Sabarimala Case In Court
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'ज्ञान कहीं से भी आए, व्हॉट्सएप यूनिवर्सिटी से नहीं', सबरीमाला मामले में जस्टिस नागरत्ना ने ऐसा क्यों कहा
- Thursday April 23, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव
सबरीमला मामले में 9 जजों की संविधान पीठ में आठवें दिन सुनवाई के दौरान ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ का जिक्र हुआ. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी जैसे स्रोतों से मिली जानकारी स्वीकार्य नहीं.
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पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में तो पुरुषों पर पाबंदी, सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट में SG ने परंपरा-पाबंदियों का उठाया मुद्दा
- Thursday April 9, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव
Sabarimala Mandir Case in Supreme Court: केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत के मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीसरे दिन सुनवाई हुई. केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दूसरे मंदिर की परंपराओं का हवाला दिया.
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आस्था बनाम राजनीति: सबरीमाला पर सुनवाई से पहले माकपा ने क्यों बदला अपना स्टैंड
- Wednesday April 8, 2026
- Nilanjan Mukhopadhyay
सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की एक संविधान पीठ सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश मामले की सुनवाई कर रही है. इसका फैसला दूसरे धर्मों के पूजा स्थलों पर भी लागू हो सकता है. यह समानता के अधिकार की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला होगा. इसके पीछे की राजनीति बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार और लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय.
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सबरीमला मामला : पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की तारीख कल तय करेगा सुप्रीम कोर्ट
- Monday October 22, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
सुप्रीम कोर्ट सबरीमला मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की तारीख कल तय करेगा. CJI ने कहा कि हमें पता है कि इस मामले में संविधान पीठ के फैसले पर 19 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल हैं. नेशनल अयप्पा डिवोटी एसोसिएशन ने इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है.
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सबरीमाला मंदिर मामला: SC का जल्द सुनवाई से इनकार, CJI बोले- कितनी भी जल्दी हो तो 16 अक्टूबर से पहले संभव नहीं
- Tuesday October 9, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा कि ये केस नियमित तरीके से सुना जाएगा. CJI गोगोई ने कहा कि कितनी भी जल्दी हो तो 16 अक्टूबर से पहले ये संभव नहीं है.
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सबरीमाला मंदिर: सुप्रीम कोर्ट के आदेश को केरल सरकार ने लागू करने का लिया फैसला तो संघ ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
- Thursday October 4, 2018
- भाषा
केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मिली सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के फैसले पर आरएसएस का बयान आया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बुधवार को कहा कि सबरीमला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विचार करते समय श्रद्धालुओं की भावना की अनदेखी नहीं की जा सकती. इसके साथ ही आरएसएस ने सभी संबंधित पक्षों से एक साथ आने तथा ‘न्यायिक विकल्प से भी’ मसले का हल करने का आह्वान किया.
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सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाएं प्रवेश कर सकेंगी? सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज
- Friday September 28, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
केरल के सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ शुक्रवार को फैसला सुनाएगी. फिलहाल 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है.
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सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी पर अनजान बने नहीं रह सकते: न्यायालय
- Friday July 27, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
सीजेआई ने कहा कि आपकी (वकील) दलीलें प्रभावशाली हैं, मैं यह स्वीकार करता हूं. पीठ ने कहा लेकिन अदालत इस मामले के इस तथ्य पर अनजान बनकर नहीं रह सकते कि महिलाओं के एक वर्ग को शारीरिक कारणों (मासिक धर्म) से अनुमति नहीं दी जा रही. पाबंदी को चुनौती देने वाली इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीठ ने पूछा कि क्या एक आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर सबरीमला मंदिर में पाबंदी धार्मिक संप्रदाय की जरूरी और अभिन्न परंपरा है.
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सुप्रीम कोर्ट से बोले एमिकस चंद्रण: सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी, दलितों के साथ छुआछूत की तरह
- Thursday July 19, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी राजू राम चंद्रण ने कहा कि सबरीमाला में एक उम्र सीमा के महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी उसी तरह है जैसे दलितों के साथ छुआछूत. मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस राजू राम चंद्रन ने कहा अगर किसी महिला को मासिक धर्म की वजह से रोका जाता है तो ये भी दलितों से छुआछूत की तरह भेदभाव जैसा है. बता दें कि केरल हाईकोर्ट ने इस पाबन्दी को सही ठहराते हुए कहा था कि मंदिर जाने से पहले 41 दिन का ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना होता है. महिलाएं मासिक धर्म की वजह से अपवित्र होती हैं और वो इसे पूर्ण नहीं कर पातीं. लिहाज़ा उनके प्रवेश पर पाबंदी जायज है. केरल हाइकोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.
