनरीक्षण हो.
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राजद्रोह कानून की समीक्षा होने तक किसी के खिलाफ FIR नहीं, मौजूदा आरोपी भी ज़मानत के लिए दें अर्ज़ी : SC का ऐतिहासिक फैसला
- Wednesday May 11, 2022
- Edited by: राहुल कुमार
Sedition Law: सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ हम उम्मीद करते हैं कि जब तक कानून के उक्त प्रावधान पर फिर से विचार नहीं किया जाता है, तब तक केंद्र तथा राज्य नई प्राथमिकियां दर्ज करने, भादंसं की धारा 124ए के तहत कोई जांच करने या कोई दंडात्मक कार्रवाई करने से बचेंगे.''
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'जो नेहरू नहीं कर सके, वह हम कर रहे...' : राजद्रोह कानून पर SC में बोली केंद्र सरकार
- Wednesday May 11, 2022
- Reported by: सुकीर्ति द्विवेदी
मंगलवार को राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र भी हुआ.
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देशद्रोह कानून पर सरकार ने बदला रुख, SC में कहा - प्रावधानों पर पुनर्विचार करेंगे
- Monday May 9, 2022
- Edited by: सूर्यकांत पाठक
सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसने राजद्रोह कानून के प्रावधानों की फिर से जांच और पुनर्विचार करने का फैसला किया है. दो दिन पहले सरकार ने देश के औपनिवेशिक युग के राजद्रोह कानून का बचाव किया था और सुप्रीम कोर्ट से इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने के लिए कहा था.
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क्या है 'केदारनाथ बनाम बिहार सरकार फैसला'? देशद्रोह कानून पर सुनवाई में SC ने क्यों याद किया यह 60 साल पुराना मामला
- Thursday May 5, 2022
- Reported by: आशीष भार्गव
1962 में केदारनाथ बनाम बिहार राज्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था.
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'हनुमान चालीसा पढ़ने पर देशद्रोह का बनाया गया केस...' : SC में AG ने नवनीत राणा का उठाया मामला
- Thursday May 5, 2022
- Reported by: आशीष भार्गव
देशद्रोह कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सीजेआई एन वी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की स्पेशल बेंच में सुनवाई हुई.
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राजद्रोह कानून अंग्रेज़ों के ज़माने का, क्या आज़ादी के 75 साल बाद भी देश में इसकी ज़रूरत : SC का केंद्र से सवाल
- Thursday July 15, 2021
- Reported by: आशीष कुमार भार्गव
CJI एनवी रमना ने कहा कि इस कानून का इस्तेमाल अंग्रेजों ने आजादी के अभियान को दबाने के लिए किया था, असहमति की आवाज को चुप करने के लिए किया था. महात्मा गांधी और बाल गंगाधर तिलक पर भी ये धारा लगाई गई, क्या सरकार आजादी के 75 साल भी इस कानून को बनाए रखना चाहती है?
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए हो रहा कानून का दुरुपयोग : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश
- Monday October 12, 2020
- Reported by: भाषा
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने कहा है कि स्वतंत्र प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक का सबसे बुरा तरीका व्यक्ति पर राजद्रोह का आरोप लगा देना है.
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'हर सैनिक ये शपथ लेता है कि ....' : राजद्रोह कानून पर याचिका डालने वाले रिटायर्ड जनरल ने बताया सुप्रीम कोर्ट जाने का कारण
- Thursday May 12, 2022
- Reported by: विष्णु सोम
जनरल वोम्बतकेरे ने कहा कि मैंने देखा था कि बहुत सी चीजें गलत हो जाती हैं. मेरा मानना है कि अगर एक जगह अन्याय है, तो हर जगह अन्याय है. अन्याय का विरोध करना ही होगा.
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राजद्रोह कानून : SC के ऐतिहासिक फैसले की 5 खास बातें
- Wednesday May 11, 2022
- Edited by: राहुल कुमार
सुप्रीम कोर्ट में आज राजद्रोह कानून (Sedition Law) के मामले की हुई. भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुवाई वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ मामले की सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजद्रोह कानून पर तब तक रोक रहे, जब तक इसका पुनरीक्षण हो.
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राजद्रोह कानून की समीक्षा होने तक किसी के खिलाफ FIR नहीं, मौजूदा आरोपी भी ज़मानत के लिए दें अर्ज़ी : SC का ऐतिहासिक फैसला
- Wednesday May 11, 2022
- Edited by: राहुल कुमार
Sedition Law: सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ हम उम्मीद करते हैं कि जब तक कानून के उक्त प्रावधान पर फिर से विचार नहीं किया जाता है, तब तक केंद्र तथा राज्य नई प्राथमिकियां दर्ज करने, भादंसं की धारा 124ए के तहत कोई जांच करने या कोई दंडात्मक कार्रवाई करने से बचेंगे.''
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'जो नेहरू नहीं कर सके, वह हम कर रहे...' : राजद्रोह कानून पर SC में बोली केंद्र सरकार
- Wednesday May 11, 2022
- Reported by: सुकीर्ति द्विवेदी
मंगलवार को राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र भी हुआ.
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देशद्रोह कानून पर सरकार ने बदला रुख, SC में कहा - प्रावधानों पर पुनर्विचार करेंगे
- Monday May 9, 2022
- Edited by: सूर्यकांत पाठक
सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसने राजद्रोह कानून के प्रावधानों की फिर से जांच और पुनर्विचार करने का फैसला किया है. दो दिन पहले सरकार ने देश के औपनिवेशिक युग के राजद्रोह कानून का बचाव किया था और सुप्रीम कोर्ट से इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने के लिए कहा था.
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क्या है 'केदारनाथ बनाम बिहार सरकार फैसला'? देशद्रोह कानून पर सुनवाई में SC ने क्यों याद किया यह 60 साल पुराना मामला
- Thursday May 5, 2022
- Reported by: आशीष भार्गव
1962 में केदारनाथ बनाम बिहार राज्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था.
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'हनुमान चालीसा पढ़ने पर देशद्रोह का बनाया गया केस...' : SC में AG ने नवनीत राणा का उठाया मामला
- Thursday May 5, 2022
- Reported by: आशीष भार्गव
देशद्रोह कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सीजेआई एन वी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की स्पेशल बेंच में सुनवाई हुई.
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राजद्रोह कानून अंग्रेज़ों के ज़माने का, क्या आज़ादी के 75 साल बाद भी देश में इसकी ज़रूरत : SC का केंद्र से सवाल
- Thursday July 15, 2021
- Reported by: आशीष कुमार भार्गव
CJI एनवी रमना ने कहा कि इस कानून का इस्तेमाल अंग्रेजों ने आजादी के अभियान को दबाने के लिए किया था, असहमति की आवाज को चुप करने के लिए किया था. महात्मा गांधी और बाल गंगाधर तिलक पर भी ये धारा लगाई गई, क्या सरकार आजादी के 75 साल भी इस कानून को बनाए रखना चाहती है?
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए हो रहा कानून का दुरुपयोग : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश
- Monday October 12, 2020
- Reported by: भाषा
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने कहा है कि स्वतंत्र प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक का सबसे बुरा तरीका व्यक्ति पर राजद्रोह का आरोप लगा देना है.
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