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'ज्ञान कहीं से भी आए, व्हॉट्सएप यूनिवर्सिटी से नहीं', सबरीमाला मामले में जस्टिस नागरत्ना ने ऐसा क्यों कहा
- Thursday April 23, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव
सबरीमला मामले में 9 जजों की संविधान पीठ में आठवें दिन सुनवाई के दौरान ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ का जिक्र हुआ. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी जैसे स्रोतों से मिली जानकारी स्वीकार्य नहीं.
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पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में तो पुरुषों पर पाबंदी, सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट में SG ने परंपरा-पाबंदियों का उठाया मुद्दा
- Thursday April 9, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव
Sabarimala Mandir Case in Supreme Court: केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत के मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीसरे दिन सुनवाई हुई. केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दूसरे मंदिर की परंपराओं का हवाला दिया.
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आस्था बनाम राजनीति: सबरीमाला पर सुनवाई से पहले माकपा ने क्यों बदला अपना स्टैंड
- Wednesday April 8, 2026
- Nilanjan Mukhopadhyay
सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की एक संविधान पीठ सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश मामले की सुनवाई कर रही है. इसका फैसला दूसरे धर्मों के पूजा स्थलों पर भी लागू हो सकता है. यह समानता के अधिकार की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला होगा. इसके पीछे की राजनीति बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार और लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय.
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सबरीमला मामला : पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की तारीख कल तय करेगा सुप्रीम कोर्ट
- Monday October 22, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
सुप्रीम कोर्ट सबरीमला मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की तारीख कल तय करेगा. CJI ने कहा कि हमें पता है कि इस मामले में संविधान पीठ के फैसले पर 19 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल हैं. नेशनल अयप्पा डिवोटी एसोसिएशन ने इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है.
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सबरीमाला मंदिर मामला: SC का जल्द सुनवाई से इनकार, CJI बोले- कितनी भी जल्दी हो तो 16 अक्टूबर से पहले संभव नहीं
- Tuesday October 9, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा कि ये केस नियमित तरीके से सुना जाएगा. CJI गोगोई ने कहा कि कितनी भी जल्दी हो तो 16 अक्टूबर से पहले ये संभव नहीं है.
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सबरीमाला मंदिर: सुप्रीम कोर्ट के आदेश को केरल सरकार ने लागू करने का लिया फैसला तो संघ ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
- Thursday October 4, 2018
- भाषा
केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मिली सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के फैसले पर आरएसएस का बयान आया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बुधवार को कहा कि सबरीमला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विचार करते समय श्रद्धालुओं की भावना की अनदेखी नहीं की जा सकती. इसके साथ ही आरएसएस ने सभी संबंधित पक्षों से एक साथ आने तथा ‘न्यायिक विकल्प से भी’ मसले का हल करने का आह्वान किया.
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सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाएं प्रवेश कर सकेंगी? सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज
- Friday September 28, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
केरल के सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ शुक्रवार को फैसला सुनाएगी. फिलहाल 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है.
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सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी पर अनजान बने नहीं रह सकते: न्यायालय
- Friday July 27, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
सीजेआई ने कहा कि आपकी (वकील) दलीलें प्रभावशाली हैं, मैं यह स्वीकार करता हूं. पीठ ने कहा लेकिन अदालत इस मामले के इस तथ्य पर अनजान बनकर नहीं रह सकते कि महिलाओं के एक वर्ग को शारीरिक कारणों (मासिक धर्म) से अनुमति नहीं दी जा रही. पाबंदी को चुनौती देने वाली इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीठ ने पूछा कि क्या एक आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर सबरीमला मंदिर में पाबंदी धार्मिक संप्रदाय की जरूरी और अभिन्न परंपरा है.
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सुप्रीम कोर्ट से बोले एमिकस चंद्रण: सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी, दलितों के साथ छुआछूत की तरह
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- Reported by: आशीष भार्गव
केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी राजू राम चंद्रण ने कहा कि सबरीमाला में एक उम्र सीमा के महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी उसी तरह है जैसे दलितों के साथ छुआछूत. मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस राजू राम चंद्रन ने कहा अगर किसी महिला को मासिक धर्म की वजह से रोका जाता है तो ये भी दलितों से छुआछूत की तरह भेदभाव जैसा है. बता दें कि केरल हाईकोर्ट ने इस पाबन्दी को सही ठहराते हुए कहा था कि मंदिर जाने से पहले 41 दिन का ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना होता है. महिलाएं मासिक धर्म की वजह से अपवित्र होती हैं और वो इसे पूर्ण नहीं कर पातीं. लिहाज़ा उनके प्रवेश पर पाबंदी जायज है. केरल हाइकोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.
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